चीन का रास्ता छोड़ भारत मुड़ा ईरानी जहाज! सालों बाद ईरान से खरीदा गया एलपीजी का पहला कार्गो
भारत ने 2019 के बाद पहली बार ईरान से एलपीजी की खेप खरीदी है. अमेरिकी प्रतिबंधों में मिली अस्थायी छूट के बीच 'अरोड़ा' टैंकर मंगलुरु पहुंच रहा है, जिसका भुगतान भारतीय रुपये में किया जाना तय हुआ है.
नई दिल्ली: पश्चिम एशिया में गहराते युद्ध और वैश्विक अनिश्चितता के बीच भारत ने अपनी ऊर्जा सुरक्षा की दिशा में एक बड़ा व्यापारिक कदम उठाया है. कई सालों के लंबे अंतराल के बाद भारत ने ईरान से लिक्विफाइड पेट्रोलियम गैस (LPG) का अपना पहला कार्गो खरीदने का फैसला किया है. यह कदम तब उठाया गया है जब अमेरिकी प्रतिबंधों में भारत को अस्थायी राहत मिली है. वर्तमान में होर्मुज स्ट्रेट में जारी अवरोधों ने दक्षिण एशियाई देशों के लिए ईंधन की आपूर्ति को एक गंभीर चुनौती बना दिया है.
अमेरिकी प्रतिबंधों के कड़े दबाव के कारण भारत ने साल 2019 में ईरान से ऊर्जा की खरीद पूरी तरह बंद कर दी थी. हालांकि, रॉयटर्स और लंदन स्टॉक एक्सचेंज ग्रुप (LSEG) के हालिया आंकड़े बताते हैं कि 'अरोड़ा' नाम का ईरानी टैंकर जल्द ही भारत के पश्चिमी तट पर स्थित मंगलुरु बंदरगाह पहुंचने वाला है. दिलचस्प बात यह है कि यह टैंकर शुरुआत में चीन की ओर जा रहा था. इस खरीद को अमेरिकी प्रशासन द्वारा दी गई अस्थायी छूट के परिणामस्वरूप देखा जा रहा है.
रुपये में भुगतान और घरेलू कंपनियों का तालमेल
इस पूरे सौदे की सबसे बड़ी खूबी यह है कि कार्गो का भुगतान डॉलर के बजाय भारतीय रुपये में किया जाएगा. सूत्रों के अनुसार, यह कार्गो एक ट्रेडर के माध्यम से खरीदा गया है जिसे भारत की तीन प्रमुख सरकारी कंपनियां - इंडियन ऑयल (IOC), भारत पेट्रोलियम (BPCL) और हिंदुस्तान पेट्रोलियम (HPCL) आपस में बांट लेंगी. हालांकि संघीय शिपिंग मंत्रालय के अधिकारियों ने फिलहाल इस खरीद की पुष्टि नहीं की है, लेकिन उद्योग जगत इसे भारत के लिए एक बड़ी कूटनीतिक जीत मान रहा है.
होर्मुज स्ट्रेट का संकट और दक्षिण एशिया पर असर
ईरान, इजरायल और अमेरिका के बीच जारी सैन्य तनाव ने होर्मुज स्ट्रेट के व्यापारिक मार्ग को बेहद संवेदनशील बना दिया है. दुनिया के 25 प्रतिशत कच्चे तेल और गैस की सप्लाई इसी संकरे रास्ते से होती है. इस मार्ग में आई बाधाओं ने भारत जैसे देशों पर बड़ा असर डाला है. भारत अपनी एलपीजी जरूरतों का लगभग 60 प्रतिशत हिस्सा आयात करता है, जिसमें से 90 प्रतिशत हिस्सा केवल मध्य पूर्व के देशों से आता है. ऐसे में यह मार्ग भारत की रसोई के लिए जीवनरेखा है.
गैस संकट से निपटने के लिए सरकार की मुस्तैदी
भारत इस समय दशकों के सबसे बड़े गैस संकट का सामना कर रहा है. घरेलू उपभोक्ताओं को कुकिंग गैस की कमी न हो, इसके लिए सरकार ने उद्योगों की गैस सप्लाई में कटौती जैसे कड़े कदम उठाए हैं. भारत ने रणनीतिक सूझबूझ दिखाते हुए होर्मुज स्ट्रेट में फंसे अपने चार टैंकरों - शिवालिक, नंदा देवी, पाइन गैस और जग वसंत को सुरक्षित निकाल लिया है. इसके अलावा, फारस की खाड़ी में खाली जहाजों पर एलपीजी लोडिंग की प्रक्रिया भी युद्ध स्तर पर शुरू कर दी गई है.
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