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क्या मोदी की एक कॉल रुकवा देगी जंग, भारत कैसे रोक सकता है अमेरिका-इजरायल-ईरान युद्ध?

अमेरिका-ईरान-इजरायल युद्ध के तीसरे सप्ताह में पहुंचने के बाद अब भारत शांति का मुख्य केंद्र बनकर उभरा है. फिनलैंड और यूएई जैसे देशों ने प्रधानमंत्री मोदी की मध्यस्थता पर गहरा भरोसा जताया है. भारत की तटस्थता और मजबूत अर्थव्यवस्था उसे आज सबसे विश्वसनीय विकल्प बनाती है.

Grok
Kanhaiya Kumar Jha

नई दिल्ली: जैसे-जैसे वैश्विक संघर्ष गहराता जा रहा है, पूरी दुनिया की निगाहें भारत और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पर टिकी हैं. अमेरिका-ईरान-इजरायल युद्ध के तीसरे सप्ताह में प्रवेश करने के बावजूद शांति का कोई ठोस रास्ता नहीं दिख रहा है. ऐसे में अंतरराष्ट्रीय मंचों पर यह मांग तेज हो गई है कि भारत अपनी सामरिक स्वायत्तता का उपयोग कर मध्यस्थ की भूमिका निभाए. फिनलैंड से लेकर यूएई तक के दिग्गजों का मानना है कि मोदी का प्रभाव इस विनाशकारी जंग को रोकने में सक्षम है.

फिनलैंड के राष्ट्रपति अलेक्जेंडर स्टब ने संघर्षविराम के लिए भारत की मदद मांगी है. उन्होंने विदेश मंत्री जयशंकर की शांति अपील का हवाला देते हुए भारत को एक अहम खिलाड़ी बताया. कर्नल डगलस मैकग्रेगर ने भी टकर कार्लसन के साथ बातचीत में माना कि मोदी दोनों पक्षों से सीधे जुड़े हुए हैं. यूएई के पूर्व दूत ने तो यहां तक कह दिया कि मोदी का केवल एक फोन कॉल ही इस युद्ध की दिशा बदल सकता है.

आर्थिक ताकत बना भारत का आधार 

भारत की बढ़ती आर्थिक शक्ति ने उसे वैश्विक कूटनीति के केंद्र में ला दिया है. कोविड के बाद जहां दुनिया आर्थिक मंदी से जूझ रही थी, वहीं भारत ने दिसंबर 2025 की तिमाही में 7.8 प्रतिशत की विकास दर हासिल की. आईएमएफ ने भी भारत को दुनिया की सबसे तेज बढ़ती अर्थव्यवस्था माना है. 2026 में वैश्विक जीडीपी वृद्धि में भारत का 17 प्रतिशत योगदान रहने की उम्मीद है, जो उसे एक प्रभावशाली शक्ति बनाता है.

इजरायल और ईरान से संतुलित रिश्ते 

भारत की सबसे बड़ी ताकत उसके सभी पक्षों के साथ मधुर और ऐतिहासिक संबंध हैं. इजरायल के साथ भारत की रक्षा साझेदारी अटूट है, जिसे मोदी की ऐतिहासिक यात्रा ने नई ऊंचाई दी है. वहीं, ईरान के साथ भी भारत के पुराने सांस्कृतिक रिश्ते बरकरार हैं. हाल ही में ईरानी नेता की मौत पर शोक जताना और उनके जहाज को कोच्चि में आश्रय देना यह दर्शाता है कि भारत संतुलन बनाने की कला में माहिर है.

सामरिक स्वायत्तता की ऐतिहासिक विरासत 

गुटनिरपेक्ष आंदोलन की नींव रखने वाले भारत ने आज अपनी 'सामरिक स्वायत्तता' को नया आयाम दिया है. भारत किसी एक खेमे में बंधने के बजाय स्वतंत्र फैसले लेता है. क्वाड का हिस्सा होने के बावजूद चीन भारत का बड़ा व्यापारिक साझेदार है और रूस से ऊर्जा संबंध भी बने हुए हैं. इसी स्वतंत्र नीति की वजह से भारत आज इजरायल और ईरान दोनों के साथ एक ही समय पर संवाद करने में पूरी तरह सक्षम है.

मध्यस्थता के लिए सबसे भरोसेमंद नाम 

चीन जैसे देश मध्यस्थता की पेशकश कर रहे हैं, लेकिन तेल और हथियारों की सप्लाई के कारण उन्हें पक्षपाती माना जाता है. यूरोप और अमेरिका अपनी कूटनीतिक सीमाओं में फंसे हैं. ऐसे में केवल भारत ही ऐसा देश है जो पूरी तरह स्वतंत्र और विश्वसनीय नजर आता है. वरिष्ठ वकील महेश जेठमलानी के अनुसार, भारत में अब वैश्विक संकटों को शांत करने की क्षमता है. दुनिया अब मोदी की एक निर्णायक पहल का इंतजार कर रही है.