लॉक नहीं खुला तो मंगाया कटर, हजारीबाग के स्कूल पर शक, यहीं से हुआ पेपरलीक?
Jharkhand NEET Paper Leak: राजनीतिक अस्थिरताओं और घोटालों के लिए मशहूर झारखंड एक बार फिर चर्चाओं में है. इस बार मामला NEET पेपर लीक से जुड़ा हुआ है. दरअसल, हजारीबाग के एक स्कूल में NEET का एग्जाम हुआ था. दावा किया जा रहा है कि यहां क्वेश्वच पेपर वाले बॉक्स का डिजिटल लॉक नहीं खुला, तो अधिकारियों ने कटर से बॉक्स को काट दिया.
Jharkhand NEET Paper Leak: एक बार फिर झारखंड बदनाम हो रहा है. इस बार मामला पेपर लीक से जुड़ा है. हजारीबाग का एक स्कूल NEET 'लीक' जांच के घेरे में आया है, जहां 5 मई को अभ्यर्थियों ने NEET UG का एग्जाम दिया था. रिपोर्ट के मुताबिक, अभ्यर्थियों को जब क्वेश्चन पेपर देने की बारी आई, तो क्वेश्चन पेपर वाले बॉक्स का डिजिटल लॉक ही नहीं खुला. इसके बाद कटर से क्वेश्चन पेपर वाले बॉक्स को काटा गया, फिर अभ्यर्थियों के बीच क्वेश्चन पेपर को बांटा गया.
अधिकारियों के अनुसार, बक्से में दो ताले लगे होते हैं- एक मैनुअल और दूसरा डिजिटल. पहले वाले को खोलने के लिए एक चाबी और कटर होता है, जबकि दूसरे वाले को परीक्षा से 45 मिनट पहले अपने आप खुल जाना चाहिए, लेकिन हज़ारीबाग के ओएसिस स्कूल में ऐसा नहीं हुआ.
स्कूल के प्रिंसिपल और नेशनल टेस्टिंग एजेंसी की ओर से नियुक्त हजारीबाग डिस्ट्रिक्ट को-ऑर्डिनेटर एहसानुल हक ने NTA को फोन करके पूछा कि क्या करना है, तो उन्हें बताया गया कि कटर से डिजिटल लॉक को काट दो. इंडियन एक्सप्रेस के मुताबिक, हक ने ओएसिस स्कूल समेत पांच एग्जाम सेंटर्स के सुपरिटेंडेंट्स और सुपरवाइजर्स को ये बात बता दी, जहां डिजिटल लॉक नहीं खुला था. ओएसिस स्कूल के सेंटर सुपरिटेंडेंट इम्तियाज आलम और एनटीए के सुपरवाइजर विश्व रंजन ने इसकी पुष्टि की.
NTA के सुपरवाइजर ने और क्या बताया?
रंजन ने कहा कि पिछली NEET-UG परीक्षाओं में भी डिजिटल लॉक का इस्तेमाल किया गया था. एक बीप बजती थी जो यह बताती थी कि वे खुल गए हैं. इस साल हमें आश्चर्य हुआ जब वे अनलॉक नहीं हुए. हमने अपने सिटी कोऑर्डिनेटर एहसानुल हक को सूचित किया, उन्होंने NTA से संपर्क किया और हमें बताया गया कि हमें इसे कटर से काटना पड़ेगा.
NTA अधिकारियों के अनुसार, यदि डिजिटल लॉक अपने आप तय समय पर अनलॉक नहीं होता है, तो प्रोटोकॉल के अनुसार कटर से लॉक को तोड़ा जाता है. NTA के एक अधिकारी ने कहा कि ये डिजिटल डिवाइस हैं जो खराब हो सकते हैं. इसका मतलब ये नहीं है कि इनके साथ छेड़छाड़ की गई है.
दो बैंकों में रखे गए थे क्वेश्चनपेपर वाले 9 एल्युमीनियम के बॉक्स
इस प्रक्रिया के बारे में बताते हुए हक ने इंडियन एक्सप्रेस को बताया कि मुझे 5 मई को सुबह 1 बजे एक ईमेल मिला जिसमें मुझे बताया गया कि दो निर्धारित बैंकों में क्वेश्चन पेपर से भरे 9 बक्से रखे गए हैं. सुबह 7.30 बजे, पांच सेंटर्स के सुपरिटेंडेंट और पांच सुपरवाइजर्स को 9 कार्डबोर्ड बॉक्स सौंपे गए, जिनके अंदर क्वेश्चनपेपर से भरे एल्युमीनियम के बक्से थे.
हक ने बताया कि कार्डबोर्ड बॉक्स मिलने के बाद अधिकारी और सुपरवाइजर्स अपने-अपने एग्जाम सेंटर्स की ओर रवाना हो गए. उन्होंने बताया कि इसके बाद बॉक्स को एग्जाम सेंटर्स के स्ट्रांग रूम में रख दिया गया, जहां सुपरिटेंडेंट, डिप्टी सुपरिटेंडेंट, सुपरवाइजर और इंस्पेक्टर उनकी सुरक्षा में तैनात थे.
आलम ने बताया कि दोपहर 1.15 बजे बक्सों को खोला जा रहा था. पहली परत कार्डबोर्ड की है, जिसे किसी नुकीली चीज से फाड़ा गया. उसके अंदर एक एल्युमीनियम बॉक्स मिला, जिसमें दो ताले थे. पहला ताला डिजिटल जबकि दूसरा ताला मैनुअल था. एल्युमीनियम बॉक्स के अंदर एक और कार्डबोर्ड बॉक्स था, जिसमें 7 लेयर वाला प्लास्टिक का लिफाफा था. इसी में क्वेश्चनपेपर रखे गए थे. पूरी अनपैकिंग प्रक्रिया अधिकारियों और दो छात्रों के सामने हुई.
एग्जाम के बाद ओएमआर शीट ले गई कूरियर कंपनी
एग्जाम के बाद, NTA की ओर से नियुक्त एक कूरियर कंपनी ने ओएमआर शीट को दो अलग-अलग एल्युमीनियम बक्सों में रख लिया, जिन्हें मैनुअल लॉक से सील कर दिया गया था. चाबियों को एक पीले रंग के प्लास्टिक के पैकेट में उसी बक्से में चिपका दिया गया.
आलम ने बताया कि 21 जून को बिहार आर्थिक अपराध इकाई (EOU) के अधिकारी जांच करने आए थे. पाया कि बिहार में लीक हुए प्रश्नपत्र के जले हुए अवशेषों पर पाया गया सीरियल कोड हजारीबाग के ओएसिस स्कूल एग्जाम सेंटर से मेल खाता है. EOU के अधिकारी अपने साथ दो एल्युमिनियम के बक्से ले गए, जिनमें क्वेश्चनपेपर थे.
आलम ने कहा कि EOU के अधिकारियों ने हमें बताया कि एल्युमीनियम के बक्सों के चारों ओर लगे स्टिकर एक समान नहीं थे और कुंडी के पैटर्न भी अलग-अलग थे. इसके अलावा, 7 परतों वाले लिफाफे के एक सिरे पर दरार थी और ऐसा लग रहा था कि उसे काटा गया है.