अकेले में पॉर्न देखना अश्लीलता है? जानें पूरा मामला और केरल हाईकोर्ट की अहम टिप्पणी

केरल हाईकोर्ट ने कहा है कि अकेले में पॉर्न वीडियो देखना अश्लीलता के तहत अपराध की श्रेणी में नहीं आता है. मोबाइल पर इस तरह का कंटेंट देखना किसी की निजी पसंद हो सकता है.

Amit Mishra

Kerala High Court Adult Video: ''मैं चाहे ये करुं मैं चाहे वो करुं...मेरी मर्जी'' ये गाना तो आपने सुना ही होगा. इस बीच आप सोच रहे होंगे की खबर की शुरुआत गाने के साथ, तो आपको बता दें कि मामला ही कुछ ऐसा है. सवाल ये है कि क्या अकेले में पॉर्न देखना अश्लीलता के अपराध में आता है. क्या इस तरह के मामले में सजा हो सकती है. तो ऐसे ही सवालों के जवाब एक मामले की सुनवाई के दौरान केरल हाईकोर्ट (Kerala High Court) ने दिए हैं. चलिए अब आपको पूरा मामला बताते हैं.

केरल हाईकोर्ट की अहम टिप्पणी

दरअसल, केरल हाईकोर्ट ने एक सप्ताह पहले एक शख्स के खिलाफ शुरू की गई आपराधिक कार्रवाई को रद्द करते हुए कहा कि अकेले में पॉर्न वीडियो देखना अश्लीलता के तहत अपराध की श्रेणी में नहीं आता है. आरोपी शख्स को पुलिस ने अपने मोबाइल फोन पर अश्लील वीडियो देखने के आरोप में सड़क के किनारे से गिरफ्तार किया था. इसी मामले में कोर्ट ने कहा कि अगर कोई शख्स चुपके से निजी तौर पर अश्लील वीडियो देखता है. वो वीडियो किसी को भेजता नहीं है और पब्लिक के सामने इस तरह के वीडियो नहीं देखता है तो वो किसी भी तरह से अश्लीलता के अपराध में नहीं आएगा. उन्होंने कहा कि मोबाइल पर इस तरह का कंटेंट देखना किसी की निजी पसंद हो सकता है और कोर्ट उसकी निजता पर किसी भी तरह का हस्तक्षेप नहीं कर सकता है.


 

ये तो अपराध नहीं

कोर्ट ने अपने आदेश में कहा कि अश्लील वीडियो को दूसरों को दिखाए बिना निजी तौर पर देखना भारतीय दंड संहिता की धारा 292 के तहत किसी भी तरह से अपराध की श्रेणी में नहीं आता है. कोर्ट ने कहा कि इस तरह का मामला उसकी निजी पसंद हो सकती है. ऐसे में कोर्ट उसे किसी भी तरह से बाध्य नहीं कर सकती है.

तब माना जाएगा अपराध

कोर्ट की ओर से कहा गया कि अगर कोई व्यक्ति अश्लील फोटो और वीडियो को प्रसारित और वितरित करता है या फिर पब्लिक प्लेस में देखता या दिखाने की कोशिश करता है तो आईपीसी की धारा 292 के तहत ये अपराध माना जाएगा. कोर्ट ने कहा कि हमारे देश में एक पुरुष और महिला के बीच उनके सहमति से प्राइवेसी में यौन संबंध बनाना भी अपराध नहीं है.

अभिभावकों को किया आगाह

हालांकि, इस दौरान न्यायमूर्ति कुन्हिकृष्णन ने अभिभावकों को आगाह करते हुए कहा कि बिना निगरानी के नाबालिग बच्चों को मोबाइल सौंपना खतरनाक हो सकता है. कोर्ट ने आगाह किया कि इंटरनेट एक्सेस वाले मोबाइल फोन पर अश्लील वीडियो आसानी से देखा जा सकता है. बच्चे भी ऐसे वीडियो देख सकते हैं जिसके दूरगामी परिणाम हो सकते हैं.

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