राजौरी: जम्मू-कश्मीर के राजौरी के दोरिमाल जंगलों में आतंकवादियों और सुरक्षा बलों के बीच मुठभेड़ हो गई. खबरों के अनुसार, करीब 2 से 3 आतंकवादियों का पता लगाया जा रहा है. सुरक्षा बलों को आतंकवादियों की हलचल मिलने के बाद सुरक्षा बलों ने जंगल में तलाशी अभिया शुरू किया. इसी दौरान, आतंकवादियों ने उन पर गोलीबारी शुरू कर दी.
बता दें कि भारतीय सेना ने फरवरी महीने में व्हाइट नाइट कोर के जरिए घोषणा की थी कि किश्तवाड़ से आतंकवादी नेटवर्क को खत्म कर दिया गया है. भारतीय सेना ने एक्स पर सात आतंकवादियों की फोटोज पोस्ट की थीं. इसमें लिखा था कि 326 दिनों बाद किश्तवाड़ में आतंकवादी नेटवर्क को खत्म कर दिया गया है. इस पोस्ट में बताया गया था कि जिन आतंकवादियों को मारा गया था उनमें जैश का कमांडर सैफुल्लाह भी शामिल था. बता दें कि सैफुल्लाह आतंकवादी ऑपरेशन का मास्टरमाइंड था.
🔴 #BREAKING | Jammu and Kashmir: Encounter between terrorists and security forces continues in the Dorimal forests of Rajouri.
It is believed that at least 2-3 terrorists are trapped in this area.#RajouriEncounter | #JammuAndKashmir | #DorimalForest | #SecurityForces |… pic.twitter.com/GXrCewNuEyAlso Read
- डीएमके-कांग्रेस गठबंधन टूटा: क्या BJP के करीब जाएगी DMK? राज्यसभा समीकरण बदलने के संकेत, राष्ट्रीय राजनीति पर क्या होगा असर?
- अच्छी खबर: रोजगार मेले में PM मोदी ने बांटे 51 हजार से ज्यादा नियुक्ति पत्र, अब तक 12 लाख युवाओं को मिली नौकरी
- कॉकरोच को जवाब देने आई ओग्गी जनता पार्टी, सोशल मीडिया पर हड़कंप; 5 पॉइंट में जानें इसके बारे में
— United News of India (@uniindianews) May 23, 2026
पिछले हफ्ते सेना प्रमुख जनरल उपेंद्र द्विवेदी ने पाकिस्तान को एक कड़ा संदेश दिया था कि अगर पाकिस्तान आतंकवादियों को पनाह देना और भारत के खिलाफ काम करना जारी रखता है, तो उसे यह भी तय करना चाहिए कि क्या वो भूगोल का हिस्सा बनना चाहता है या फिर इतिहास का.
बता दें कि पिछले साल पहलगाम का बदला लेने के लिए 7 मई को ऑपरेशन सिंदूर शुरू किया गया था. इस दौरान पहलगाम का बदला लेने के लिए आतंकवादी हमले का जवाब दिया गया था. इसके तहत भारतीय सेना ने पाकिस्तान और पाकिस्तान-अधिकृत कश्मीर (PoK) में मौजूद कई आतंकी ठिकानों पर सटीक हमले किए थे.
इसके बाद पाकिस्तान ने भी भारत के खिलाफ हमले शुरू कर दिए थे. दोनों पड़ोसी देशों के बीच करीब 88 घंटों तक सैन्य संघर्ष चला. इसके बाद 10 मई की शाम दोनों पक्षों के बीच आपसी सहमति हुई और युद्ध समाप्त हो गया.