7 हजार टन कचरा, पेशाब से भरी बोतलें....5 करोड़ कांवड़ियों ने उत्तराखंड के सामने खड़ा किया सफाई का संकट

कांवड़ यात्रा खत्म होने के बाद उत्तराखंड में करीब 7,000 टन कचरा जमा हो गया है. कचरे को लेकर स्थानीय लोगों ने नाराजगी जाहिर की है.

@Sachingupta
Sagar Bhardwaj

सावन के दौरान करीब पांच करोड़ श्रद्धालु गंगाजल लेने हरिद्वार पहुंचे. शिवरात्रि के बाद कांवड़ यात्रा समाप्त हुई तो श्रद्धालुओं की भारी भीड़ के पीछे जगह-जगह कचरे का ढेर नजर आया. घाटों और सड़कों पर कपड़े, प्लास्टिक और टूटी कांवड़ का सामान बिखरा मिला.

हर की पैड़ी पर सफाई की चुनौती

हरिद्वार के सबसे प्रमुख घाट हर की पैड़ी समेत शहर के 100 से ज्यादा घाटों पर सफाईकर्मियों को बड़े पैमाने पर कचरा हटाना पड़ा. कुछ चेंजिंग रूम में इस्तेमाल की गई पानी की बोतलों में पेशाब भरा मिला. सफाई के दौरान कर्मचारियों के बिना दस्ताने और मास्क काम करने के दृश्य भी सामने आए.

स्थानीय लोगों ने उठाए सवाल

कचरे की तस्वीरों ने स्थानीय लोगों में नाराजगी पैदा कर दी. उनका सवाल है कि जिस गंगा की पवित्रता के लिए लाखों लोग लंबी यात्रा करते हैं, उसी के किनारे पूजा के बाद इतनी गंदगी छोड़ना आस्था और जिम्मेदारी के बीच बड़ा विरोधाभास है.


सात हजार टन कचरा डंपिंग साइट पहुंचा

प्रशासन के मुताबिक हरिद्वार में अब तक करीब सात हजार टन कचरा डंपिंग साइटों तक पहुंचाया जा चुका है. नगर आयुक्त नंदन कुमार के अनुसार, शिवरात्रि के बाद सफाई टीमों ने रातभर अभियान चलाकर घाटों, पार्किंग क्षेत्रों और प्रमुख सड़कों से कचरा हटाया.

हरिद्वार से गंगोत्री तक संकट

कचरे का असर केवल हरिद्वार और ऋषिकेश तक सीमित नहीं रहा. उत्तरकाशी के गंगोत्री क्षेत्र में भी सावन के दौरान करीब 57 हजार श्रद्धालु पहुंचे. वापसी के बाद यहां प्लास्टिक, कपड़े और अन्य सामग्री जगह-जगह जमा मिली, जिससे संवेदनशील हिमालयी पारिस्थितिकी तंत्र पर चिंता बढ़ी है.

प्लास्टिक मुक्त क्षेत्र में नियमों की अनदेखी

गंगोत्री को प्लास्टिक मुक्त क्षेत्र घोषित किया गया है, इसके बावजूद बड़ी मात्रा में प्लास्टिक कचरा मिलना पर्यावरणीय नियमों के पालन पर सवाल खड़े करता है. इससे जंगलों, वन्यजीवों और स्थानीय वनस्पतियों को नुकसान का खतरा बढ़ सकता है.

वन विभाग ने शुरू किया विशेष अभियान

कांवड़ यात्रा के बाद वन विभाग ने गंगोत्री में विशेष स्वच्छता अभियान चलाया. अभियान के दौरान कर्मचारियों ने 57 बोरे कचरा इकट्ठा किया, जिसे आगे निस्तारण के लिए भेजा गया. अब चुनौती केवल कचरा हटाने की नहीं, बल्कि अगले धार्मिक सीजन में ऐसी स्थिति दोबारा न बनने देने की है.