पुतिन की भारत यात्रा से पहले रूस ने इस महत्वपूर्ण समझौते को दी हरी झंडी, अब और भड़क सकते हैं ट्रंप
रूस की स्टेट ड्यूमा ने पुतिन की भारत यात्रा से पहले सैन्य सहयोग समझौते को मंजूरी दी, जिससे दोनों देशों को संयुक्त ड्रिल, मानवीय अभियानों और सैनिक तैनाती में सुविधा मिलेगी. दौरे में रक्षा सहयोग, S-400 व अन्य हथियार प्रणालियों पर अहम समझौते संभव हैं.
नई दिल्ली: रूस की संसद के निचले सदन स्टेट ड्यूमा ने भारत के साथ व्यापक सैन्य सहयोग से जुड़े एक अहम समझौते को मंजूरी दे दी है. यह मंजूरी ठीक उस समय आई है जब रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन दिसंबर में अपने महत्वपूर्ण भारत दौरे पर आने वाले हैं. समझौते को मंगलवार को पूर्ण सत्र में पारित किया गया, जिसे दोनों देशों के बीच सैन्य साझेदारी को नई दिशा देने वाला कदम माना जा रहा है.
सैनिकों की तैनाती और संयुक्त अभियानों का रास्ता साफ
नए समझौते का उद्देश्य भारत और रूस की सशस्त्र सेनाओं के बीच आपसी अभ्यास, बचाव अभियानों और मानवीय मिशनों को सुव्यवस्थित और सरल बनाना है. इसके तहत दोनों देशों को एक-दूसरे की जमीन पर सैनिक और सैन्य सामग्री तैनात करने की कानूनी अनुमति भी मिलेगी. विशेषज्ञों के अनुसार, यह कदम भारत-रूस रक्षा संबंधों को और गहरा करेगा तथा सामरिक साझेदारी को नई मजबूती देगा.
हालांकि, माना जा रहा है कि यह फैसला अमेरिका को असहज कर सकता है. अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप पहले ही रूस से तेल खरीदने पर भारत पर 25% अतिरिक्त टैरिफ लगा चुके हैं.
पुतिन का 4-5 दिसंबर का भारत दौरा, कई अहम मुद्दों पर बातचीत
रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन 4-5 दिसंबर को भारत के दो दिवसीय दौरे पर आएंगे. यह उनकी 2021 के बाद पहली भारत यात्रा और कुल मिलाकर दसवीं यात्रा होगी. इस दौरान उनकी प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के साथ कई रणनीतिक, आर्थिक और क्षेत्रीय मुद्दों पर उच्च स्तरीय चर्चा होने की उम्मीद है.
रक्षा सहयोग इस दौरे का सबसे महत्वपूर्ण एजेंडा रहेगा, क्योंकि भारत और रूस 1960 के दशक से ही रक्षा क्षेत्र में करीबी साझेदार रहे हैं. भारत ने पिछले वर्षों में ‘मेक इन इंडिया’ पहल के तहत विदेशी विशेषकर रूसी रक्षा कंपनियों को भारतीय उद्योगों के साथ साझेदारी करने के लिए प्रोत्साहित किया है.
क्रेमलिन ने दौरे को बताया बेहद महत्वपूर्ण
क्रेमलिन ने हाल ही में कहा कि यह दौरा भारत-रूस संबंधों के “राजनीतिक, आर्थिक, वैज्ञानिक, तकनीकी और सांस्कृतिक-मानवीय क्षेत्रों” में विस्तृत संवाद का अवसर देगा. दोनों नेता अंतरराष्ट्रीय और क्षेत्रीय मुद्दों पर भी गहन चर्चा करेंगे. आखिरी बार पुतिन और मोदी सितंबर में चीन के तिआनजिन में हुई SCO समिट में मिले थे.
भारत की नजर S-400 और नई रक्षा तकनीकों पर
रिपोर्टों के मुताबिक, भारत रूस से S-400 मिसाइल सिस्टम की अतिरिक्त 300 मिसाइलें खरीदने पर विचार कर रहा है. माना जाता है कि पाकिस्तान के साथ तनाव के दौरान S-400 सिस्टम की तैनाती ने भारतीय वायु सुरक्षा को मजबूत स्थिति में रखा था.
इसके अलावा भारत द्वारा S-400 की और बैटरियां खरीदने, S-500 मिसाइल सिस्टम के संयुक्त विकास और कई आधुनिक हथियारों पर समझौते की भी संभावनाएं जताई जा रही हैं. रूस द्वारा इस समझौते को मंजूरी मिलना और पुतिन का आगामी भारत दौरा यह संकेत देता है कि दोनों देशों का रणनीतिक गठबंधन आने वाले दिनों में और अधिक मजबूत होने वाला है.