'मेरे पास माइक बंद करने का बटन नहीं', अविश्वास प्रस्ताव पर बहस के बाद बोले ओम बिरला; कहा- मर्यादा के लिए फैसले लेने पड़ते हैं

लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला ने अपने निष्कासन प्रस्ताव पर 12 घंटे की बहस के बाद कहा कि उन्होंने सदन की गरिमा बचाने के लिए नियमों का सख्ती से पालन किया. विपक्ष के हंगामे और नियम उल्लंघन के कारण कठिन फैसले लिए गए.

ani
Kuldeep Sharma

लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला ने विपक्ष द्वारा लाए गए अपने निष्कासन प्रस्ताव पर हुई 12 घंटे की लंबी बहस के बाद अपना पक्ष रखा. उन्होंने कहा कि सदन 140 करोड़ भारतीयों की आवाज का प्रतिनिधित्व करता है और उन्होंने हमेशा निष्पक्षता व नियमों का पालन सुनिश्चित करने की कोशिश की. विपक्ष ने माइक बंद करने, आवाज दबाने और निष्पक्षता पर सवाल उठाए. बिरला ने स्पष्ट किया कि अध्यक्ष के पास माइक बंद करने का कोई बटन नहीं है और सदस्य केवल अपनी बारी पर बोल सकते हैं. उन्होंने महिला सांसदों के विरोध और तख्तियां लेकर हंगामा करने को सदन की गरिमा के खिलाफ बताया.

निष्कासन प्रस्ताव पर बहस

ओम बिरला ने कहा कि विपक्ष ने 12 घंटे तक बहस में निष्पक्षता पर सवाल उठाए और सदन में अपनी आवाज दबाए जाने की शिकायत की. उन्होंने जोर दिया कि कुर्सी किसी एक व्यक्ति की नहीं, बल्कि पूरे सदन की प्रतिष्ठा का प्रतीक है. जिस दिन नोटिस दिया गया, उस दिन वे सदन से दूर रहे.

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नियमों का सख्त पालन

अध्यक्ष ने बताया कि सभी तस्वीरें, उद्धरण या दस्तावेज सदन में पेश करने से पहले उनकी अनुमति जरूरी है. विपक्ष ने इस नियम का उल्लंघन किया, जिसके कारण कठिन फैसले लेने पड़े. उन्होंने कहा कि नियम 377 के तहत सदन की मर्यादा बनाए रखना उनका कर्तव्य है.

माइक और हंगामे पर सफाई

माइक बंद करने के आरोपों पर बिरला ने कहा कि उनके पास ऐसा कोई बटन नहीं है. सदस्य तभी बोल सकते हैं जब उनकी बारी हो. महिला सांसदों के तख्तियां लेकर सत्ता पक्ष की बेंच पर हंगामा करने के बाद उन्होंने सदन की गरिमा बचाने के लिए कदम उठाया. बिरला ने कहा कि वे किसी को निलंबित करने की कोशिश नहीं करते, लेकिन नियम तोड़ने पर कठिन फैसले लेना पड़ता है. ऐसे फैसले उन्हें दुख देते हैं. उन्होंने सदस्यों से पूछा कि निलंबन क्यों जरूरी पड़ते हैं. उन्होंने उन सभी का धन्यवाद किया जिन्होंने बहस में उनका समर्थन किया या आलोचना की.