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11 साल का दर्द... पत्नी की हत्या में काटे जेल, सबूत नहीं मिला तो छूटे; अब CID ने ढूंढ निकाला असली कातिल

Bengaluru Crime News: बेंगलुरु के एक शख्स को पत्नी की हत्या में गिरफ्तार किया गया. बाद में सबूत के अभाव में बरी किया गया. अब 11 साल बाद CID ने असली कातिल को ढूंढ निकाला है.

Photo Credit- Social Media
India Daily Live

Bengaluru Crime News: बेंगलुरु के एक शख्स पर उसकी पत्नी की हत्या का आरोप लगा. शख्स को पुलिस ने गिरफ्तार कर जेल भी भेज दिया. बाद में उसे सबूतों अभाव में रिहा कर दिया गया और केस बंद कर दिया गया. जेल से बाहर आने के बाद शख्स ने कोर्ट के जरिए CID से जांच की मांग की. 11 साल बाद CID ने महिला के असली कातिलों को गिरफ्तार कर जेल भेज दिया है. मामला बेंगलुरु के संजयनगर इलाके का है.

मामला फरवरी 2013 का है. संजयनगर निवासी और केनरा बैंक के सेवानिवृत्त कर्मचारी बालकृष्ण पई पर उनकी पत्नी की हत्या का गलत आरोप लगाया गया. पुलिस की लापरवाही के कारण बालकृष्ण पई को 73 दिन जेल में बिताने पड़े. ये उनके जीवन का एक ऐसा चैप्टर है जिसे वह भूलना चाहते हैं, लेकिन भूल नहीं पाते. पत्नी की हत्या का गलत आरोप लगाया जाना और जांच को बंद करने की जल्दी में कुछ पुलिस वालों की ओर से उन्हें 73 दिनों तक जेल में सड़ने के लिए मजबूर किया जाना, ये सब काफी मुश्किल था.

हत्या के 11 साल बाद आपराधिक जांच विभाग (CID) की ओर से 3 आरोपियों को गिरफ्तार कर लिया गया और पूरे मामले का खुलासा कर दिया गया. पत्नी की हत्या के आरोपियों को जेल भेजे जाने के बाद बालकृष्ण पई ने टाइम्स ऑफ इंडिया को बताया कि मैं पहले दिन से ही पुलिस वालों से अपनी बेगुनाही के बारे में चिल्ला-चिल्ला कर बता रहा था, लेकिन उन्होंने सबूत मेरे पक्ष में कर दिए. क्या कोई उस निर्दोष व्यक्ति की मानसिक स्थिति की कल्पना कर सकता है जिसे झूठे आरोपों में जेल में डाल दिया गया हो, वह भी अपनी ही पत्नी की हत्या के आरोप में?

सुनसान इलाके में मृत पाई गई थी महिला

43 साल की महिला एक निजी कंपनी में काम करती थी. महिला को येलहांका के पास चिक्काजला के एक सुनसान इलाके में मृत पाया गया था. चिक्काजाला पुलिस ने हत्या का मामला दर्ज किया था. जांच के दौरान, पुलिस ने संजयनगर में बालकृष्ण पाई के घर का दौरा किया और दावा किया कि उन्हें फर्श पर कुछ खून के धब्बे मिले हैं, जिन्हें उन्होंने फोरेंसिक साइंस लैब में भेज दिया. मई 2015 में, फोरेंसिक रिपोर्ट में कहा गया कि खून का नमूना बालकृष्ण पाई की पत्नी के खून से मेल खाता है.

तत्कालीन इंस्पेक्टर एम परमेश ने बालकृष्ण पाई को अपनी पत्नी की हत्या के आरोप में गिरफ्तार किया. दो महीने बाद, चिक्काजाला पुलिस ने ये कहते हुए मामला बंद कर दिया कि उन्हें पाई के खिलाफ सबूत नहीं मिले, जिसके बाद बालकृष्ण जेल से बाहर आ गए. पूरे मामले को याद करते हुए बालकृष्ण पाई ने कहा कि एक तरफ, मैंने अपनी पत्नी को खो दिया था, वह भी बहुत क्रूर तरीके से. दूसरी तरफ, मुझे यह कहते हुए जेल में डाल दिया गया कि मैंने उसे मार दिया है. मैं पूरी तरह से टूट गया था और हमारे सिस्टम, खासकर पुलिस पर मेरा भरोसा खत्म हो गया था.

जेल से बाहर आने के बाद पुलिस वालों के खिलाफ कार्रवाई का मन बनाया

बालकृष्ण ने बताया कि जेल से बाहर आने के बाद, मैंने पुलिस वालों की लापरवाही के लिए उनके खिलाफ कानूनी कार्रवाई करने का फैसला किया. पई ने कहा कि कई बार आत्महत्या के बारे में सोचा था. अप्रैल 2015 में पुलिस ने मुझे और मेरी बेटी को पूछताछ के लिए उठाया था. मेरी बेटी उस समय कॉलेज की छात्रा थी और उसके एग्जाम चल रहे थे. उसे पुलिस स्टेशन में अपनी बुक्स के साथ बैठने के लिए मजबूर किया गया, जबकि मुझे बगल के कमरे में मानसिक रूप से प्रताड़ित किया जा रहा था.

हार न मानने का फैसला करते हुए बालकृष्ण ने कर्नाटक हाई कोर्ट का दरवाजा खटखटाया. मामले की उचित जांच और चिक्काजला पुलिस के खिलाफ गलत तरीके से गिरफ्तार करने और उन्हें प्रताड़ित करने के लिए कार्रवाई की मांग की. उन्होंने कहा कि मैंने चिक्काजला के सात पुलिसकर्मियों के खिलाफ शिकायत दर्ज कराई, जिसमें तत्कालीन इंस्पेक्टर एम परमेश, कांस्टेबल वेंकटेश और लोकेश और अन्य शामिल थे. मैंने 50 लाख रुपये का मुआवजा भी मांगा है.

फिलहाल, सीआईडी ​​के अधिकारियों ने तीन आरोपियों को गिरफ्तार किया है. गिरफ्तार किए गए आरोपियों में केनरा बैंक के पूर्व मैनेजर नरसिंह मूर्ति, 65 और उनके दो सहयोगी दीपक सी और हरिप्रसाद शामिल है. पई उस ब्रांच में काम करते थे जहां मूर्ति मैनेजर थे. सीआईडी ​​जांच से पता चला कि मूर्ति ने पई की पत्नी पर बुरी नजर डाली थी और गला घोंटकर उसकी हत्या कर दी थी.