अगर ट्रंप टैरिफ कम नहीं करते तो पीएम मोदी को क्या करना चाहिए? जानें क्या चाहती है भारत की जनता

ट्रंप प्रशासन की आक्रामक टैरिफ नीति का सीधा असर भारत-अमेरिका व्यापार पर पड़ा है. 50 प्रतिशत तक के टैरिफ ने भारत के निर्यातकों की चिंता बढ़ा दी. खासतौर पर श्रम-प्रधान क्षेत्रों पर दबाव महसूस किया गया.

Chat GPT
Anuj

नई दिल्ली: डोनाल्ड ट्रंप की व्हाइट हाउस में वापसी के बाद पिछले 12 महीने भारत-अमेरिका संबंधों के लिए चुनौतीपूर्ण रहे हैं. अमेरिका ने सहयोगी और विरोधी देशों पर समान रूप से ऊंचे टैरिफ लगाए, जिसमें भारत भी शामिल है.

रूसी तेल की खरीद को लेकर भारत पर 50 प्रतिशत तक टैरिफ लगाया गया. इसके बावजूद नई दिल्ली ने आक्रामक बयानबाजी से दूरी बनाए रखी और कूटनीतिक व आर्थिक संतुलन के रास्ते पर चलना चुना.

ट्रंप की टैरिफ नीति का असर

ट्रंप प्रशासन की आक्रामक टैरिफ नीति का सीधा असर भारत-अमेरिका व्यापार पर पड़ा है. 50 प्रतिशत तक के टैरिफ ने भारत के निर्यातकों की चिंता बढ़ा दी. खासतौर पर श्रम-प्रधान क्षेत्रों पर दबाव महसूस किया गया. इसके बावजूद भारत ने सार्वजनिक रूप से टकराव से बचते हुए संयमित रुख अपनाया, ताकि रिश्तों में पूरी तरह खटास न आए.

जनमत में जवाबी कार्रवाई की मांग

एक सर्वे के मुताबिक, 45 प्रतिशत भारतीय चाहते हैं कि अमेरिका के खिलाफ जवाबी टैरिफ लगाए जाएं. लोगों का मानना है कि बराबरी की कार्रवाई से भारत अपने हितों की रक्षा कर सकता है. हालांकि, केवल 6 प्रतिशत लोग ऐसे हैं जो ट्रंप की शर्तें मानने के पक्ष में हैं.

सरकार की ठोस रणनीति

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने ट्रंप के साथ शब्दों की जंग से दूरी रखी. इसके बजाय सरकार ने निर्यात बाजारों में विविधता लाने पर जोर दिया. ब्रिटेन, ओमान, न्यूजीलैंड और यूरोपीय संघ के साथ हुए व्यापार समझौते इसी रणनीति का हिस्सा हैं. इन्हें भारतीय व्यापार के लिए लंबी राहत के रूप में देखा जा रहा है.

पर्दे के पीछे उठाए गए कदम

भारत ने चुपचाप लेकिन प्रभावी कदम भी उठाए. नवंबर में अमेरिकी दालों पर 30 प्रतिशत टैरिफ लगाया गया. उस समय अमेरिका में दालों की अधिकता थी, जिससे वहां के किसानों और निर्यातकों को नुकसान हुआ. बिना शोर मचाए उठाया गया यह कदम भारत की व्यावहारिक नीति को दर्शाता है.

आर्थिक संकेत और रिश्तों की धारणा

वाणिज्य मंत्रालय के अनुसार, दिसंबर 2025 में अमेरिका को भारत का निर्यात 1.83 प्रतिशत घटकर 6.88 अरब डॉलर रहा. एक अन्य सर्वे में 54 प्रतिशत लोगों ने माना कि ट्रंप के दूसरे कार्यकाल में भारत-अमेरिका संबंध बिगड़े हैं. सरकार अब घरेलू मांग बढ़ाने और जीएसटी में राहत जैसे उपायों पर भी ध्यान दे रही है.