लेह के पहाड़ों में भीषण गर्मी, 3 दिन में 12 फ्लाइट कैंसल, समझिए क्या हो रहा है?
लेह का कुशोक बकुला रिम्पोछे एयरपोर्ट 10,700 फीट की ऊंचाई पर स्थित है, जिसका रनवे 9,555 फीट लंबा है. यह एयरपोर्ट उड़ान भरने और लैंड करने के लिए भारत का सबसे कठिन एयरपोर्ट है. लेह के एक अधिकारी ने बताया, 'ऐसा पहली बार हुआ है जब उच्च तापमान के कारण उड़ानों को रद्द किया गया है. पिछले साल तापमान इतना ज्यादा नहीं था कि उड़ानों को रद्द करना पड़े.'
Leh News: कभी साल के 12 महीने बर्फ की चादर से ढंका रहने वाला लेह अब धधकने लगा है, हालात ये हो गये हैं कि यहां से विमानों का संचालन मुश्किल होता जा रहा है. लेह का तपना शायद ग्लोबल वॉर्मिंग का सबसे बड़ा संकेत है. शनिवार से अब तक भारत की सबसे ऊंचाई पर स्थित कॉमर्शियल एयरपोर्ट से इंडिगो और स्पाइसजेट की करीब एक दर्जन उड़ानों को रद्द किया गया है. दरअसल, इन सभी उड़ानों को दोपहर के समय उड़ान भरनी थी लेकिन दिन में लेह का तापमान 36 डिग्री सेल्सियस तक चला गया जिसके विमानों के सुरक्षित संचालन के लिए ज्यादा ऊंचाई वाली हवा बहुत पतली हो गई.
पहली बार हुआ ऐसा
लेह एयरपोर्ट के एक अधिकारी ने बताया, 'ऐसा पहली बार हुआ है जब उच्च तापमान के कारण उड़ानों को रद्द किया गया है. पिछले साल तापमान इतना ज्यादा नहीं था कि उड़ानों को रद्द करना पड़े.' उन्होंने कहा कि शनिवार से रद्द की गई ज्यादातर उड़ानें दिल्ली जाने वाली थीं.
भारत का सबसे कठिन एयरपोर्ट
बता दें कि लेह का कुशोक बकुला रिम्पोछे एयरपोर्ट 10,700 फीट की ऊंचाई पर स्थित है, जिसका रनवे 9,555 फीट लंबा है. यह एयरपोर्ट उड़ान भरने और लैंड करने के लिए भारत का सबसे कठिन एयरपोर्ट है.
क्यों रद्द की गई फ्लाइट
अधिक ऊंचाई के कारण लेह में हवा पतली है और गर्मी इस हवा को और ज्यादा पतला बना देती है. 36 डिग्सी सेल्सियस से ज्यादा तापमान पर A320s और B737 इंजनों को उड़ान भरने की गति तक पहुंचने के लिए ज्यादा समय लगता है और उन्हें उड़ान भरने के लिए ज्यादा लंबे रनवे की जरूरत होती है. इसके साथ-साथ विमानों की लैंडिंग भी कठिन हो जाती है.