दंगे की आग में बेटे को खोया...मुआवजा लेने से किया इंकार, कांग्रेस के इस दिग्गज को हराकर बघेल सरकार से लिया बदला

Ishwar Sahu Defeats Ravindra Choubey: छत्तीसगढ़ के साजा विधानसभा सीट पर बीजेपी की टिकट से चुनाव लड़ रहे ईश्वर साहू नामक एक मजदूर ने बघेल सरकार के कृषि मंत्री को चुनाव हराया है. आपको बता दें ईश्वर साहू का बेटा दंगों में मारा गया था.

Purushottam Kumar

Ishwar Sahu Defeats Ravindra Choubey: छत्तीसगढ़ विधानसभा चुनाव के नतीजों ने हर किसी को हैरान कर दिया है. दरअसल, छत्तीसगढ़ में बीजेपी ने कांग्रेस सरकार को उखाड़ फेंकते हुए 54 सीट पर जीत दर्ज की है और कांग्रेस महज 35 सीटों पर सिमट गई है. इस चुनाव में साजा विधानसभा का रिजल्ट बेहद ही चौंकाने वाला रही है. इस विधानसभा से चुनाव लड़ रहे बघेल सरकार के कृषि मंत्री रविंद्र चौबे को करारी हार का सामना करना पड़ा है. रविंद्र चौबे को ईश्वर साहू नामक एक मजदूर ने चुनाव हराया है.

आपको बताते चलें रविंद्र चौबे सात बार से विधायक रह चुके हैं लेकिन ईश्वर साहू ने इससे पहले कोई चुनाव नहीं लड़ा था. बीजेपी की टिकट से चुनाव लड़ने वाले ईश्वर साहू ने 5 हजार से ज्यादा वोटों की अंतर से जीत दर्ज की है. आपको बता दें, ईश्वर  साहू को 1,01,789 वोट मिले तो वहीं रविंद्र चौबे को महज 96,593 वोटों मिले थे.

दंगों में मारा गया था बेटा

छत्तीसगढ़ विधानसभा चुनाव के दौरान बीजेपी सांप्रदायिक हिंसा, धर्म परिवर्तन के मुद्दे पर कांग्रेस को अकसर घेरती हुई नजर रही थी. इसी कड़ी में बीजेपी ने बिरनपुर निवासी ईश्वर साहू को टिकट देकर कांग्रेस के खिलाफ मैदान में उतारा था. आपको बताते चलें, ईश्वर साहू का बेटा एक सांप्रदायिक दंगों के दौरान मारा गया था. ईश्वर साहू के पक्ष में केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने भी साजा में रैली की थी. इस दौरान शाह ने कहा था कि ईश्वर साहू सिर्फ उम्मीदवार ही नहीं हैं बल्कि न्याय की लड़ाई के प्रतीक हैं. अमित शाह ने आगे कहा था कि अगर बीजेपी सत्ता में आती है तो उनके बेटे के सभी हत्यारे को जेल भेजेगी.

क्या है पूरा मामला

साजा विधानसभा क्षेत्र में अप्रैल महीने में हुए एक सांप्रदायिक दंगों के दौरान ईश्वर साहू के बेटे की मौत हुई थी. जानकारी के अनुसार स्कूल में हुई मारपीट की एक घटना ने सांप्रदायिक रंग ले लिया था. इस दंगे में ईश्वर का बेटे भुवनेश्वर साहू के साथ साथ 3 लोगों को अपनी जान गंवानी पड़ी थी. भूपेश बघेल सरकार की ओर से इस मामले में भुवनेश्वर साहू के परिजनों को 10 लाख रुपए की मदद और सरकारी नौकरी देने का ऐलान किया था लेकिन भुवनेश्वर ने इसे लेने से इनकार कर दिया था.