जिसकी वजह से NEET-UG में हुआ पेपरलीक का खेल, CBI ने किया गिरफ्तार, NTA के ट्रंक से निकाला था Question Paper
Main culprit of NEET-UG paper leak: केंद्रीय जांच ब्यूरो (सीबीआई) ने मंगलवार को नेशनल टेस्टिंग एजेंसी (एनटीए) के ट्रंक से नीट-यूजी परीक्षा का पेपर चुराने के आरोप में दो लोगों को गिरफ्तार किया. पीटीआई के अनुसार, इन हालिया आशंकाओं के साथ, इस मेडिकल प्रवेश परीक्षा से संबंधित लीक, डुप्लिकेसी और अन्य अनियमितताओं के संबंध में गिरफ्तारियों की कुल संख्या बढ़कर 14 हो गई है. सीबीआई ने नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ टेक्नोलॉजी जमशेदपुर के 2017 बैच के सिविल इंजीनियर पंकज कुमार उर्फ आदित्य को हिरासत में लिया है.
Main culprit of NEET-UG paper leak: केंद्रीय जांच ब्यूरो (सीबीआई) ने मंगलवार को राष्ट्रीय परीक्षा एजेंसी (एनटीए) की तिजोरी से नीट-यूजी प्रश्न पत्र कथित रूप से चोरी करने वाले मुख्य आरोपी को पटना से गिरफ्तार किया है. सीबीआई के अधिकारियों ने समाचार एजेंसी पीटीआई को बताया कि उनके सहयोगी को भी झारखंड के हजारीबाग से सीबीआई ने गिरफ्तार किया है, जिसने उन्हें पेपर चोरी करने में मदद की थी.
अब तक 14 लोगों की हो चुकी है गिरफ्तारी
इन दो गिरफ्तारियों के साथ, मेडिकल प्रवेश परीक्षा में पेपर लीक, फर्जी परीक्षा देने और अन्य अनियमितताओं से जुड़े मामलों में अब तक कुल 14 लोगों को गिरफ्तार किया जा चुका है.
अधिकारियों ने बताया कि एजेंसी ने राष्ट्रीय प्रौद्योगिकी संस्थान जमशेदपुर के 2017 बैच के सिविल इंजीनियर पंकज कुमार उर्फ आदित्य को गिरफ्तार किया है, जिसने कथित रूप से हजारीबाग में एनटीए की तिजोरी से नीट-यूजी पेपर चुराया था. कुमार, जो बोकारो का रहने वाला है, उसे पटना से गिरफ्तार किया गया.
ट्रंक से पेपर चुराने वाला भी हुआ गिरफ्तार
सीबीआई ने हजारीबाग से एक अन्य व्यक्ति राजू सिंह को भी गिरफ्तार किया है जिसने कथित रूप से कुमार को पेपर चोरी करने में मदद की और उसे अन्य गिरोह के सदस्यों तक पहुंचाया. राष्ट्रव्यापी पेपर लीक कांड के बाद भारी हंगामे के मद्देनजर, केंद्रीय जांच एजेंसी ने पेपर लीक में शामिल लोगों पर बड़े पैमाने पर कार्रवाई शुरू की थी.
कुछ दिनों पहले, सीबीआई ने इस मामले में एक महत्वपूर्ण सफलता हासिल की थी, जब उसने पटना के कांटी फैक्ट्री रोड से पेपर लीक घोटाले के कथित सरग़ना राकेश रंजन उर्फ रॉकी को गिरफ्तार किया था. पिछले गुरुवार को, उसे विशेष सीबीआई अदालत में पेश किया गया, जिसने उसे जांच एजेंसी की 10 दिन की हिरासत में भेज दिया.
रॉकी पर लंबे समय से थी नजर
नालंदा जिले के रहने वाले रॉकी पर आरोप है कि उसने लीक हुआ नीट प्रश्न पत्र प्राप्त किया, उसे हल किया और एमबीबीएस के उम्मीदवारों के बीच उसके आनसर्स को फैलाया. आरोप है कि उसने धोखाधड़ी गिरोह में सहायता करने के लिए पटना और रांची के एमबीबीएस छात्रों सहित सॉल्वरों की व्यवस्था की थी. पाया गया कि वह पेपर सॉल्वर गिरोह के संचालन का भौतिक रूप से प्रबंधन कर रहा था. सीबीआई रॉकी की गिरफ्तारी से पहले कई दिनों से उसकी गतिविधियों पर नज़र रख रही थी.
जांच के दौरान राज्य पुलिस की आर्थिक अपराध इकाई (ईओयू) द्वारा मेडिकल प्रवेश परीक्षा के कथित मास्टरमाइंड संजीव मुखिया के साथ उसके संबंध का खुलासा होने के बाद रॉकी का नाम सामने आया.
टेक्नॉलजी का सहारा लेकर कराता था पेपरलीक
ईओयू के एक शीर्ष सूत्र के अनुसार, रॉकी प्रतियोगी परीक्षाओं के पेपर लीक को डिजिटल तकनीक का उपयोग करके प्रबंधित और संचालित कर रहा था. 'उसे डिजिटल और तकनीकी सबूतों के आधार पर भी गिरफ्तार किया गया था. उसने रांची के एक होटल में डॉक्टरों और एमबीबीएस के छात्रों को प्रश्न पत्रों को हल करने की व्यवस्था की थी. सूत्र ने कहा कि उसने 4 मई को परीक्षा से एक दिन पहले पटना के खेमनीचक के एक स्कूल में नीट उम्मीदवारों को प्रश्न और हल की गई उत्तर कुंजी परिचालित करने वाले बलदेव कुमार उर्फ चिंटू को एक स्मार्टफोन दिया था.'
ईओयू के एक अधिकारी ने कहा कि रॉकी लीक हुए प्रश्न पत्र प्राप्त करने वाला पहला व्यक्ति था. उन्होंने कहा कि रॉकी ने परीक्षा से एक दिन पहले हल की गई उत्तर शीट पीडीएफ फॉर्मेट में चिंटू के मोबाइल फोन पर भेज दी थी. 'रॉकी और मुखिया जैसे अन्य आरोपियों ने झारखंड में संपत्ति में काफी निवेश किया है. राज्य को उनके अवैध कारोबार का अड्डा बना दिया गया था.'
2017 में भी हुई थी गिरफ्तारी
ईओयू के एक अधिकारी ने कहा, '2017 में नीट प्रश्न पत्रों की तस्वीरें खींचने की कोशिश कर रहे चार लोगों की गिरफ्तारी के बाद रॉकी को गिरफ्तार किया गया था, जो उन्हें क्राइस्ट चर्च स्कूल केंद्र ले जा रहे वैन में थे. गिरफ्तार किए गए लोगों में मुखिया का बेटा शिव कुमार, शिवम मंडल (खगौल, पटना), कानून का छात्र अविनाश रोशन और ड्राइवर संजय यादव शामिल थे. गिरफ्तारी उस समय के पटना एसएसपी मनु महाराज द्वारा पटना के प्रदर्शनी रोड से की गई थी. रॉकी तीन साल जेल में रहा था और बाद में करीब डेढ़ साल पहले जमान पर रिहा हो गया था.'
सीबीआई की ये गिरफ्तारियां नीट परीक्षा पेपर लीक मामले में एक महत्वपूर्ण मोड़ साबित हो सकती हैं. इससे भविष्य में होने वाली परीक्षाओं में नकल रोकने में भी मदद मिल सकती है.