क्या 26 तारीख है अशुभ? अलग-अलग साल में इसी दिन भूकंप, सुनामी और बाढ़ ने मचाई तबाही

दुनिया के अलग-अलग कोने में अलग-अलग साल में 26 तारीख को कई बड़ी घटनाएं घटी. जिसमें 26 दिसंबर 2004 की हिंद महासागर सुनामी, 26 जनवरी 2001 का गुजरात भूकंप आज भी लोगों की याद में हैं. ऐसे में सवाल उठता है कि क्या 26 तारीख वाकई अशुभ है या फिर इन घटनाओं का एक ही तारीख पर होना महज संयोग है?

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Shanu Sharma

दुनिया में हर दिन न जाने कितनी घटनाएं होती रहती है, लेकिन इनमें से कुछ घटनाएं ऐसी हैं जिसे कभी भूला नहीं जा सकता है. हालांकि इससे भी ज्यादा खास बात यह है कि उन चुनिंदा घटनाओं में से भी बहुत सारी घटनाएं ऐसी हैं जो अलग-अलग साल और महीने में 26 तारीख को ही घटी है. 

अब तक इस पृथ्वी पर हुए सबसे भयावह प्राकृतिक आपदाओं में से एक 26 दिसंबर 2004 की है. इस दिन इंडोनेशिया के सुमात्रा द्वीप के पास समुद्र के नीचे करीब 9.1 से 9.3 तीव्रता के शक्तिशाली भूकंप के बाद हिंद महासागर में सुनामी आया था. भूकंप के बाद समुद्र में उठी विशाल लहरों ने कई देशों में भारी तबाही मचाई थी.

इन तीन घटनाओं में लाखों की गई जान

इस सुनामी की लहरों की ऊंचाई 15 से 30 मीटर तक बताई गईं थी. इसका असर इंडोनेशिया, श्रीलंका, भारत, थाईलैंड और मालदीव समेत हिंद महासागर के आसपास के 14 देशों में इसका असर हुआ. इस आपदा में 2.27 लाख से ज्यादा लोगों की जान गई. भारत में भी हजारों लोगों की मौत हुई. इस घटना को बॉक्सिंग डे सुनामी के नाम से भी जाना जाता है.


इस घटना के करीब तीन साल पहले 26 जनवरी की सुबह गुजरात के भुज क्षेत्र में 7.7 तीव्रता का भूकंप आया था. उस दिन देश गणतंत्र दिवस मना रहा था, लेकिन गुजरात में कुछ ही मिनटों में भारी तबाही फैल गई. भूकंप के कारण हजारों इमारतें ढह गईं और बड़ी संख्या में लोग मलबे में दब गए. अलग-अलग अनुमानों के मुताबिक इस आपदा में करीब 13 हजार से 20 हजार लोगों की मौत हुई. लाखों घर क्षतिग्रस्त हुए और बड़ी संख्या में लोग बेघर हो गए थे. इस घटना ने पूरे देश को हिलाकर रख दिया था.

वहीं 26 जुलाई 2005 को मुंबई की बारिश शायद ही कोई भूल सकता है. उस दिन शहर में करीब 944 मिलीमीटर तक बारिश दर्ज की गई. इतनी ज्यादा बारिश के कारण मुंबई के कई हिस्से जलमग्न हो गए थे. हजारों लोग घंटों तक रास्तों में फंसे रहे और सामान्य जनजीवन पूरी तरह ठप हो गया. इस आपदा में सैकड़ों लोगों की जान गई और शहर को बड़े पैमाने पर आर्थिक नुकसान उठाना पड़ा था.

भूकंप, ज्वालामुखी और बाढ़ 

26 तारीख को लेकर सवाल और भी कई घटनाओं को लेकर उठ रहा है. जिसमें से एक और उदाहरण 26 दिसंबर 2003 का है, जब ईरान के बाम शहर में करीब 6.6 तीव्रता का भूकंप आया. इस भूकंप ने ऐतिहासिक शहर को बुरी तरह तबाह कर दिया था. हजारों लोगों की मौत हुई और बड़ी संख्या में इमारतें मलबे में बदल गईं.

वहीं इतिहास में 26 तारीख से जुड़ी एक बेहद विनाशकारी घटना 26 अगस्त 1883 को इंडोनेशिया में हुई थी. इस दिन क्राकाटोआ ज्वालामुखी में जोरदार विस्फोट हुआ. इसके बाद समुद्र में उठी सुनामी ने आसपास के तटीय इलाकों में भारी तबाही मचाई. इस घटना में करीब 36 हजार लोगों की मौत का अनुमान लगाया गया था. अगर हाल की अभी की बात करें तो नेपाल-तिब्बत सीमा पर आई भीषण बाढ़ भी 26 अगस्त को आई. इस घटना में भी कई लोगों की जान चली गई.

तो क्या 26 तारीख सच में अशुभ है?

इन घटनाओं को एक साथ देखने पर 26 तारीख जरूर असामान्य लग सकती है. लेकिन किसी तारीख को प्राकृतिक आपदाओं के लिए जिम्मेदार मानने का कोई वैज्ञानिक आधार नहीं है. भूकंप धरती की टेक्टोनिक प्लेटों की गतिविधियों से आते हैं, सुनामी समुद्र के भीतर भूकंप या अन्य भूगर्भीय हलचलों से पैदा हो सकती है और बाढ़ अत्यधिक बारिश, ग्लेशियर झील टूटने या अन्य प्राकृतिक कारणों से आ सकती है.

26 तारीख को हुई कुछ बेहद बड़ी घटनाएं लोगों की स्मृति में गहराई से दर्ज हो गईं. इसके बाद जब इसी तारीख से जुड़ी दूसरी घटनाएं सामने आती हैं तो हमारा दिमाग उनमें एक पैटर्न तलाशने लगता है. मनोविज्ञान में इसे पैटर्न खोजने की प्रवृत्ति के तौर पर समझा जाता है. इसलिए 26 तारीख को अशुभ कहना वैज्ञानिक निष्कर्ष नहीं, बल्कि घटनाओं को जोड़कर बनाया गया एक विश्वास है.