'बस कागजी कार्रवाई बाकी', US प्रतिनिधि ने पीयूष गोयल के दावों पर लगाई मुहर; टैरिफ में भारी कटौती की तैयारी
भारत और अमेरिका के बीच ऐतिहासिक व्यापार समझौता अंतिम चरण में है. डोनाल्ड ट्रंप और पीएम मोदी ने इसकी पुष्टि की है, जिसमें टैरिफ कटौती और 500 अरब डॉलर की खरीदारी जैसे बड़े प्रावधान शामिल हैं.
नई दिल्ली: भारत और अमेरिका के बीच लंबे समय से प्रतीक्षित व्यापार समझौता अब हकीकत बनने की दिशा में है. राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप द्वारा समझौते की घोषणा के बाद, दोनों देशों के अधिकारियों ने पुष्टि की है कि अंतिम दस्तावेजों को तैयार किया जा रहा है. अमेरिकी व्यापार प्रतिनिधि जेमिसन ग्रीर ने स्पष्ट किया कि विवरण तय हो चुके हैं, बस उन्हें कागजी रूप दिया जा रहा है. भारतीय वाणिज्य मंत्री पीयूष गोयल ने भी इसे अंतिम चरण में बताते हुए जल्द ही साझा बयान जारी करने की बात कही है.
अवसर ट्रंप प्रशासन ने घोषणा की है कि भारत पर लगने वाले टैरिफ को 50 प्रतिशत से घटाकर 18 प्रतिशत कर दिया जाएगा. प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने इस समझौते की पुष्टि करते हुए कहा कि जब दुनिया की दो सबसे बड़ी अर्थव्यवस्थाएं मिलकर काम करती हैं, तो यह लोगों के लिए असीमित अवसर खोलती है. यह कदम आपसी सहयोग के क्षेत्र में एक नया मील का पत्थर साबित होगा, जिससे दोनों देशों के नागरिकों को सीधा आर्थिक लाभ मिलने की पूरी उम्मीद है.
500 अरब डॉलर का मेगा निवेश
डोनाल्ड ट्रंप के सोशल मीडिया पोस्ट के अनुसार, भारत अमेरिकी सामानों पर अपने टैरिफ और गैर-टैरिफ बाधाओं को शून्य करने पर सहमत हुआ है. इसके अलावा, भारत ने ऊर्जा, तकनीक, कृषि उत्पादों और कोयले जैसे अमेरिकी सामानों में 500 अरब डॉलर से अधिक की खरीदारी करने की प्रतिबद्धता जताई है. यह विशाल राशि द्विपक्षीय व्यापार के इतिहास में एक नया रिकॉर्ड है. हालांकि, इस आंकड़े की विश्वसनीयता को लेकर विशेषज्ञों के बीच अभी भी अलग-अलग राय देखने को मिल रही है.
रूसी तेल पर पाबंदी का पेच
समझौते का एक बेहद संवेदनशील हिस्सा रूसी तेल की खरीद से जुड़ा है. ट्रंप के अनुसार, भारत रूसी तेल की खरीद बंद करने पर सहमत हो गया है, जिसके कारण भारत पर अतिरिक्त 25 प्रतिशत टैरिफ लगाया गया था. हालांकि, इस दावे पर रूस के क्रेमलिन ने प्रतिक्रिया देते हुए कहा है कि उन्हें अभी तक भारत की ओर से खरीद बंद करने की कोई आधिकारिक सूचना नहीं मिली है. यह पहलू वैश्विक कूटनीति के लिहाज से काफी महत्वपूर्ण और पेचीदा माना जा रहा है.
कृषि क्षेत्र की सुरक्षा और चुनौतियां
अमेरिकी व्यापार प्रतिनिधि जेमिसन ग्रीर ने संकेत दिया कि भारत अपने कृषि उत्पादों के इर्द-गिर्द कुछ सुरक्षात्मक उपाय बनाए हुए है. पीयूष गोयल ने भी कहा कि पूर्ण विवरण तकनीकी प्रक्रियाओं के पूरा होने के बाद ही साझा किए जाएंगे. भारतीय डेयरी और कृषि क्षेत्र हमेशा से संवेदनशील रहे हैं, इसलिए सरकार इन क्षेत्रों के हितों की रक्षा का दावा कर रही है. विपक्ष ने हालांकि सवाल उठाए हैं कि क्या अमेरिकी उत्पादों के लिए बाजार खोलने से घरेलू किसानों पर बुरा असर पड़ेगा.
अंतिम दस्तावेजों की तैयारी
अमेरिकी व्यापार प्रतिनिधि ने सीएनबीसी से बातचीत में कहा कि 'पेपरिंग' (दस्तावेजीकरण) का काम जल्द पूरा कर लिया जाएगा. वाणिज्य मंत्री पीयूष गोयल ने भी विश्वास जताया है कि दोनों देश जल्द ही एक संयुक्त बयान जारी करेंगे. जब तक अंतिम हस्ताक्षर नहीं हो जाते और तकनीकी प्रक्रियाएं पूरी नहीं होतीं, तब तक समझौते की पूरी बारीकियां सार्वजनिक नहीं की जाएंगी. वर्तमान में, दिल्ली और वाशिंगटन दोनों ही इस रणनीतिक सौदे को अपनी बड़ी सफलता के रूप में पेश करने में जुटे हुए हैं.
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