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ऑपरेशन सिंदूर पर बनाए गए हर डेलिगेशन में एक मुस्लिम, जानें दुनिया भर में कैसे पाकिस्तान को बेनकाब करेंगे?

भारत सरकार ने पाकिस्तान द्वारा प्रायोजित आतंकवाद और ऑपरेशन सिंदूर के मुद्दे को अंतरराष्ट्रीय मंच पर उजागर करने के लिए सात बड़े डेलिगेशन गठित किए हैं. इन डेलिगेशनों में भारतीय संसद के 51 सांसद, पूर्व मंत्री और भारतीय विदेश मंत्रालय के 8 वरिष्ठ अधिकारी शामिल हैं.

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Princy Sharma

Team India 7 Delegation: भारत सरकार ने पाकिस्तान द्वारा प्रायोजित आतंकवाद और ऑपरेशन सिंदूर के मुद्दे को अंतरराष्ट्रीय मंच पर उजागर करने के लिए सात बड़े डेलिगेशन गठित किए हैं. इन डेलिगेशनों में भारतीय संसद के 51 सांसद, पूर्व मंत्री और भारतीय विदेश मंत्रालय के 8 वरिष्ठ अधिकारी शामिल हैं. इन सभी का उद्देश्य दुनिया के प्रमुख देशों के सामने पाकिस्तान के आतंकवादी गतिविधियों के समर्थन और भारत की सुरक्षा स्थिति को स्पष्ट करना है.

यह डेलिगेशन विभिन्न राजनीतिक दलों के प्रमुख नेताओं के नेतृत्व में काम करेंगे. भाजपा के बैजयंत पांडा और रविशंकर प्रसाद, कांग्रेस के शशि थरूर, शिवसेना के श्रीकांत शिंदे, डीएमके के कनिमोझी करुणानिधि और राकांपा-सपा की सुप्रिया सुले जैसे बड़े नाम इन डेलिगेशनों के प्रमुख हैं. प्रत्येक डेलिगेशन में 7 से 8 सदस्य हैं, जिनमें सत्ताधारी गठबंधन एनडीए और विपक्षी दलों के सांसद शामिल हैं. 

कौन से नेता होंगे शामिल?

इन प्रतिनिधिमंडलों में पूर्व केंद्रीय मंत्री गुलाम नबी आजाद, एमजे अकबर, आनंद शर्मा, सलमान खुर्शीद, वी मुरलीधरनऔर एसएस अहलूवालिया जैसे प्रतिष्ठित नेता शामिल हैं, जो फिलहाल संसद सदस्य नहीं हैं. ये नेता भारत के विचार और मुद्दों को दुनिया तक पहुंचाने में अहम भूमिका निभाएंगे.

प्रमुख डेलिगेशन और उनकी यात्रा:

बैजयंत पांडा के नेतृत्व में – यह डेलिगेशन सऊदी अरब, कुवैत, बहरीन और अल्जीरिया की यात्रा करेगा. इस डेलिगेशन में निशिकांत दुबे, फंगनन कोन्याक, रेखा शर्मा (सभी भाजपा), असदुद्दीन ओवैसी (एआईएमआईएम), गुलाम नबी आजाद, और हर्ष श्रृंगला (पूर्व विदेश सचिव) शामिल हैं.

रविशंकर प्रसाद के नेतृत्व में – यह डेलिगेशन यूनाइटेड किंगडम, फ्रांस, जर्मनी, यूरोपीय संघ, इटली और डेनमार्क का दौरा करेगा. इसमें दग्गुबत्ती पुरंदेश्वरी (भा.ज.पा.), प्रियंका चतुर्वेदी (एसएस-यूबीटी), गुलाम नबी खटाना (मनोनीत), अमर सिंह (कांग्रेस), समिक भट्टाचार्य (भा.ज.पा.), एमजे अकबर और पंकज सरन (पूर्व राजनयिक) शामिल हैं.

संजय झा के नेतृत्व में – यह डेलिगेशन इंडोनेशिया, मलेशिया, दक्षिण कोरिया, जापान और सिंगापुर की यात्रा करेगा. इसमें अपराजिता सारंगी (भा.ज.पा.), यूसुफ पठान (तृणमूल), बृज लाल (भा.ज.पा.), जॉन ब्रिटास (सीपीआई-एम), सलमान खुर्शीद और मोहन कुमार (पूर्व राजनयिक) शामिल हैं.

श्रीकांत शिंदे के नेतृत्व में – यह डेलिगेशन यूएई, लाइबेरिया, कांगो और सिएरा लियोन की यात्रा करेगा. इसमें बांसुरी स्वराज (भा.ज.पा.), ई.टी मोहम्मद बशीर (आईयूएमएल), अतुल गर्ग (भा.ज.पा.), एसएस अहलूवालिया और सुजान चिनॉय (पूर्व राजनयिक) शामिल हैं.

शशि थरूर के नेतृत्व में – यह डेलिगेशन अमेरिका, पनामा, गुयाना, कोलंबिया और ब्राजील की यात्रा करेगा. इसमें शांभवी चौधरी (एलजेपी-आरवी), सरफराज अहमद (जेएमएम), जीएम हरीश बालयोगी (टीडीपी), शशांक मणि त्रिपाठी (भा.ज.पा.), मिलिंद देवड़ा (शिवसेना), तेजस्वी सूर्या (भा.ज.पा.) और तरनजीत संधू (पूर्व राजनयिक) शामिल हैं.

कनिमोझी करुणानिधि के नेतृत्व में – यह डेलिगेशन स्पेन, ग्रीस, स्लोवेनिया, लातविया और रूस की यात्रा करेगा. इसमें राजीव राय (सपा), मियां अल्ताफ अहमद (एनसी), बृजेश चौटा (भा.ज.पा.), प्रेम चंद गुप्ता (राजद), अशोक कुमार मित्तल (आप), और मंजीव पुरी (पूर्व राजनयिक) शामिल हैं.

सुप्रिया सुले के नेतृत्व में – यह डेलिगेशन मिस्र, कतर, इथियोपिया और दक्षिण अफ्रीका की यात्रा करेगा। इसमें राजीव प्रताप रूडी (भा.ज.पा.), विक्रमजीत साहनी (आप), मनीष तिवारी (कांग्रेस), अनुराग ठाकुर (भा.ज.पा.), लावु श्रीकृष्ण देवरायलू (टीडीपी), और सैयद अकबरुद्दीन (पूर्व राजनयिक) शामिल हैं.

कांग्रेस का विवाद और आपत्ति

इस यात्रा को लेकर कांग्रेस में कुछ असंतोष देखने को मिला है. पार्टी ने आरोप लगाया है कि मोदी सरकार का यह कदम राजनीतिक लाभ लेने के लिए उठाया गया है. कांग्रेस के महासचिव जयराम रमेश ने कहा कि सरकार की नीयत पर सवाल उठते हैं, क्योंकि कांग्रेस के चार नेताओं को प्रतिनिधिमंडल में शामिल किया गया है, लेकिन उनमें से सिर्फ एक ही यात्रा में शामिल होगा.

भारत का वैश्विक आतंकवाद पर संदेश

इन सातों डेलिगेशनों का प्रमुख उद्देश्य पाकिस्तान द्वारा प्रायोजित आतंकवाद के खिलाफ वैश्विक समुदाय को जागरूक करना है. भारत अपनी विदेश नीति के तहत दुनिया को यह संदेश देना चाहता है कि आतंकवाद के खिलाफ सभी देशों को एकजुट होना चाहिए और इसे जड़ से उखाड़ने के लिए ठोस कदम उठाने चाहिए.