20 सरकारी, 15 निजी गाड़ियां का काफिला लेकर पहुंचे महाराष्ट्र के मंत्री; पीएम मोदी की अपील रही बेअसर
महाराष्ट्र के मंत्री संजय राठौड़ ईंधन संकट के बीच पोहरादेवी दौरे पर 20 से अधिक सरकारी और 15 निजी गाड़ियों के विशाल काफिले के साथ पहुंचे जिससे प्रधानमंत्री मोदी की 'ईंधन बचाने' की अपील की अनदेखी करने पर उनकी भारी आलोचना हो रही है.
एक तरफ संकट के समय देश के प्रधानमंत्री मोदी देश की जनता से ईंधन को बचाने की अपील कर रहे हैं तो वहीं दूसरी तरफ नेता मंत्री ही प्रधानमंत्री की अपील को नजरअंदाज करते दिख रहे हैं. कुछ ऐसा ही मामला महाराष्ट्र के एक मंत्री का सामने आया है. दरअसल महाराष्ट्र के मृदा एवं जल संरक्षण मंत्री संजय राठौड़ एक म्यूजियम का निरीक्षण करने और कुछ स्थानीय मामलों की समीक्षा के लिए गाड़ियों का काफिला लेकर पहुंचे थे, जिसका वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हो गया. और अब लोग ईंधन संकट के इस दौर में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की 'ईंधन बचाने' की अपील को मंत्री द्वारा नजरअंदाज करने का आरोप लगा रहे हैं.
प्रधानमंत्री ने की थी ईंधन की बचत की अपील
दरअसल खाड़ी क्षेत्र में बढ़ते तनाव और संघर्ष के कारण दुनिया भर में ईंधन की आपूर्ति और ऊर्जा सुरक्षा को लेकर चिंताएं काफी बढ़ गई हैं. इसी को देखते हुए प्रधानमंत्री मोदी ने सभी मंत्रियों, राजनेताओं और आम नागरिकों से बेवजह ईंधन की खपत कम करने का आग्रह किया था. रिपोर्टों के अनुसार कई जनप्रतिनिधियों ने इस अपील पर अमल करते हुए अपनी यात्राएं कम कर दी हैं और सरकारी काफिले की गाड़ियों की संख्या में भी कटौती की है.
यहां देखें काफिले का वीडियो
मंत्री संजय राठौड़ ने नहीं मानी पीएम की बात
लेकिन मंत्री संजय राठौड़ की वाशिम जिले के पोहरादेवी की हालिया यात्रा विवादों के घेरे में आ गई है. बताया जा रहा है कि राठौड़ ने मुंबई से नागपुर तक का सफर हवाई जहाज से तय किया और फिर वहां से पोहरादेवी पहुंचने के लिए हेलीकॉप्टर का इस्तेमाल किया. इस यात्रा में पूर्व सांसद विजय दर्डा भी उनके साथ शामिल थे.
विवाद तब और बढ़ गया जब इस दौरे के दौरान मंत्री जी के साथ गाड़ियों का एक बहुत बड़ा काफिला देखा गया. सोशल मीडिया से मिल रही जानकारी के अनुसार उनके इस आधिकारिक काफिले में 20 से ज्यादा सरकारी गाड़ियां शामिल थीं. इसके अलावा लगभग 12 से 15 निजी गाड़ियां भी उनके साथ चल रही थीं. ऐसे में लोगों ने सवाल उठाना शुरू कर दिया कि जब सरकार खुद ईंधन बचाने पर जोर दे रही है तो इतने बड़े काफिले के साथ घूमने की क्या जरूरत थी?
म्यूजियम के निरीक्षण के लिए ले गए थे काफिला
यह दौरा मुख्य रूप से एक म्यूजियम का निरीक्षण करने और कुछ स्थानीय मामलों की समीक्षा के लिए आयोजित किया गया था. आलोचकों का कहना है कि गाड़ियों का यह तामझाम ईंधन बचाने की देशव्यापी अपील के बिल्कुल उलट है. हालांकि इस आलोचना पर सफाई देते हुए मंत्री राठौड़ ने अपना बचाव किया है.
मंत्री ने मामले पर क्या कहा?
उन्होंने कहा कि यह दौरा बेहद जरूरी काम के सिलसिले में था जिसे टाला नहीं जा सकता था. उन्होंने दावा किया कि ईंधन बचाने के दिशा-निर्देशों का पालन करते हुए उन्होंने गाड़ियों की संख्या पहले ही सामान्य से करीब आधी कर दी थी. लेकिन इस सफाई के बाद भी जनता के बीच इस बात को लेकर बहस छिड़ गई है कि क्या नेताओं को ऐसे संकट के समय खुद आगे बढ़कर एक बेहतर उदाहरण पेश नहीं करना चाहिए?
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