VIDEO: 18,600 फीट ऊपर हवा में एक पहिये पर बैलेंस करता हेलिकॉप्टर, लद्दाख में आर्मी का दिल दहला देने वाला रेस्क्यू ऑपरेशन

लद्दाख के नन कुन पर्वत क्षेत्र में भारतीय सेना ने बेहद चुनौतीपूर्ण हवाई बचाव अभियान को अंजाम दिया. खड़ी ढलान के बीच हेलिकॉप्टर को केवल एक स्किड पर टिकाकर मरीज को सुरक्षित निकाला गया.

ANI
Reepu Kumari

लद्दाख के दुर्गम नन कुन पर्वत क्षेत्र में भारतीय सेना के एविएशन विंग ने ऐसा बचाव अभियान चलाया, जिसने मुश्किल हालात में भी हिम्मत नहीं हारने की मिसाल पेश की. करीब 18,600 फीट की ऊंचाई पर एक मरीज को तत्काल सुरक्षित निकालना था. नीचे खड़ी ढलान थी, ऊपर तेज बर्फीली हवाएं और सामने बेहद सीमित समय. ऐसे हालात में हेलिकॉप्टर से सामान्य तरीके से उतरना संभव नहीं था, फिर भी सेना की टीम ने अभियान को आगे बढ़ाया.

मिशन शनिवार को पूरा

यह मिशन शनिवार को पूरा किया गया. चुनौती केवल ऊंचाई और मौसम की नहीं थी, बल्कि दिन की आखिरी रोशनी भी तेजी से खत्म हो रही थी. इतनी ऊंचाई पर हवा का दबाव और तेज हवाएं हेलिकॉप्टर की उड़ान को मुश्किल बनाती हैं. इसके बावजूद पायलटों ने बेहद सावधानी के साथ मशीन को मरीज तक पहुंचाया. कुछ ही समय में मरीज को सुरक्षित निकाल लिया गया और हेलिकॉप्टर वापस नीचे की ओर रवाना हो गया.

ऊंचाई पर हेलिकॉप्टर के सामने बड़ी चुनौती

18,600 फीट की ऊंचाई पर हेलिकॉप्टर उड़ाना सामान्य परिस्थितियों से बिल्कुल अलग होता है. ऊंचाई बढ़ने के साथ हवा का घनत्व कम हो जाता है, जिससे इंजन और रोटर की लिफ्ट क्षमता प्रभावित होती है. तेज हवाएं स्थिति को और कठिन बना देती हैं. इस अभियान में समय भी बेहद सीमित था, क्योंकि रोशनी लगातार कम हो रही थी. टीम को हर कदम बेहद सटीक तरीके से उठाना पड़ा.


वजन कम करके तैयार किया गया हेलिकॉप्टर

मिशन को सफल बनाने के लिए हेलिकॉप्टर का वजन कम करना जरूरी था. टीम ने उसमें मौजूद गैर जरूरी सामान को उतार दिया. उड़ान के दौरान ईंधन भी उतना ही रखा गया, जितना अभियान को पूरा करने और सुरक्षित वापसी के लिए जरूरी था. इस तैयारी का मकसद हेलिकॉप्टर को अधिकतम संभव लिफ्ट उपलब्ध कराना था. बेहद ऊंचाई वाले क्षेत्र में यह सावधानी अभियान की सफलता के लिए महत्वपूर्ण बनी.

सिर्फ एक स्किड पर साधा गया संतुलन

मरीज तक पहुंचने के दौरान सबसे मुश्किल पल तब आया, जब हेलिकॉप्टर को खड़ी पहाड़ी ढलान के सामने उतारना था. वहां सामान्य लैंडिंग के लिए पर्याप्त जगह नहीं थी. पायलटों ने हेलिकॉप्टर को बेहद नीचे स्थिर रखा और केवल एक स्किड यानी निचले लैंडिंग स्टैंड को ढलान पर टिकाया. इसी स्थिति में संतुलन बनाए रखते हुए मरीज को हेलिकॉप्टर में सुरक्षित खींच लिया गया.

आखिरी रोशनी में पूरा हुआ रेस्क्यू

रेस्क्यू अभियान के दौरान समय तेजी से बीत रहा था. दिन की रोशनी खत्म होने से पहले मरीज को वहां से निकालना जरूरी था. तेज बर्फीली हवाओं और कठिन भूभाग के बीच पायलटों ने हेलिकॉप्टर को नियंत्रित रखा. मरीज के सुरक्षित हेलिकॉप्टर में पहुंचने के बाद टीम ने बिना समय गंवाए वापसी की उड़ान भरी. इस तरह बेहद चुनौतीपूर्ण परिस्थितियों में अभियान को सफलतापूर्वक पूरा किया गया.

Fire and Fury Corps ने पायलटों को सराहा

भारतीय सेना की फायर एंड फ्यूरी कॉर्प्स ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर इस अभियान की जानकारी साझा की. कॉर्प्स ने पायलटों के साहस, तकनीकी दक्षता और समर्पण की सराहना की. सेना के मुताबिक, दिन की आखिरी रोशनी में पूरा किया गया यह अभियान भारतीय सेना के कौशल, जज्बे और सेवा भावना को दिखाता है. 18,600 फीट की ऊंचाई पर एक मरीज को सुरक्षित निकालना इस कठिन मिशन की सबसे अहम उपलब्धि रही.