‘माफी काफी नहीं, इस्तीफा देना चाहिए था’,  NALSAR मामले पर BCI चेयरमैन के विरोध में उतरा बॉम्बे बार एसोसिएशन

NALSAR छात्रों पर कार्रवाई और बाद में माफी मांगने को लेकर BCI चेयरमैन मनन मिश्रा घिर गए हैं. बॉम्बे बार एसोसिएशन ने माफी को देर से आया कदम बताया है.

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Sagar Bhardwaj

NALSAR यूनिवर्सिटी ऑफ लॉ, हैदराबाद के छात्रों के खिलाफ कार्रवाई को लेकर बार काउंसिल ऑफ इंडिया के चेयरमैन मनन मिश्रा की मुश्किलें बढ़ती दिख रही हैं. बॉम्बे बार एसोसिएशन ने 18 अगस्त को जारी पत्र में 13 अगस्त की कार्रवाई की कड़ी आलोचना की और कहा कि बाद में मांगी गई माफी काफी देर से आई.

माफी को बताया महज स्थिति संभालने की कोशिश

एसोसिएशन ने अपने पत्र में कहा कि मिश्रा की माफी वास्तविक पछतावे की अभिव्यक्ति नहीं लगती. संगठन के मुताबिक, यदि BCI चेयरमैन के पद पर रहते हुए ऐसी कार्रवाई हुई है, तो उन्हें नैतिक जिम्मेदारी लेते हुए इस्तीफा देना चाहिए था. हालांकि, एसोसिएशन ने BCI द्वारा अपने शुरुआती आदेश को वापस लेने का स्वागत किया.


NALSAR के पूरे बैच का नामांकन रोका गया था

विवाद तब शुरू हुआ जब NALSAR के 2026 में स्नातक होने वाले पूरे बैच के अधिवक्ता के रूप में नामांकन पर रोक लगाने का निर्देश दिया गया. BCI ने सभी राज्य बार काउंसिलों को इस बैच के छात्रों का नामांकन अगले आदेश तक रोकने को कहा था. NALSAR से उन छात्रों की जानकारी भी मांगी गई थी, जिन्होंने कथित तौर पर अभियान शुरू या संगठित किया था.

छात्रों ने CJI के कार्यक्रम का किया था विरोध 

मामला उन छात्रों के विरोध से जुड़ा था, जिन्होंने विश्वविद्यालय के दीक्षांत समारोह में भारत के मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत को मुख्य अतिथि बनाए जाने पर आपत्ति जताई थी. शुरुआती पत्र पर 70 अंतिम वर्ष के छात्रों के हस्ताक्षर थे. बाद में दूसरे बैचों के विद्यार्थियों ने भी उनका समर्थन किया. इसके बाद BCI ने मामले में हस्तक्षेप किया.

सुप्रीम कोर्ट ने BCI को लगाई फटकार

विवाद बढ़ने के बाद CJI सूर्यकांत ने BCI की कार्रवाई पर कड़ी टिप्पणी की. उन्होंने कहा कि छात्रों के शांतिपूर्ण और कानूनी तरीके से अपनी बात रखने के अधिकार में हस्तक्षेप नहीं किया जा सकता. सुप्रीम कोर्ट ने BCI और राज्य बार काउंसिलों को छात्रों के खिलाफ किसी दंडात्मक या आपराधिक कार्रवाई से रोक दिया.

माफी के बाद भी नहीं थमा विवाद

CJI की टिप्पणी के बाद मनन मिश्रा ने छात्रों से माफी मांगी और कहा कि विवाद से जुड़े उनके शब्दों या पत्र से किसी की भावनाएं आहत हुई हों तो उन्हें इसका खेद है. इसके बावजूद बॉम्बे बार एसोसिएशन ने इसे पर्याप्त नहीं माना. एसोसिएशन के रुख से साफ है कि NALSAR प्रकरण अब BCI के प्रशासनिक अधिकारों और छात्रों के अधिकारों को लेकर बड़े विवाद में बदल चुका है.