'Gen-Z देशद्रोही नहीं...', शिक्षा सुधारों लेकर हुए छात्र आंदोलन पर मोहन भागवत का बड़ा बयान

RSS प्रमुख मोहन भागवत ने कहा कि Gen Z के विरोध को देशविरोधी नहीं माना जाना चाहिए. उन्होंने शिक्षा सुधार, फीस नियंत्रण और शिक्षा पर अधिक बजट की भी वकालत की.

ANI
Sagar Bhardwaj

राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) के सरसंघचालक मोहन भागवत ने गुरुवार को मुंबई में आयोजित एक कार्यक्रम में नई पीढ़ी को लेकर महत्वपूर्ण टिप्पणी की. उन्होंने कहा कि यदि Gen Z किसी मुद्दे पर विरोध प्रदर्शन कर रही है तो उसे देशविरोधी नहीं कहा जाना चाहिए. उनके अनुसार यह देश की अपनी नई पीढ़ी है, जो हर विषय पर तार्किक जवाब चाहती है और उसकी सोच पिछली पीढ़ियों से अलग है.

छात्रों पर कार्रवाई को लेकर जताई चिंता

दिल्ली में पिछले महीने छात्र प्रदर्शन के दौरान हुई पुलिस कार्रवाई का जिक्र करते हुए मोहन भागवत ने कहा कि उनके पास इस बात का जवाब नहीं है कि लाठीचार्ज और पैलेट गन का इस्तेमाल क्यों किया गया. उन्होंने कहा कि इन घटनाओं के पीछे की परिस्थितियों और कारणों का गंभीरता से अध्ययन किया जाना चाहिए. हालांकि, उन्होंने इस मामले में किसी पर प्रत्यक्ष आरोप नहीं लगाया.


शिक्षा सुधार की जरूरत पर दिया जोर

RSS प्रमुख ने कहा कि शिक्षा व्यवस्था में केवल एक-दो बदलाव पर्याप्त नहीं होंगे, बल्कि व्यापक सुधारों की आवश्यकता है. उन्होंने स्पष्ट कहा कि शिक्षा को व्यवसाय नहीं बनाया जाना चाहिए और हर व्यक्ति को गुणवत्तापूर्ण शिक्षा उपलब्ध होनी चाहिए. उन्होंने स्कूलों और कॉलेजों की फीस संरचना की समीक्षा करने तथा शिक्षा को अधिक सुलभ और किफायती बनाने की जरूरत बताई.

शिक्षा बजट बढ़ाने और जनभागीदारी की वकालत

मोहन भागवत ने शिक्षा पर सरकारी खर्च बढ़ाकर कुल बजट का 6 प्रतिशत करने की मांग का समर्थन किया. उन्होंने कहा कि शिक्षा की गुणवत्ता सुधारने के लिए केवल सरकारी प्रयास पर्याप्त नहीं हैं, बल्कि समाज की भागीदारी भी जरूरी है. स्कूलों के विकास, शिक्षकों के प्रशिक्षण और बेहतर शिक्षण व्यवस्था पर विशेष ध्यान देने की आवश्यकता है. उनका कहना था कि शिक्षा का उद्देश्य समाज को सक्षम बनाना होना चाहिए, न कि इसे केवल व्यवसाय का माध्यम बनाया जाए.