हजारों आतंकियों की घुसपैठ का खतरा! पाकिस्तान में फिर पैर पसार रहा लश्कर, खुफिया रिपोर्ट ने बढ़ाई चिंता

भारतीय खुफिया रिपोर्टों के अनुसार, लश्कर-ए-तैयबा पाकिस्तान के सिंध में नए मरकज और मस्जिदों के जरिए अपना नेटवर्क बढ़ा रहा है. सुरक्षा एजेंसियां भर्ती, फंडिंग और जम्मू-कश्मीर में घुसपैठ की आशंकाओं पर नजर रख रही हैं.

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Kanhaiya Kumar Jha

नई दिल्ली: सीमा पार आतंकी नेटवर्क को लेकर भारतीय सुरक्षा एजेंसियों की चिंता फिर बढ़ी है. खुफिया इनपुट के मुताबिक, प्रतिबंधित संगठन लश्कर-ए-तैयबा पाकिस्तान में अपने संपर्क और ढांचे को मजबूत करने की कोशिश कर रहा है. रिपोर्ट में सिंध प्रांत को संगठन के नए विस्तार का प्रमुख केंद्र बताया गया है. दावा है कि पिछले एक साल में यहां सात नए मरकज और मस्जिदें तैयार की गई हैं. इन गतिविधियों के पीछे फंडिंग और संगठनात्मक नेटवर्क की भी जांच की जा रही है.

खुफिया जानकारी के अनुसार, सिंध में बने नए ठिकानों का इस्तेमाल संगठन की अलग-अलग गतिविधियों के लिए किया जा रहा है. इनमें युवाओं से संपर्क, भर्ती, धन जुटाने और कार्यकर्ताओं की लामबंदी जैसे काम शामिल होने की आशंका है. अधिकारियों का कहना है कि कम समय में कई नए केंद्रों का सामने आना संगठन की विस्तार योजना की ओर संकेत करता है. हालांकि, इन दावों की स्वतंत्र पुष्टि सार्वजनिक रूप से उपलब्ध जानकारी से नहीं हुई है.

फंडिंग के स्रोतों पर भी नजर

रिपोर्ट में आरोप लगाया गया है कि इन गतिविधियों के लिए अलग-अलग माध्यमों से धन जुटाया जा रहा है. सुरक्षा एजेंसियां कथित सरकारी मदद के साथ चैरिटी के नाम पर विदेशों से आने वाली फंडिंग की भी जांच कर रही हैं. अधिकारियों के अनुसार, संगठन अपने प्रभाव को बढ़ाने के लिए सामाजिक और राजनीतिक संपर्कों का इस्तेमाल करने की कोशिश कर रहा है. इसी वजह से उसकी वित्तीय गतिविधियों और सहयोगी नेटवर्क पर विशेष नजर रखी जा रही है.


ऑपरेशन सिंदूर के बाद फिर खड़ा होने की कोशिश

खुफिया अधिकारियों के मुताबिक, ऑपरेशन सिंदूर के दौरान लश्कर के कुछ महत्वपूर्ण ठिकानों को नुकसान पहुंचने के बाद संगठन अपने नेटवर्क को दोबारा मजबूत करने की कोशिश कर रहा है. रिपोर्ट में मुरीदके स्थित उसके एक प्रमुख प्रशिक्षण परिसर के नष्ट होने का भी उल्लेख है. इसके बाद सिंध समेत पाकिस्तान के दूसरे हिस्सों में नए संपर्क केंद्र विकसित करने की कोशिश किए जाने की बात सामने आई है.

राजनीतिक संपर्क बढ़ाने का आरोप

रिपोर्ट के अनुसार, लश्कर से जुड़े लोग राजनीतिक दलों और नेताओं के साथ संपर्क बढ़ाने की कोशिश कर रहे हैं. इसके अलावा कार्यकर्ताओं को चुनावी रैलियों और बड़े सार्वजनिक आयोजनों में शामिल होने के निर्देश दिए जाने का दावा है. सुरक्षा एजेंसियों का मानना है कि ऐसे प्रयास संगठन को सामाजिक और राजनीतिक मुख्यधारा में जगह बनाने में मदद कर सकते हैं. साथ ही इससे अंतरराष्ट्रीय वित्तीय निगरानी से बचने की कोशिश की जा सकती है.

जम्मू-कश्मीर को लेकर बढ़ी चिंता

सुरक्षा अधिकारियों के अनुसार, पाकिस्तान अधिकृत कश्मीर में विभिन्न आतंकी संगठनों से जुड़े लोगों की मौजूदगी बनी हुई है. रिपोर्ट में लश्कर-ए-तैयबा, जैश-ए-मोहम्मद और हिजबुल मुजाहिदीन से जुड़े लोगों द्वारा जम्मू-कश्मीर में घुसपैठ की कोशिशों की आशंका जताई गई है. एजेंसियों को यह भी चिंता है कि संगठन स्थानीय संपर्कों के जरिए युवाओं तक पहुंच बनाने का प्रयास कर सकता है. इसी कारण जम्मू-कश्मीर में ऐसे किसी भी नेटवर्क पर निगरानी बढ़ाई जा रही है.