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India Daily

तटीय क्षेत्रों में निर्माण नियमों में बड़ी छूट, एक्सपर्ट्स ने निर्माण सीमा को 500 मीटर से 200 मीटर तक करने का सुझाव दिया

समिति की रिपोर्ट के अनुसार, मौजूदा सीआरजेड नियमों के तहत उच्च ज्वार रेखा (एचटीएल) से 500 मीटर के दायरे में सख्त प्रतिबंध लगाए गए हैं, जो विकास परियोजनाओं को बाधित करते हैं. पूर्व मुख्य सचिव और नीति आयोग के सदस्य राजीव गौबा की अगुवाई वाली इस पैनल ने अपनी विस्तृत रिपोर्ट में तर्क दिया है कि यह सीमा अत्यधिक सख्त है और आधुनिक तकनीकी मूल्यांकन के आधार पर इसे संशोधित किया जाना चाहिए.

Gyanendra Sharma
तटीय क्षेत्रों में निर्माण नियमों में बड़ी छूट, एक्सपर्ट्स ने निर्माण सीमा को 500 मीटर से 200 मीटर तक करने का सुझाव दिया
Courtesy: Social Media

Coastal construction limit: भारत के विशाल तटीय पट्टी को विकास के नए आयाम देने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम उठाया गया है. एक उच्च स्तरीय विशेषज्ञ समिति ने केंद्र सरकार को सुझाव दिया है कि तटीय विनियमन क्षेत्र (सीआरजेड) में व्यावसायिक और आवासीय निर्माण की वर्तमान 500 मीटर की सीमा को घटाकर मात्र 200 मीटर कर दिया जाए. इस बदलाव से देश के तटीय इलाकों में करीब 2,790 वर्ग किलोमीटर भूमि पर निर्माण कार्यों की अनुमति मिल जाएगी, जो आर्थिक विकास को गति प्रदान करेगा. यह सिफारिश पर्यावरण संरक्षण और आर्थिक प्रगति के बीच संतुलन साधने की दिशा में एक सकारात्मक पहल मानी जा रही है.

समिति की रिपोर्ट के अनुसार, मौजूदा सीआरजेड नियमों के तहत उच्च ज्वार रेखा (एचटीएल) से 500 मीटर के दायरे में सख्त प्रतिबंध लगाए गए हैं, जो विकास परियोजनाओं को बाधित करते हैं. पूर्व मुख्य सचिव और नीति आयोग के सदस्य राजीव गौबा की अगुवाई वाली इस पैनल ने अपनी विस्तृत रिपोर्ट में तर्क दिया है कि यह सीमा अत्यधिक सख्त है और आधुनिक तकनीकी मूल्यांकन के आधार पर इसे संशोधित किया जाना चाहिए. समिति ने जोर दिया कि 200 मीटर की नई सीमा पर्यावरणीय सुरक्षा को बनाए रखते हुए पर्यटन, आवास और बुनियादी ढांचे के विकास को बढ़ावा देगी. रिपोर्ट में यह भी कहा गया है कि यह बदलाव जलवायु परिवर्तन के प्रभावों का आकलन करते हुए तैयार किया गया है, जिसमें मैंग्रोव, समुद्री जैव विविधता और तटीय क्षरण जैसे कारकों को प्राथमिकता दी गई है.

यह सिफारिश प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के 15 अगस्त को लाल किले से दिए गए स्वतंत्रता दिवस संबोधन से प्रेरित है, जिसमें उन्होंने तटीय क्षेत्रों में नियमन ढील देकर विकास को गति देने का वादा किया था. पीएम मोदी ने कहा था कि तटीय राज्यों की आर्थिक क्षमता को अनलॉक करने के लिए पुराने नियमों में सुधार जरूरी है. नीति आयोग के इस सुझाव से गुजरात, महाराष्ट्र, तमिलनाडु, आंध्र प्रदेश, ओडिशा और केरल जैसे तटीय राज्यों को विशेष लाभ होगा. विशेषज्ञों का अनुमान है कि इससे रियल एस्टेट, होटल उद्योग और बंदरगाह विकास में निवेश बढ़ेगा, जिससे लाखों नौकरियां पैदा होंगी.

पर्यावरणविदों ने जताई जताई

हालांकि, पर्यावरणविदों ने इस प्रस्ताव पर चिंता जताई है. उनका कहना है कि सीमा कम करने से तटीय पारिस्थितिकी तंत्र को खतरा हो सकता है, खासकर चक्रवातों और समुद्र स्तर वृद्धि के दौर में. पूर्व पर्यावरण मंत्री जयराम रमेश ने ट्वीट कर कहा, "विकास जरूरी है, लेकिन समुद्र तटों की रक्षा भी उतनी ही महत्वपूर्ण." समिति ने इन चिंताओं का समाधान सुझाया है नए नियमों में पर्यावरण प्रभाव आकलन (ईआईए) को और सख्त करना, हरियाली क्षेत्रों का विस्तार और स्थानीय समुदायों की भागीदारी सुनिश्चित करना. इसके अलावा डिजिटल निगरानी प्रणाली से अवैध निर्माण पर नजर रखी जाएगी.