'भारतीय नागरिकों के पूरे होंगे सपने, परिसीमन विधेयक के पीछे PoK...', बीजेपी नेता ने किया बड़ा दावा

इस समय देश में महिला आरक्षण कानून को लेकर बहस जारी है. कुछ लोग इसे सही बता रहे हैं तो वही कुछ लोगों का कहना है कि इससे दक्षिण में दिक्कत आएगी. लेकिन इसी बीच बीजेपी के एक नेता द्वारा किए गए दावे ने लोगों का ध्यान अपनी ओर खिंचा है.

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Shanu Sharma

देश में महिला आरक्षण संशोधन विधेयक और परिसीमन विधेयक को लेकर लगातार बहस छिड़ी. सरकार ने इन महत्वपूर्ण विधेयकों को पास कराने के लिए विशेष सत्र बुलाया है. वहीं विपक्ष द्वारा इसका विरोध किया जा रहा है. इसी बीच बीजेपी सांसद बूरा नरसैया गौड़ का बयान सबसे ज्यादा चर्चा में आ गया है. 
 
गौड़ ने कहा कि परिसीमन विधेयक के माध्यम से पाकिस्तान के कब्जे वाले कश्मीर को भारत में शामिल करने की तैयारी हो रही है.  नरसैया गौड़ ने कहा कि इस विधेयक के जरिए लोकसभा की सीटों को 543 से बढ़ाकर 850 करने का प्रावधान है. PoK में भी चुनाव कराए जाएंगे और वहां से चुने गए प्रतिनिधि भारत की संसद का हिस्सा बनेंगे.

भारत का अभिन्न अंग है PoK

बीजेपी नेता ने कहा कि पीओके भारत का अभिन्न अंग है और हर भारतीय का सपना है कि वह क्षेत्र जल्द से जल्द वापस मिले. संवैधानिक और नैतिक रूप से PoK भारत का हिस्सा है. ऐसा समय जरूर आएगा जब PoK के लोग भी भारत के लोकतंत्र में मतदान करेंगे और उनके प्रतिनिधि लोकसभा व राज्यसभा में बैठेंगे. एक दिन पहले लोकसभा में 12 घंटे तक लगातार चर्चा चली.

इसमें नारी शक्ति वंदन अधिनियम (महिला आरक्षण) और परिसीमन विधेयक पर विस्तार से बात हुई. आज यानी शुक्रवार को शाम 4 बजे इन विधेयकों पर वोटिंग होने वाली है. सरकार की योजना है कि महिला आरक्षण कानून 2029 के आम चुनाव से लागू हो जाए. वहीं विपक्ष का कहना है कि परिसीमन से पहले नई जनगणना होनी चाहिए. उन्होंने 2011 की जनगणना के आंकड़ों को पुराना और अप्रासंगिक बताया.

क्या है विपक्ष का तर्क?

विपक्षी दल महिला आरक्षण विधेयक को जल्द लागू करने का समर्थन कर रहे हैं, लेकिन परिसीमन विधेयक का पुरजोर विरोध कर रहे हैं. उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार महिला आरक्षण के नाम पर परिसीमन कर अपनी राजनीतिक स्थिति मजबूत करना चाहती है और अन्य पिछड़े वर्गों की हिस्सेदारी छीनने की कोशिश कर रही है. विपक्ष का तर्क है कि महिला आरक्षण को परिसीमन से अलग रखकर वर्तमान 543 लोकसभा सीटों के आधार पर 2029 से लागू किया जा सकता है. इस बीच प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने सभी राजनीतिक दलों से अपील की कि महिला आरक्षण संबंधी संविधान संशोधन विधेयक को सर्वसम्मति से पास किया जाए.