35,000 फीट पर उड़ान और 278 KM/H की रफ्तार, इजरायली हथियार से चीन-पाक के होश उड़ाने को तैयार भारत

भारत ने अपनी निगरानी और सामरिक क्षमताओं को बढ़ाने के लिए इजरायल के हेरॉन MK-II ड्रोन की नई खरीद प्रक्रिया शुरू की है. तीनों सेनाओं ने मंजूरी दी है, और HAL व एल्कॉम के साथ मिलकर इसका भारतीय संस्करण तैयार करने पर ध्यान केंद्रित किया जा रहा है.

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Kanhaiya Kumar Jha

नई दिल्ली: भारत ने अपनी निगरानी और सामरिक क्षमताओं को और मजबूत करने के लिए इजरायल के उन्नत हेरॉन MK-II ड्रोन की नई खरीद प्रक्रिया शुरू कर दी है. ऑपरेशन सिंदूर के बाद लागू आपातकालीन प्रावधानों के तहत की जा रही इस पहल का उद्देश्य निगरानी क्षमता बढ़ाने के साथ-साथ इन हाई-टेक ड्रोन के स्थानीय उत्पादन की दिशा में आगे बढ़ना है.

सूत्रों के अनुसार तीनों सेनाओं ने इस ड्रोन की खरीद को मंजूरी दी है. हालांकि, खरीदी जाने वाली संख्या का खुलासा नहीं किया गया है. फिलहाल फोकस हिंदुस्तान एयरोनॉटिक्स लिमिटेड (HAL) और एल्कॉम कंपनी के साथ साझेदारी में ड्रोन के भारत में निर्माण की संभावनाओं पर है.

हाई-टेक फीचर्स से लैस है हेरॉन MK-II

इजरायल एयरोस्पेस इंडस्ट्रीज (IAI) द्वारा विकसित हेरॉन MK-II एक मध्यम ऊंचाई, लंबी अवधि (MALE) वाला मानवरहित हवाई वाहन (UAV) है. इसकी प्रमुख विशेषताएं:-

  • अधिकतम टेक-ऑफ वजन: 1430 किलोग्राम
  • फ्लाइट एंड्योरेंस: 45 घंटे तक लगातार उड़ान
  • सर्विस सीलिंग: 35,000 फीट
  • अधिकतम गति: 150 नॉट्स (लगभग 278 किमी/घंटा)

लंबी दूरी की निगरानी, सीमाओं पर वास्तविक समय की जानकारी और खतरे के प्रति त्वरित प्रतिक्रिया इसकी मुख्य ताकत हैं.

भारतीय वर्जन तैयार करने का लक्ष्य

IAI के एक वरिष्ठ अधिकारी ने कहा कि कंपनी मेक इन इंडिया के प्रति पूरी तरह प्रतिबद्ध है और भारतीय साझेदारों के साथ मिलकर एक भारतीय हेरॉन वर्जन तैयार करने की दिशा में काम किया जा रहा है. इसके लिए HAL और एल्कॉम दोनों प्राथमिक साझेदार हैं.

भविष्य की UAV परियोजनाओं में कम से कम 60% स्थानीय सामग्री सुनिश्चित करने का लक्ष्य भी तय किया गया है, ताकि आने वाले समय में अधिकतम रक्षा प्लेटफॉर्म भारत में ही निर्मित किए जा सकें.

पहली खरीद 2021 में, LAC तनाव ने बढ़ाई जरूरत

चीन के साथ LAC पर बढ़ते तनाव के बीच भारत ने 2021 में आपातकालीन अधिकारों के तहत हेरॉन MK-II ड्रोन की पहली खरीद की थी. तब चार यूनिट हासिल किए गए थे, दो थल सेना के लिए और दो वायु सेना के लिए. ये ड्रोन वर्तमान में भारत की चीन और पाकिस्तान दोनों सीमाओं पर निगरानी के लिए तैनात हैं, जहां वे घुसपैठ की हर गतिविधि पर रियल-टाइम नजर रखते हैं.

निगरानी क्षमता में बड़ा बदलाव

स्थानीय उत्पादन की ओर बढ़ता यह कदम भारत की रक्षा तकनीक को नई दिशा दे सकता है. यदि समझौते पर मुहर लगती है, तो भारत न सिर्फ हेरॉन MK-II का उपयोगकर्ता होगा बल्कि इसके निर्माण का केंद्र भी बन सकता है, जो भविष्य के बड़े UAV कार्यक्रमों के लिए बेहद अहम साबित होगा.