मॉस्को में आयोजित एक ज्वाइंट प्रेस वार्ता में विदेश मंत्री एस जयशंकर ने कहा कि भारत और रूस के बीच संबंध "द्वितीय विश्व युद्ध के बाद विश्व की प्रमुख साझेदारियों में सबसे स्थिर रहे हैं." रूसी विदेश मंत्री सर्गेई लावरोव ने भी इस भावना का समर्थन करते हुए इसे "विशेष रणनीतिक साझेदारी" करार दिया, जिसे दोनों देशों के नेताओं ने आकार दिया है.
मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक, एस जयशंकर, जो डिप्टी पीएम डेनिस मंटुरोव के साथ कारोबार और आर्थिक वार्ता के बाद मॉस्को पहुंचे, उन्होंने कहा कि लावरोव के साथ उनकी मुलाकात दोनों देशों के राजनीतिक संबंधों और द्विपक्षीय सहयोग की समीक्षा का अवसर थी. उन्होंने कहा, "मैं राजनीति, कारोबार, अर्थशास्त्र, निवेश, रक्षा, विज्ञान और प्रौद्योगिकी, और निश्चित रूप से जन-जन के बीच आदान-प्रदान पर विचारों का आदान-प्रदान करने की उम्मीद करता हूं."
हाई लेवल मुलाकातों का सिलसिला जारी
जयशंकर ने पिछले साल 22वें सालाना शिखर सम्मेलन और कजान में हुई नेतृत्व बैठकों का जिक्र करते हुए कहा, "इन मुलाकातों ने हमेशा हमें हमारी विशेष और विशेषाधिकार प्राप्त रणनीतिक साझेदारी को आगे बढ़ाने के लिए मार्गदर्शन दिया है." उन्होंने इस साल के अंत में होने वाले अगले शिखर सम्मेलन की तैयारियों का भी जिक्र किया. इसके अलावा, राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार अजीत डोभाल, केंद्रीय मंत्री अश्विनी वैष्णव और नीति आयोग के उपाध्यक्ष सुमन बेरी की हाल की यात्राओं का हवाला देते हुए जयशंकर ने कहा, "इन सभी ने दिखाया कि हमारा रिश्ता कितना गहरा है."
बदलते वैश्विक परिदृश्य में सहयोग
जयशंकर ने बदलते भू-राजनीतिक परिदृश्य, आर्थिक और व्यापारिक स्थिति, और दोनों देशों के साझा लक्ष्यों को रेखांकित किया. उन्होंने मंटुरोव से एक दिन पहले कहा, "अधिक करने और अलग तरह से करने का मंत्र हमारा होना चाहिए." उन्होंने रूसी कंपनियों से भारतीय समकक्षों के साथ "अधिक गहनता" से जुड़ने और "पुराने रास्तों पर अटकने" से बचने की अपील की.
रूस का नजरिया: बहुध्रुवीय विश्व व्यवस्था
लावरोव ने जयशंकर का मॉस्को में स्वागत करते हुए कहा, "हम अपने संबंधों को विशेष रणनीतिक साझेदारी के रूप में परिभाषित करते हैं, और यह हमारे नेताओं द्वारा तय किया गया है, और मुझे उम्मीद है कि हम इन संबंधों को पूरी तरह से सही ठहराएंगे.
उन्होंने वैश्विक व्यवस्था में बदलाव का जिक्र करते हुए कहा, "यह एक बहुध्रुवीय अंतरराष्ट्रीय संबंधों की प्रणाली है, जिसमें SCO, BRICS और G20 की भूमिका बढ़ रही है, और निश्चित रूप से, संयुक्त राष्ट्र, जो सहयोग, समझौता और सहमति की तलाश का मंच बना हुआ है. लावरोव ने कहा कि मास्को “संतुलित नजरिया” का समर्थन करता है और उम्मीद है कि जयशंकर के साथ वार्ता फलदायी होगी.
व्यापारिक तनाव के बीच भारत-रूस ने बनाई रणनीति
यह मुलाकात अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के टैरिफ हमले के बीच बढ़ते व्यापारिक तनाव की पृष्ठभूमि में हुई. अमेरिका ने भारतीय सामानों पर टैरिफ को 50% तक दोगुना कर दिया और रूस से कच्चे तेल की खरीद पर नई शुल्क लगाए, जिससे नई दिल्ली में आर्थिक प्रभाव और द्वितीयक प्रतिबंधों की चिंता बढ़ी है. इस संदर्भ में, जयशंकर ने मास्को के साथ सहयोग बढ़ाने और उसमें विविधता लाने के महत्व पर जोर दिया.
उन्होंने एक दिन पहले मंटुरोव से कहा था, "ज्यादा करना और अलग तरीक़े से काम करना हमारा मंत्र होना चाहिए. उन्होंने रूसी कंपनियों से भारतीय समकक्षों के साथ "ज़्यादा गहनता से" जुड़ने और "एक ही रास्ते पर अटके रहने" से बचने का आग्रह किया.