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6 रुपए की सिरिंज 57 में, अस्पतालों में चल रहा मजबूर मरीजों को लूटने का गोरखधंधा, तुकाराम मुंढे का बड़ा खुलासा

महाराष्ट्र FDA आयुक्त तुकाराम मुंढे ने निजी अस्पतालों में सर्जिकल सामानों की खरीद कीमत और MRP के भारी अंतर को उजागर करते हुए सरकार से कीमत नियंत्रण की मांग की है.

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Sagar Bhardwaj

महाराष्ट्र खाद्य एवं औषधि प्रशासन (FDA) के आयुक्त तुकाराम मुंढे ने निजी अस्पतालों में इस्तेमाल होने वाले मेडिकल सामानों की खरीद कीमत और अधिकतम खुदरा मूल्य (MRP) के बीच भारी अंतर को उजागर किया है. उन्होंने बताया कि अस्पताल बेहद कम दामों में खरीदे गए सामान को मरीजों को अत्यधिक MRP पर बेचकर मोटा मुनाफा कमा रहे हैं.

खरीद मूल्य और MRP में 2800% से अधिक का अंतर

मुंढे के अनुसार, एक निजी अस्पताल ने 11.05 रुपए में खरीदा गया IV सेट मरीज को 325 रुपए की MRP पर दिया, जो कि 2,841% का अंतर है. इसी तरह 6.75 की सिरिंज 57.20 रुपए (747% अधिक), 29.41 रुए का कैथेटर 310 रुपए और 22.50 का IV कैनुला 424 रुपए में बेचा जा रहा है.

असहाय मरीज और नियमों की कमी

FDA आयुक्त ने कहा कि अस्पताल में भर्ती मरीज के पास सामान चुनने या कीमतों की तुलना करने का विकल्प नहीं होता. 'ड्रग्स (प्राइस कंट्रोल) ऑर्डर, 2013' (DPCO) के तहत जरूरी दवाओं की कीमतें तो तय हैं, लेकिन अधिकांश मेडिकल डिवाइस और सर्जिकल कंज्यूमेबल्स पर ऐसी कोई सीमा लागू नहीं है.


मुंढे ने सरकार को दिए महत्वपूर्ण सुझाव

इस लूट को रोकने के लिए तुकाराम मुंढे ने केंद्रीय रसायन व उर्वरक मंत्रालय और NPPA से सिफारिश की है:

  •  सर्जिकल सामानों को DPCO 2013 के तहत लाया जाए.
  •  अस्पताल में भर्ती मरीजों के लिए इस्तेमाल होने वाले उपकरणों की कानूनी निगरानी हो.
  •  थोक खरीद मूल्य और MRP के बीच का अंतर सीमित करने की सीमा तय की जाए.