'आपने सब कुछ कुर्बान कर दिया, मैं नाकाम रही', NEET में कम अंक आने के बाद छात्रा ने की खुदकुशी; जांच जारी
महाराष्ट्र के अहिल्यानगर जिले में NEET की तैयारी कर रही एक छात्रा अपने घर में मृत पाई गई. पुलिस ने मामला दर्ज कर जांच शुरू कर दी है. प्रारंभिक जानकारी के अनुसार परीक्षा परिणाम के बाद वह तनाव में थी.
महाराष्ट्र के अहिल्यानगर जिले से एक बेहद दुखद मामला सामने आया है. NEET (नेशनल एलिजिबिलिटी कम एंट्रेंस टेस्ट) की तैयारी कर रही एक छात्रा अपने घर में मृत पाई गई. प्रारंभिक जांच में सामने आया है कि परीक्षा में उम्मीद से कम अंक आने के बाद वह मानसिक तनाव से गुजर रही थी. पुलिस ने मामला दर्ज कर जांच शुरू कर दी है और घटना से जुड़े सभी पहलुओं की पड़ताल की जा रही है. इस घटना ने एक बार फिर प्रतियोगी परीक्षाओं के बढ़ते दबाव और छात्रों के मानसिक स्वास्थ्य को लेकर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं.
घर में मिला छात्रा का शव
जानकारी के अनुसार, अहिल्यानगर जिले के जलालपुर गांव की रहने वाली अंकिता सांगले शनिवार शाम करीब 4:30 बजे अपने घर में मृत पाई गईं. घटना की जानकारी मिलते ही परिवार में कोहराम मच गया. सूचना मिलने पर पुलिस मौके पर पहुंची और आवश्यक कानूनी प्रक्रिया पूरी करने के बाद मामले की जांच शुरू कर दी. पुलिस ने फिलहाल एक्सीडेंटल डेथ का मामला दर्ज किया है और सभी तथ्यों के आधार पर जांच आगे बढ़ाई जा रही है.
परिवार के मुताबिक, अंकिता लंबे समय से NEET परीक्षा की तैयारी कर रही थीं. हाल ही में घोषित परीक्षा परिणाम में उन्हें 166 अंक मिले थे. परिजनों का कहना है कि अपेक्षा से कम अंक आने के बाद वह काफी निराश और तनाव में रहने लगी थीं. पुलिस भी परिवार के बयान और अन्य परिस्थितियों के आधार पर यह पता लगाने की कोशिश कर रही है कि घटना तक पहुंचने की वजहें क्या रहीं.
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पुलिस को मिला हस्तलिखित नोट
जांच के दौरान पुलिस को एक मराठी भाषा में लिखा हस्तलिखित नोट भी मिला है. अधिकारियों के अनुसार, नोट को जांच का हिस्सा बनाया गया है. नोट में छात्रा ने अपने माता-पिता और भाई के प्रति प्यार और आभार व्यक्त किया है. उसने लिखा कि परिवार ने हमेशा उसका साथ दिया और उसके लिए बहुत त्याग किए. साथ ही उसने यह भी लिखा कि उसकी मौत के लिए परिवार के किसी सदस्य को जिम्मेदार न माना जाए. उसने अपने भाई से माता-पिता का ख्याल रखने की भी अपील की. पुलिस नोट की जांच के साथ-साथ अन्य साक्ष्यों को भी खंगाल रही है. प्रतियोगी परीक्षाओं का बढ़ता दबाव बना चिंता का विषय
यह घटना एक बार फिर इस बात की याद दिलाती है कि प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी कर रहे कई छात्र भारी मानसिक दबाव का सामना करते हैं. विशेषज्ञों का कहना है कि परीक्षा का परिणाम जीवन का अंतिम पड़ाव नहीं होता. ऐसे समय में परिवार, शिक्षक और मित्रों का भावनात्मक सहयोग छात्रों के लिए बेहद महत्वपूर्ण होता है.