'हिंदी ने कई भाषाओं को निगल लिया', उदयनिधि स्टालिन का बड़ा बयान, चुनाव से पहले भाषा विवाद तेज
तीन महीने बाद होने वाले विधानसभा चुनाव से पहले भाषा और तमिल पहचान एक बार फिर बड़ा राजनीतिक मुद्दा बन गई है. जहां डीएमके दो भाषा नीति पर अडिग है, वहीं बीजेपी इसे हिंदी थोपना मानने से इनकार कर रही है.
तमिलनाडु के उपमुख्यमंत्री उदयनिधि स्टालिन ने हिंदी थोपे जाने के मुद्दे पर केंद्र सरकार और तीन भाषा नीति पर कड़ा हमला बोला है. भाषा शहीद दिवस के मौके पर बोलते हुए उन्होंने कहा कि हिंदी ने देश की कई क्षेत्रीय मातृभाषाओं को धीरे-धीरे खत्म कर दिया है. उन्होंने 1960 के दशक में हुए हिंदी विरोधी आंदोलन में जान गंवाने वालों को श्रद्धांजलि भी दी.
उत्तर भारत में पीछे छूटीं स्थानीय भाषाएं
उदयनिधि स्टालिन ने कहा कि हरियाणा, बिहार, उत्तर प्रदेश और छत्तीसगढ़ जैसे राज्यों में हिंदी के बढ़ते प्रभाव के कारण वहां की स्थानीय भाषाएं पीछे छूट गई हैं. उनके मुताबिक हरियाणवी, भोजपुरी, बिहारी और छत्तीसगढ़ी जैसी भाषाएं अब लोगों की रोजमर्रा की मातृभाषा नहीं रहीं. उन्होंने आरोप लगाया कि हिंदी का दबदबा क्षेत्रीय पहचान और संस्कृति को नुकसान पहुंचा रहा है.
तीन भाषा नीति पर सवाल
उपमुख्यमंत्री ने तीन भाषा नीति को “हिंदी थोपने का तरीका” बताया. उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री एम.के. स्टालिन और डीएमके पार्टी का विरोध किसी भाषा के खिलाफ नहीं, बल्कि तमिल भाषा और संस्कृति की रक्षा के लिए है. उन्होंने दो भाषा नीति- तमिल और अंग्रेजी को तमिलनाडु के विकास का मजबूत आधार बताया.
एमके स्टालिन का केंद्र पर आरोप
इसी कार्यक्रम में मुख्यमंत्री एमके स्टालिन ने केंद्र सरकार पर “सांस्कृतिक हस्तक्षेप” का आरोप लगाया. उन्होंने कहा कि राष्ट्रीय शिक्षा नीति के जरिए स्कूलों और कॉलेजों में हिंदी को लागू करने की कोशिश हो रही है. स्टालिन ने यह भी कहा कि तीन भाषा नीति न मानने पर केंद्र द्वारा हजारों करोड़ रुपये की फंडिंग रोकी गई है.
फंडिंग पर भी सख्त रुख
मुख्यमंत्री ने साफ कहा कि चाहे 3,000 करोड़ हों या 10,000 करोड़, तमिलनाडु तीन भाषा नीति स्वीकार नहीं करेगा. उन्होंने इसे आत्मसम्मान और पहचान का सवाल बताया.
चुनाव से पहले गरमाई सियासत
तीन महीने बाद होने वाले विधानसभा चुनाव से पहले भाषा और तमिल पहचान एक बार फिर बड़ा राजनीतिक मुद्दा बन गई है. जहां डीएमके दो भाषा नीति पर अडिग है, वहीं बीजेपी इसे हिंदी थोपना मानने से इनकार कर रही है. कुल मिलाकर, तमिलनाडु की राजनीति में भाषा का मुद्दा फिर केंद्र में आ गया है.