सड़क हादसे में जवान की मौत, कुछ ही घंटों बाद बेटी ने लिया जन्म; जीवन और मृत्यु का टकराव अंदर तक झकझोर देगा

महाराष्ट्र राज्य के सातारा निवासी जवान की सड़क हादसे में मौत हो गई. घटना के बाद गांव का माहौल पूरी तरह गमगीन हो गया. दुखद घटना के कुछ ही घंटों बाद प्रमोद जाधव की पत्नी ने एक बेटी को जन्म दिया.

Anuj

सातारा: महाराष्ट्र राज्य के सातारा जिले के आरे दरे गांव से एक ऐसी दुखद कहानी सामने आई, जिसने हर किसी का दिल तोड़ दिया. गांव का माहौल पूरी तरह गमगीन था. हर गली, हर रास्ता और हर चेहरा शोक में डूबा हुआ था. जब तिरंगे में लिपटा हुआ एक पार्थिव शरीर गांव की गलियों से होकर गुजर रहा था, तो लोग हाथ जोड़कर सिर झुकाए खड़े थे. यह अंतिम यात्रा भारतीय सेना के जवान प्रमोद जाधव की थी, जिन्हें पूरे सम्मान के साथ अंतिम विदाई दी जा रही थी.

जवान प्रमोद जाधव की मौत

प्रमोद जाधव कुछ दिन पहले ही छुट्टी लेकर अपने घर आए थे. घर में खुशी का माहौल था, क्योंकि उनकी पत्नी गर्भवती थीं. पूरे परिवार को उस दिन का इंतजार था, जब घर में एक नई जिंदगी आएगी और खुशियों की किलकारी गूंजेगी. लेकिन किसी को क्या पता था कि यह खुशी इतनी जल्दी मातम में बदल जाएगी. एक दर्दनाक सड़क हादसे में प्रमोद जाधव की अचानक मौत हो गई और एक हंसता-खेलता परिवार टूट गया.

पिता की मौत और बेटी का जन्म

इस दुखद घटना के कुछ ही घंटों बाद प्रमोद जाधव की पत्नी ने एक बेटी को जन्म दिया. एक तरफ घर में नन्ही बच्ची का जन्म हुआ, वहीं दूसरी तरफ उसके पिता इस दुनिया को अलविदा कह चुके थे. यह जीवन और मृत्यु का ऐसा दृश्य था, जिसने हर इंसान को अंदर तक हिला दिया. जिस बच्ची को अपने पिता की गोद में खेलना था, वह पैदा होते ही पिता के साए से वंचित हो गई.

इलाके में शोक की लहर

जब गांव में यह खबर फैली, तो पूरे इलाके में शोक की लहर दौड़ गई. सेना और प्रशासन की मौजूदगी में अंतिम संस्कार की तैयारियां शुरू हुईं. हर आंख नम थी. सबसे भावुक पल तब आया, जब प्रमोद जाधव की पत्नी को अस्पताल से स्ट्रेचर पर सीधे अंतिम दर्शन के लिए लाया गया. अभी-अभी डिलीवरी हुई थी, शरीर बेहद कमजोर था, लेकिन पति को आखिरी बार देखने की इच्छा उन्हें वहां खींच लाई. उनकी आंखों से आंसू थम नहीं रहे थे और दर्द साफ झलक रहा था.

दृश्य देखकर आंखें हुई नम

इसके बाद जो दृश्य सामने आया, उसने वहां मौजूद हर इंसान को रुला दिया. सिर्फ आठ घंटे पहले जन्मी मासूम बच्ची को उसकी मां की गोद में लेकर पिता के पार्थिव शरीर के पास लाया गया. नन्ही सी बच्ची को दुनिया की कोई समझ नहीं थी, लेकिन वह तिरंगे में लिपटे अपने पिता के सामने थी, जिन्होंने देश की रक्षा की, लेकिन अपनी बेटी को कभी देख या गोद में नहीं ले सके.

राजकीय सम्मान के साथ अंतिम विदाई

सेना की ओर से पूरे राजकीय सम्मान के साथ प्रमोद जाधव को अंतिम सलामी दी गई. बंदूकों की आवाज आसमान में गूंजी, लेकिन उस आवाज में एक परिवार के टूटने का दर्द भी साफ सुनाई दे रहा था. गांव के लोग, रिश्तेदार और अधिकारी सभी भावुक थे.

यादों के सहारे जिंदगी 

प्रमोद जाधव सिर्फ एक सैनिक नहीं थे, वे एक पति, एक होने वाले पिता और अपने माता-पिता की सबसे बड़ी उम्मीद थे. उनके जाने से एक परिवार की दुनिया उजड़ गई. उनकी बेटी अब बिना पिता के बड़ी होगी, पत्नी को जीवनभर इस खालीपन के साथ जीना होगा और माता-पिता बेटे की यादों के सहारे जिंदगी बिताएंगे. सातारा का आरे दरे गांव आज भी इस गहरे दुख में डूबा हुआ है. देश के इस वीर सपूत की कहानी हमेशा लोगों के दिलों में जिंदा रहेगी.