CJP प्रोटेस्ट में हिंसा फैलाने वाले प्रदर्शनकारियों पर होगी कानूनी कार्रवाई! क्या अपने ही वादे से पलटेगी सरकार?
केंद्र ने CJP प्रदर्शन से जुड़े मामलों की समीक्षा शुरू की है. सूत्रों के अनुसार शांतिपूर्ण प्रदर्शनकारियों पर कार्रवाई नहीं होगी, जबकि हिंसा में शामिल लोगों के खिलाफ जांच और कानूनी प्रक्रिया जारी रहेगी.
केंद्र सरकार ने CJP (Cockroach Janta Party) के प्रदर्शनकारियों के खिलाफ दर्ज मामलों को लेकर संज्ञान लिया है. सूत्रों के मुताबिक, दिल्ली और अन्य भाजपा शासित राज्यों में दर्ज एफआईआर और पुलिस कार्रवाई पर विस्तृत रिपोर्ट मांगी गई है. सरकार यह भी परख रही है कि किन मामलों में शांतिपूर्ण प्रदर्शन हुआ और किन घटनाओं में हिंसा या कानून-व्यवस्था प्रभावित हुई.
शांतिपूर्ण प्रदर्शनकारियों को राहत
सूत्रों के अनुसार, जिन लोगों ने शांतिपूर्ण तरीके से प्रदर्शन किया, उनके खिलाफ किसी व्यापक कार्रवाई की संभावना नहीं है. हालांकि, जिन व्यक्तियों पर हिंसा फैलाने, सार्वजनिक संपत्ति को नुकसान पहुंचाने या अशांति पैदा करने के आरोप हैं, उनके खिलाफ जांच और कानूनी कार्रवाई जारी रहेगी. सरकार का रुख शांतिपूर्ण विरोध और हिंसक गतिविधियों के बीच स्पष्ट अंतर करने का बताया जा रहा है.
FIR वापसी पर बना विवाद
जंतर-मंतर पर आंदोलन समाप्त करने के लिए CJP ने सरकार के सामने तीन प्रमुख मांगें रखी थीं. इनमें दिल्ली और भाजपा शासित राज्यों में दर्ज एफआईआर वापस लेने की मांग भी शामिल थी. संगठन के प्रतिनिधि सौरव दास और आशुतोष रांका ने दावा किया था कि सरकार ने मामलों को वापस लेने पर सहमति जताई है. हालांकि, CJP का आरोप है कि अब तक इस दिशा में कोई औपचारिक कार्रवाई नहीं हुई है.
फिर आंदोलन की चेतावनी
सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर आशुतोष रांका ने कहा कि लिखित सहमति के अनुसार सरकार को मंगलवार तक सभी कानूनी मामलों का ब्योरा साझा करना चाहिए. उनका आरोप है कि बिहार, पश्चिम बंगाल और दिल्ली सहित कई राज्यों में प्रदर्शनकारियों और स्वयंसेवकों के खिलाफ कार्रवाई जारी है. उन्होंने चेतावनी दी कि यदि समझौते का पालन नहीं हुआ तो संगठन दोबारा धरने पर बैठने के लिए मजबूर होगा.
दिल्ली पुलिस की जांच जारी
सूत्रों के हवाले से सामने आई जानकारी के अनुसार, दिल्ली पुलिस को अभी तक मामलों की वापसी संबंधी कोई औपचारिक आदेश नहीं मिला है. बताया जा रहा है कि नई दिल्ली जिले में करीब 15 एफआईआर दर्ज की गई हैं. आदेश मिलने की स्थिति में भी हिंसा की कथित साजिश से जुड़े मामलों की जांच जारी रहेगी.
डिजिटल सबूतों की हो रही पड़ताल
जांच एजेंसियां सीसीटीवी फुटेज, डिजिटल साक्ष्य और मोबाइल फोन रिकॉर्ड की जांच कर रही हैं ताकि हिंसक घटनाओं में शामिल लोगों की पहचान की जा सके. वहीं, केंद्र की समीक्षा प्रक्रिया पर सभी पक्षों की नजर है. आने वाले दिनों में एफआईआर की स्थिति और जांच की दिशा इस पूरे विवाद की अगली तस्वीर तय कर सकती है.