नई दिल्ली: अमेरिका-इजरायल और ईरान के बीच बढ़ रहे तनाव के कारण ऊर्जा आपूर्ति पर खतरा मंडराना शुरू हो गया है. जिसे कंट्रोल करने के लिए केंद्र सरकार ने सख्त एक्शन लिया है. सरकार ने LPG की कमी को रोकने के लिए एसेंशियल कमोडिटीज़ एक्ट 1955 यानी ESMA के तहत आने वाली आपातकालीन शक्तियों का इस्तेमाल किया है.
भारत की LPG जरूरत का बड़ा हिस्सा इम्पोर्ट पर निर्भर करता है. साल 2024-25 में देश ने लगभग 31-33 मिलियन टन LPG का इस्तेमाल किया, जिसमें से देश में केवल 12-13 मिलियन टन देश में तैयार किया गया था, बाकी दूसरे देशों से आयात किए गए.
भारत LPG के लिए सऊदी अरब, कतर, UAE जैसे देशों पर निर्भर है. इन सभी देशों के जहाज स्ट्रेट ऑफ होर्मुज से गुजरते हैं. युद्ध के कारण इस संकरी रास्तों में जहाजों की आवाजाही प्रभावित हुई है. कतर जैसे प्रमुख सप्लायर की LNG और LPG उत्पादन सुविधाएं भी प्रभावित हुईं. इससे भारत में नैचुरल गैस और LPG की सप्लाई पर असर पड़ा है.
कमर्शियल गैसों के सप्लाई में ब्रेक लगने की वजह से बैंगलोर और मुंबई जैसे शहरों के कई रेस्टोरेंट और होटल पर ताले लगने शुरू हो गए हैं. स्थिति को कंट्रोल में लाने के लिए सरकार द्वारा जारी किए गए नोटिफिकेशन में साफ कहा गया है कि प्रोपेन और ब्यूटेन को पेट्रोकेमिकल्स बनाने के बजाय LPG उत्पादन में इस्तेमाल किया जाए. सभी रिफाइनरियों को अधिकतम उत्पादन करने के निर्देश दिए गए है. LPG केवल तीन सरकारी तेल विपणन कंपनियों को सप्लाई होता है. जिसमें इंडियन ऑयल कॉर्पोरेशन, भारत पेट्रोलियम और हिंदुस्तान पेट्रोलियम शामिल है.
देश में लगभग 33 करोड़ से ज्यादा LPG कनेक्शन एक्टिव हैं. हर घर में चूल्हा जलता रहे इसके लिए सरकार द्वारा LPG के सप्लाई को मेंटेन करने की कोशिश की जा रही है. इसके अलावा भारत में रोजाना करीब 195 मिलियन स्टैंडर्ड क्यूबिक मीटर नैचुरल गैस का इस्तेमाल किया जाता है. इसका आधा हिस्सा दूसरे देशों से आता है. इसका इस्तेमाल बिजली उत्पादन, उर्वरक कारखाने, CNG वाहन, पाइपलाइन से घरों में खाना पकाने के लिए और स्टील, सिरेमिक जैसी इंडस्ट्री में किया जाता है. लेकिन युद्ध की वजह से लॉजिस्टिक प्रभावित हुई है, जिसका असर अब नजर आना शुरू हो गया है.