10 साल की जेल, 10 करोड़ जुर्माना...पेपर लीक संशोधन बिल को कैबिनेट की मिली मंजूरी
मोदी कैबिनेट ने पेपर लीक कानून को और सख्त बनाने वाले संशोधन बिल को मंजूरी दी. नए प्रावधानों में 10 साल तक की जेल, 10 करोड़ जुर्माना और फास्ट-ट्रैक सुनवाई शामिल है.
देशभर में NEET पेपर लीक विवाद और छात्रों के विरोध-प्रदर्शनों के बीच केंद्र सरकार ने बड़ा कदम उठाया है. केंद्रीय मंत्रिमंडल ने पब्लिक एग्जामिनेशंस (प्रिवेंशन ऑफ अनफेयर मीन्स) एक्ट, 2024 को और अधिक कठोर बनाने वाले संशोधन प्रस्ताव को मंजूरी दे दी है. सरकार इस संशोधित विधेयक को अगले सप्ताह संसद के मानसून सत्र में पेश करने की तैयारी कर रही है. सरकार का दावा है कि नए कानून का उद्देश्य परीक्षा प्रणाली में पारदर्शिता बढ़ाना और संगठित पेपर लीक नेटवर्क पर निर्णायक कार्रवाई करना है.
10 साल जेल और 10 करोड़ का जुर्माना
संशोधित बिल में पेपर लीक से जुड़े संगठित अपराधों पर पहले से कहीं अधिक सख्त दंड का प्रस्ताव रखा गया है. नए प्रावधानों के अनुसार दोषियों को 10 वर्ष तक की सजा और 10 करोड़ रुपये तक के जुर्माने का सामना करना पड़ सकता है. सरकार का मानना है कि आर्थिक और कानूनी दोनों स्तरों पर कड़ी कार्रवाई से पेपर लीक माफियाओं पर प्रभावी रोक लगाई जा सकेगी.
छात्रों का भविष्य सर्वोच्च प्राथमिकता: पीएम
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने हाल ही में छात्रों के नाम जारी वीडियो संदेश में कहा कि पेपर लीक केवल एक कानूनी अपराध नहीं, बल्कि लाखों युवाओं और उनके परिवारों के भरोसे पर हमला है. उन्होंने बताया कि सरकार ने पिछले महीनों में कई आरोपियों को गिरफ्तार कराया है और परीक्षा प्रक्रिया को समय पर पूरा कराकर छात्रों का शैक्षणिक वर्ष बचाने का प्रयास किया. साथ ही उन्होंने संसद में नया संशोधन बिल लाने और उसे शीघ्र पारित कराने की प्रतिबद्धता दोहराई.
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फास्ट-ट्रैक कोर्ट और तेज न्याय पर जोर
सरकार ने पेपर लीक मामलों के लिए विशेष फास्ट-ट्रैक अदालतों की व्यवस्था का भी प्रस्ताव रखा है. लक्ष्य यह है कि ऐसे मामलों की सुनवाई तेजी से पूरी हो और तीन महीने के भीतर निर्णय तथा सजा सुनिश्चित की जा सके. सरकार का मानना है कि त्वरित न्याय से भविष्य में ऐसे अपराधों पर प्रभावी रोक लगेगी और परीक्षा प्रणाली पर जनता का भरोसा मजबूत होगा.
विरोध जारी, जांच भी तेज
NEET-UG पेपर लीक मामले को लेकर दिल्ली के जंतर-मंतर सहित कई स्थानों पर प्रदर्शन जारी हैं. प्रदर्शनकारी शिक्षा व्यवस्था में सुधार, जवाबदेही तय करने और दोषियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की मांग कर रहे हैं. इस मामले की जांच केंद्रीय एजेंसियां कर रही हैं और विभिन्न राज्यों से कई आरोपियों की गिरफ्तारी हो चुकी है. संसद में भी इस मुद्दे पर लगातार राजनीतिक बहस जारी है.
पहले से लागू कानून में क्या बदलाव होगा?
देश में लोक परीक्षा (अनुचित साधन निवारण) अधिनियम, 2024 पहले से लागू है, जिसके तहत पेपर लीक, संगठित गिरोहों और दोषी परीक्षा एजेंसियों के लिए जेल, जुर्माना और अन्य दंड का प्रावधान है. मौजूदा कानून में पेपर लीक के लिए 3 से 5 वर्ष की सजा तथा 10 लाख रुपये तक जुर्माना, जबकि संगठित गिरोहों के लिए 5 से 10 वर्ष की जेल और 1 करोड़ रुपये तक जुर्माने का प्रावधान है. प्रस्तावित संशोधन इन दंडों को और अधिक कठोर बनाकर परीक्षा प्रणाली की विश्वसनीयता को मजबूत करने की दिशा में सरकार का अगला बड़ा कदम माना जा रहा है.