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मिडिल ईस्ट तनाव के कारण बढ़ सकते हैं साबुन-शैंपू के दाम! कच्चे तेल की कीमत बढ़ने से FMCG कंपनियों को हो रहा नुकसान

मिडिल ईस्ट में तनाव का असर अब भारत के आम नागरिकों पर भी पड़ सकता है. FMCG कंपनियां अब अपने प्रोडक्ट को या तो महंगा कर सकती है या फिर पैकेट को छोटे कर सकते हैं, जिससे लोगों की परेशानी बढ़ सकती है.

Grok AI
Shanu Sharma

मिडिल ईस्ट में चल रहे तनाव का असर अब FMCG कंपनियों पर पड़ने लगा है. अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतें तेजी से बढ़ रही हैं. इस बढ़ोतरी के कारण रोजमर्रा के सामान की लागत बढ़ गई है. FMCG कंपनियां अब या तो पैकेट का वजन कम करने या कीमत बढ़ाने पर विचार कर रही हैं.

कच्चे तेल की कीमतें अब 100 डॉलर प्रति बैरल के पार पहुंच चुकी हैं. कुछ रिपोर्ट के मुताबिक ब्रेंट क्रूड 107 डॉलर तक पहुंच चुका है. पिछले तीन सालों में यह स्तर सबसे ऊंचा है. खाड़ी क्षेत्र की रिफाइनरियां बंद होने से पॉलिमर और पैकेजिंग सामग्री की कमी हो गई है.इससे वैश्विक स्तर पर लागत में इजाफा हुआ है.

क्यों बढ़ सकतें हैं दाम?

FMCG उत्पादों में पैकेजिंग का बड़ा हिस्सा कच्चे तेल से जुड़ा होता है. प्लास्टिक फिल्म, पॉलीप्रोपाइलीन, पॉलीएथिलीन और सैशे इसी से बनाए जाते हैं. डिटर्जेंट में लिनियर अल्काइल बेंजीन (LAB) का इस्तेमाल होता है. यह भी तेल पर निर्भर है, पैकेजिंग कुल लागत का 15-20 प्रतिशत हिस्सा लेती है.

कंपनियों  का कहना है कि अगर तेल की कीमतें लंबे समय ऊंची रहीं तो छोटे पैकेट का वजन कम करना पड़ सकता है. वहीं बड़े पैक की कीमत बढ़ाई जा सकती है. इसका असर स्नैक्स और बिस्कुट जैसे उत्पादों पर भी पड़ सकता है. प्लास्टिक पैकेजिंग बनाने वाली कंपनी का कहना है कि अब कंपनियां खाड़ी देशों के अलावा चीन, थाईलैंड और सिंगापुर से पॉलिमर मंगवा रही हैं. पहले गल्फ और साउथ-ईस्ट एशिया से बराबर सप्लाई होती थी, लेकिन अब लॉजिस्टिक्स प्रभावित होने से समस्या बढ़ गई है.

आम नागरिकों को बढ़ सकती है चिंता

यह स्थिति आम नागरिकों के लिए चिंता पैदा कर सकती है. बिस्कुट, साबुन, डिटर्जेंट और शैंपू जैसे रोजमर्रा के लिए इस्तेमाल किए जाने वाले सामान महंगे हो सकते है या फिर उनके क्वांटिटी में कमी की जा सकती है. कुछ दिनों पहले  GST कटौती से राहत दी गई थी, लेकिन अब कच्चे तेल की कीमत के कारण कंपनियों को परेशानी हो रही है. कंपनियां पहले लागत खुद सोखने की कोशिश करेंगी, लेकिन लंबे समय तक ऐसा नहीं हो पाएगा. विशेषज्ञों का कहना है कि आने वाले महीनों में 1-3 प्रतिशत तक कीमत बढ़ सकती है. भारत जैसे तेल आयातक देश का इसपर ज्यादा असर पड़ सकता है.