नई दिल्ली: महाराष्ट्र में ऑटो और टैक्सी चालकों के लिए मराठी भाषा सीखने की अनिवार्यता का मुद्दा अब सियासी विवाद में बदलता जा रहा है. नियम के विरोध में चालकों ने सोमवार से तीन दिन की हड़ताल शुरू कर दी है. इसी बीच परिवहन मंत्री प्रताप सरनाईक ने चालकों को बड़ी राहत देने वाला ऐलान किया है. उन्होंने कहा कि तय एक महीने की अवधि पूरी होने से पहले यदि कोई आरटीओ अधिकारी गलत तरीके से जुर्माना लगाता है, तो उसके खिलाफ सख्त कार्रवाई होगी.
प्रताप सरनाईक ने स्पष्ट किया कि चालकों को मराठी सीखने के लिए सरकार ने एक महीने का समय दिया है. इस अवधि के दौरान किसी चालक पर गलत तरीके से जुर्माना लगाया गया तो संबंधित आरटीओ अधिकारी के खिलाफ कार्रवाई की जाएगी. मंत्री ने अधिकारियों को नियमों का पालन करने की हिदायत दी है. हालांकि, उन्होंने यह भी साफ किया कि जानबूझकर मराठी सीखने से इनकार करने वाले चालकों के खिलाफ नियमों के मुताबिक कार्रवाई जारी रहेगी.
परिवहन मंत्री के मुताबिक, अब तक 1,65,600 गैर-मराठी ऑटो और टैक्सी चालक स्वेच्छा से मराठी भाषा की कक्षाओं में शामिल हो चुके हैं. ये चालक भाषा सीखने की प्रक्रिया में हैं. सरकार का कहना है कि नियम लागू करने का उद्देश्य चालकों को तुरंत दंडित करना नहीं, बल्कि उन्हें कामचलाऊ मराठी सीखने का अवसर देना है. इसी वजह से शुरुआती चरण में चालकों को भाषा सीखने के लिए निर्धारित समय दिया गया है.
परिवहन विभाग के 12 अगस्त के सरकारी प्रस्ताव के अनुसार, जिन ऑटो और टैक्सी चालकों को कामचलाऊ मराठी नहीं आती, उन्हें आरटीओ की ओर से एक महीने का नोटिस दिया जाएगा. इस दौरान उन्हें भाषा सीखने का अवसर मिलेगा. एक महीने के बाद भी शर्त पूरी नहीं होने पर लाइसेंस और बैज निलंबित किया जा सकता है. इसके बाद चालक को मराठी सीखने के लिए तीन महीने का अतिरिक्त समय दिया जाएगा.
सरकारी नियम के मुताबिक, अतिरिक्त तीन महीने की अवधि में भी यदि चालक मराठी सीखने की शर्त पूरी नहीं करता है, तो उसका लाइसेंस रद्द किया जा सकता है. यानी नियम में तत्काल लाइसेंस रद्द करने के बजाय चालक को कुल मिलाकर सुधार का अवसर देने की व्यवस्था की गई है. मंत्री ने समयसीमा का पालन करने पर जोर देते हुए कहा कि अधिकारियों को तय प्रक्रिया के अनुसार ही कार्रवाई करनी होगी.
मराठी भाषा की अनिवार्यता को लेकर राज्य में राजनीतिक बयानबाजी भी तेज हो गई है. विरोध के बीच ऑटो और टैक्सी चालकों ने तीन दिन की हड़ताल शुरू की है. इससे पहले शिवसेना नेता संजय निरुपम ने परिवहन मंत्री से मुलाकात कर चालकों पर एक महीने का नोटिस दिए बिना 25,000 रुपये तक जुर्माना लगाने की कार्रवाई रोकने की मांग की थी. अब मंत्री के ताजा बयान को विवाद के बीच चालकों के लिए राहत के तौर पर देखा जा रहा है.