दिल्ली में हुई INDIA गठबंधन की अहम बैठक: राहुल, अखिलेश और ममता रहे मौजूद, AAP और DMK ने बनाई दूरी
दिल्ली में आयोजित INDIA गठबंधन की अहम बैठक में विपक्षी दलों ने कई राष्ट्रीय मुद्दों पर चर्चा की. हालांकि डीएमके और आम आदमी पार्टी की गैरमौजूदगी ने गठबंधन के भीतर मौजूद राजनीतिक मतभेदों को भी सामने ला दिया.
लोकसभा चुनाव 2024 के बाद पहली बार विपक्षी गठबंधन INDIA के प्रमुख नेताओं ने दिल्ली में एक साझा मंच पर बैठक की. संविधान क्लब में हुई इस बैठक में कांग्रेस, तृणमूल कांग्रेस, समाजवादी पार्टी, राष्ट्रीय जनता दल और कई अन्य दलों के वरिष्ठ नेता शामिल हुए. बैठक ऐसे समय में हुई जब हालिया विधानसभा चुनावों के नतीजों ने विपक्ष के सामने नई चुनौतियां खड़ी कर दी हैं. इस दौरान कई राष्ट्रीय और राजनीतिक मुद्दों पर रणनीति बनाने को लेकर चर्चा की गई.
ममता की पहल पर जुटे विपक्षी दल
दिल्ली में हुई यह बैठक तृणमूल कांग्रेस प्रमुख ममता बनर्जी के आग्रह पर बुलाई गई थी. पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव में सत्ता गंवाने के बाद टीएमसी नए राजनीतिक समीकरणों पर विचार कर रही है. लंबे समय तक राज्य की सत्ता में रहने के बाद मिली हार ने पार्टी को आत्ममंथन के लिए मजबूर किया है. इसी पृष्ठभूमि में विपक्षी दलों को एक मंच पर लाने की कोशिश की गई. बैठक में मौजूद नेताओं ने गठबंधन की मजबूती और भविष्य की रणनीति पर विचार-विमर्श किया. इसके साथ ही विभिन्न राज्यों में बदलते राजनीतिक हालात पर भी चर्चा की गई.
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राष्ट्रीय मुद्दों पर केंद्रित रही चर्चा
बैठक की शुरुआत कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे के संबोधन से हुई. उन्होंने नेताओं का स्वागत करते हुए चर्चा का एजेंडा सामने रखा. बैठक में मतदाता सूची के विशेष पुनरीक्षण, महंगाई, बेरोजगारी, निजीकरण और पेपर लीक जैसे मुद्दों को प्रमुखता से उठाया गया. इसके अलावा विपक्षी दलों ने केंद्र सरकार पर जांच एजेंसियों के कथित दुरुपयोग और गैर-बीजेपी शासित राज्यों के साथ भेदभाव के आरोपों पर भी चर्चा की. विदेश नीति को लेकर भी कई नेताओं ने अपनी राय रखी और राष्ट्रीय स्तर पर साझा राजनीतिक रुख तैयार करने पर जोर दिया.
23 दलों की मौजूदगी ने दिखाई ताकत
इस बैठक में INDIA गठबंधन से जुड़े 23 राजनीतिक दलों ने भाग लिया. कांग्रेस की ओर से सोनिया गांधी, राहुल गांधी और मल्लिकार्जुन खरगे मौजूद रहे. वहीं तृणमूल कांग्रेस की ममता बनर्जी, समाजवादी पार्टी के अखिलेश यादव, राष्ट्रीय जनता दल के तेजस्वी यादव, नेशनल कॉन्फ्रेंस के उमर अब्दुल्ला और पीडीपी प्रमुख महबूबा मुफ्ती भी शामिल हुईं. वामपंथी दलों के नेताओं ने भी बैठक में भाग लिया. शिवसेना (UBT) प्रमुख उद्धव ठाकरे ने वर्चुअल माध्यम से अपनी उपस्थिति दर्ज कराई. नेताओं ने संयुक्त प्रेस कॉन्फ्रेंस के जरिए बैठक के संदेश को जनता तक पहुंचाने की कोशिश की.
गैरहाजिर सहयोगियों ने बढ़ाए सवाल
जहां कई दलों की मौजूदगी ने विपक्षी एकता का संदेश दिया, वहीं कुछ प्रमुख सहयोगियों की गैरमौजूदगी चर्चा का विषय बनी रही. डीएमके ने पहले ही बैठक से दूरी बनाने की घोषणा कर दी थी. पार्टी ने कांग्रेस के साथ अपने मतभेदों को इसका कारण बताया. तमिलनाडु चुनावों के बाद बदले राजनीतिक समीकरणों ने दोनों दलों के रिश्तों में तनाव पैदा किया है. दूसरी ओर आम आदमी पार्टी भी इस बैठक में शामिल नहीं हुई. बैठक से पहले राहुल गांधी को निशाना बनाते हुए लगाए गए पोस्टरों ने भी राजनीतिक माहौल को गर्म रखा. इन घटनाओं ने यह संकेत दिया कि विपक्षी गठबंधन के सामने एकजुटता बनाए रखना अभी भी बड़ी चुनौती बना हुआ है.