Manipur Violence: तेंगनुपाल में मारे गए 13 लोगों की हुई पहचान, जानें पुलिस ने क्या बताया?

मृतकों में शामिल एक शक्स की बहन ने बताया कि जब हिंसा की जानकारी मिली तो मैंने अपने भाई के मोबाइल पर फोन किया. फोन बंद था. हमें आशंका हुई, फिर हम मोर्चरी पहुंचे जहां मेरे भाई की लाश मिली.

Om Pratap

Manipur violence identified 13 men who found dead: मणिपुर के तेंगनुपाल जिले में सोमवार सुबह 13 लोगों के शव पाए गए थे. ये सभी शव मृतकों के घरों से करीब 100 किलोमीटर की दूरी पर बरामद किए गए थे. फिलहाल, ये जानकारी नहीं मिल पाई है कि ये 13 लोग घटनास्थल तक कैसे पहुंचे, जहां वे खूनी संघर्ष के शिकार हो गए. सभी मृतक मैतेई समुदाय के थे. उनकी उम्र 17 से 47 साल के बीच बताई जा रही है. वे सभी विष्णुपुर, इंफाल पश्चिम, इंफाल पूर्व और काकचिंग के घाटी जिलों के रहने वाले थे.

बता दें कि असम राइफल्स के जवानों को सोमवार को सुबह 10.30 बजे के आसपास क्षेत्र में गोलीबारी की सूचना मिली थी. सुरक्षा बल के जवान घटनास्थल लीथू पहुंचे, जहां 13 मैतेई पुरुषों के गोलियों से छलनी शव मिले थे. बता दें कि लीथू इलाका म्यांमार सीमा से ज्यादा दूर नहीं है और ये जंगली इलाका है. शवों के बरामद होने के बाद पोस्टमार्टम के लिए इंफाल पूर्व में जवाहरलाल नेहरू आयुर्विज्ञान संस्थान ले जाया गया था. मंगलवार को उनकी पहचान पूरी की गई. 

मृतकों के परिजन ने क्या कहा?

मृतकों में शामिल 25 साल के थिंगोम रॉकी सिंह की छोटी बहन के मुताबिक, उनका परिवार तोरबुंग से विस्थापित हो गया है. उन्होंने बताया कि तोरबुंग गांव मैतेई प्रभुत्व वाले बिष्णुपुर और कुकी प्रभुत्व वाले चुराचांदपुर जिले की सीमा पर है. उसने बताया कि इसी जगह सबसे पहले 4 मई को हिंसा भड़की थी. इसके बाद हमारा परिवार इंफाल पश्चिम जिले के थांगमीबंद में बनाए गए राहत शिविर में चला गया था. राहत शिविर में आने के बाद थिंगोम रॉकी सिंह यहां से चला गया था, जिसके बाद हमने उसे नहीं देखा था. 

अन्य मृतकों में शामिल पुरुषों के परिजन ने बताया कि वे सभी घटना से कुछ दिन पहले ही अपना घर छोड़ चुके थे. मृतकों में शामिल 39 साल के मोइरांगथेम किंग्सन सिंह की बहन ने बताया कि हिंसा के बाद से वे अपने घर से दूर रहते थे. मेरा भाई हिंसा पीड़ितों की मदद करता था. दो दिन पहले ही वो घर से निकला था. उसने बताया कि घटना के बारे में उसे सोशल मीडिया के जरिए जानकारी मिली. 

फोन बंद था, मोर्चरी पहुंचे तो मिली लाश

किंग्सन सिंह की बहन ने बताया कि जब हिंसा की जानकारी मिली तो मैंने अपने भाई के मोबाइल पर फोन किया. फोन बंद था. हमें आशंका हुई, फिर हम मोर्चरी पहुंचे जहां मेरे भाई की लाश मिली. वहीं, मृतकों में शामिल 43 साल के ओइनम लोकेन सिंह के परिजन ने बताया कि लोकेन छोटे-मोटे काम करता था. वो एक सप्ताह पहले घर से चला गया था. सोमवार को लोगों की भीड़ जेएनआईएणएस अस्पताल के बाहर जुटी. यहां हमें पता चला कि लोकेन की हत्या कर दी गई है.