Madhya Pradesh: BJP का गढ़ है खुरई विधानसभा सीट, यहां जातिगत समीकरण है अहम
मध्य प्रदेश की खुरई विधानसभा सीट बीजेपी का गढ़ मानी जाती है. 2008 के चुनाव को छोड़ दिया जाए को 1990 से लेकर 2018 तक यहां से बीजेपी चुनाव जीतती आ रही है. क्षेत्र में जातिगत समीकरण चुनाव में खासा असर डालते हैं. बेरोजगारी, पलायन, शिक्षा, सिंचाई और कृषि प्रमुख मुद्दे हैं.
नई दिल्ली: मध्य प्रदेश (Madhya Pradesh) में कुछ महीनों बाद विधानसभा चुनाव होने वाले है. चुनाव से पहले सागर जिले में सियासी सरगर्मी बढ़ गई है. सागर जिले की राजनीति में जातियों का खासा दबदबा रहता है. जिले की सभी सीटों पर बेरोजगारी, पलायन, शिक्षा, सिंचाई और कृषि प्रमुख मुद्दे हैं. सागर जिले में 8 विधानसभा सीटें है, जिनके नाम बीना, खुरई, सुरखी, देवरी, रहली,नरियावली, सागर और बांदा हैं. तो चलिए इस रिपोर्ट में नजर डालते हैं खुरई विधानसभा सीट के सियासी समीकरण पर.
खुरई है बीजेपी का गढ़
खुरई विधानसभा सीट पर 2013 में भूपेंद्र सिंह ने कांग्रेस के अरुणोदय चौबे को पराजित किया था. भूपेंद सिंह और अरुणोदय चौबे में पिछले दो चुनावों से मुकाबला होता चला आ रहा है. 2008 में अरुणोदय चौबे चुनाव जीत गए थे. इसके बाद 2013 में भूपेंद्र सिंह ने चौबे को शिकस्त दी. 2008 के चुनाव को छोड़ दिया जाए को 1990 से लेकर 2018 तक यहां से बीजेपी चुनाव जीतती आ रही है. खुरई सीट को बीजेपी का गढ़ माना जाता है. क्षेत्र में जातिगत समीकरण चुनाव में खासा असर डालते हैं. यहां जैन, यादव, दांगी ठाकुर के अलावा एससी वर्ग के मतदाता प्रत्याशी की हार जीत तय करते हैं.
खुरई विधानसभा का इतिहास
2018 में बीजेपी के भूपेंद्र सिंह
2013 में बीजेपी से भूपेंद्र सिंह
2008 में कांग्रेस के अरुणोदय चौबे
2003 में बीजेपी के धर्मू राय
1998 में बीजेपी के धर्मू राय
1993 में बीजेपी के धर्मू राय
1990 में बीजेपी के धर्मू राय
1985 में कांग्रेस की मालती
1980 में कांग्रेस के हरिशंकर मंगल प्रसाद अहिरवार
1977 में जेएनपी से राम प्रसाद
2018 के आंकड़े
चुनाव आयोग के मुताबिक 2018 में मध्य प्रदेश में कुल 5,03,94,086 मतदाता थे जिनमें महिला मतदाताओं की संख्या 2,40,76,693 और पुरुष मतदाताओं की संख्या 2,62,56,157 थी. पुरुष मतदाताओं का वोटिंग प्रतिशत 75.98 रहा था तो वहीं महिला मतदाताओं का वोटिंग प्रतिशत 74.03 रहा था.
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