कोलकाता डॉक्टर मर्डर केस में HoD ने तोड़ी चुप्पी! कहा-'परिवार को सुसाइड...'

Kolkata Doctor Murder Case: कोलकाता डॉक्टर मर्डर केस आए दिन एक नया मोड़ ले रहा है. हाई कोर्ट ने इस केस को कोलकाता पुलिस से लेकर सीबीआई को सौंप दिया था. इस मामले की जांच जारी है. वहीं, अब कॉलेज के चेस्ट विभाग के अध्यक्ष ने इस केस को लेकर अपनी चुप्पी तोड़ी है. उन्होंने कहा कि परिजिनों को ये बताना कि उनकी बेटी ने सुसाइड किया है बहुत ही गलत है.

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Kolkata Doctor Murder Case: कोलकाता के आरजी कर मेडिकल कॉलेज एंड हॉस्पिटल में ट्रेनी डॉक्टर की रेप और हत्या केस में अब चेस्ट डिपार्टमेंट के हेड ऑफ डिपार्टमेंट ने चुप्पी तोड़ी है. उन्होंने बुधवार को कहा कि पीड़िता के परिवार वालों को घटना की जानकारी देते समय ये बताया कि उसकी मौत सुसाईड की वजह से हुई ये गलत हैं. 1 अगस्त को विभागाध्यक्ष का पदभार संभालने वाले अरुणव दत्ता चौधरी ने कहा कि जब अस्पताल के सहायक अधीक्षक ने महिला के माता-पिता को फोन किया तो वह वहां मौजूद नहीं थे. 

अरुणव दत्ता चौधरी ने बताया कि उन्होंने ट्रेनी डॉक्टर के पैरेंट्स का नंबर खोजकर एक फीमेल असिस्टेंट सुपरिटेंडेंट को दिया था. लेकिन उसने कॉल नहीं किया. ट्रेनी डॉक्ट के घरवालों को कॉल द्वैपायन बिस्वास ने किया था. पुलिस ने उसे पूछताछ के लिए भी बुलाया था. 

"दोषी को मिलनी चाहिए कड़ी सजा"

कॉलेज के चेस्ट विभाग के अध्यक्ष अरुणव दत्ता चौधरी ने ने बताया कि वह पहले व्यक्ति नहीं थे जिन्होंने ट्रेनी लेडी डॉक्टर की डेड बॉडी देखी थी. जब मैं काम पर लौट तो मुझे इसके बारे में पता चला. मेरे आने से पहले पुलिस ने सेमीनार को को घेर लिया था. जिन्होंने भी इस कृत्य को किया है उन्हें सजा मिलनी चाहिए. 

उन्होंने आगे बताया कि सेमीनार के सामने वाले रूम जहां महिला डॉक्टर का बलात्कार करके उसकी हत्या की गई थी उस कमरे को ध्वस्त कर दिया गया है. मंगलवार तक उस कमरे में काम चल रहा था लेकिन महिला आयोग के अधिकारियों के हस्तक्षेप के बाद काम को रोक दिया गया. 

ट्रेनी डॉक्टरों से कमरे के डिजाइन के लिए मांगी गई थी राय

दत्ता ने आगे बताया कि कमरे का पुनर्निर्माण पीजी ट्रेनी डॉक्टर की सुविधा के लिए किया जा रहा था, जिन्हें बेहतर आराम करने की जगह की आवश्यकता थी. इसलिए, हमने उनसे राय मांगी थी कि कमरों को कैसे डिजाइन किया जाना चाहिए. कमरे के निर्माण कार्य को तत्कालीन प्रिंसिपल संदीप घोष ने मंजूरी दी थी और PWD के इंजीनियर इसकी देखरेख कर रहे थे. 

सेमीनार हॉल का 8:30 बजे के बाद बंद कर दिया जाता है. इसके बाद अगर इसका उपयोग करना तो उसके लिए लिखित अनुमित की आवश्यकता होती है.  लेकिन इस बात से मैं अवगत नहीं हूं कि क्या अनुमित ली गई थी कि नहीं.