इंटरनेट सस्पेंड, चप्पे-चप्पे पर पुलिस तैनात, कौन थे बहादुर चंद वकील जिनकी रस्म पगड़ी पर सुलग सकता है हरियाणा?
हरियाणा के सिरसा में इंटरनेट सेवाएं अस्थाई तौर पर रोक दी गई हैं. धार्मिक नेता बाहदुर चंद वकील की मौत को लेकर उनके समर्थक भड़के हुए हैं. वे जांच चाहते हैं कि आखिर किन परिस्थितियों में उनकी जान गई है. बहादुर चंद वकील, डेरा जगमालवाली के प्रमुख थे. अब समर्थ चाह रहे हैं कि उनके मौत की वजह स्पष्ट हो. क्या है ये पूरा मामला, आइए समझते हैं.
हरियाणा के सिरसा जिले में डेरा जगमालवाली के संत बहादुर चंद वकील की रस्म पगड़ी पर हिंसा होने की आशंका है. सिरसा पुलिस ने हिंसा की आशंका के मद्देनजर चप्पे-चप्पे पर रैपिड एक्शन फोर्स के जवानों को तैनात किया है. बुधवार शाम से ही इस जिले में इंटरनेट बैन कर दिया गया है. डेराजगमालवाली के आसपास का इलका अब छावनी जैसा नजर आ रहा है. फतेहाबाद और हिसार से भी पुलिस फोर्स बुलाई गई है.
पंजाब, हरियाणा, दिल्ली और राजस्थान जैसी जगहों में इस संत के हजारों भक्त रहते हैं, जो सिरसा पहुंचने वाले हैं. सिरसा प्रशासन की मानें तो ऐसा हो सकता है कि डेरा की गद्दी को लेकर दो पक्षों में भिंडत हो जाए. अगर ऐसा हुआ तो सिरसा जिले में भीषण हिंसा भड़कने की आशंका है. अफवाहों पर एक्शन लेने के लिए ही इंटरनेट बैन किया गया है.
हंगामा क्यों बरपा है?
जगमालवाली डेरा के मुखिया थे चंद बाहदुर वकील. उनकी 1 अगस्त को मौत हो गई थी. डेरा की गद्दी को लेकर उनके चेलों में भिडंत हो गई. उनका अंतिम संस्कार 2 अगस्त को हुआ. अब 8 अगस्त को उनकी अंतिम अरदास होने वाली है. इसी अरदास में हंगामा भड़कने के आसार हैं. उनके अंतिम संस्कार के दिन तो गोलीबारी तक हो गई थी. हंगामा इतना भड़का था कि पुलिस को लाठी चार्ज करनी पड़ी थी.
कौन है 'गद्दी' का असली वारिस?
डेरा प्रमुख की गद्दी को लेकर दो दो गुट भिड़ गए हैं. मुख्य सेवादार विरेंदर सिंह ने कथित तौरपर अपने हक में वसीयत करा लिया है. उनका एक वीडियो भी सोशल मीडिया पर वायरल हो रहा है. दूसरे पक्ष के कई दावेदार हैं. उनका कहना है कि विरेंदर सिंह गद्दी के सही हकदार नहीं हैं. 1 अगस्त से लेकर अब तक, कई बार पंचायत हो चुकी है लेकिन बात नहीं बनी है. एक गुट मांग कर रहा है कि गुरप्रीत सिंह को गद्दी को मिले. वहीं डेरा प्रमुख रहे वकील के भतीजे अमर सिंह भी दावेदारी मांग रहे हैं.
मौत पर क्यों बरपा है हंगामा?
सूफी गायक विरेंद्र सिंह ने खुद को उत्तराधिकारी बताया तो विरोध में अमर सिंह खड़े हो गए. उन्होंने कहा कि उन्होंने ही धर्मगुरु की हत्या की साजिश रची है. विरेंद्र ने यह भी कहा है कि जब तक डेरा प्रमुख की मौत की जांच नहीं हो जाती है, वे प्रमुख का पद नहीं संभालेंगे. विरेंद्र ,सिंह पर उनकी मौत की साजिश रचने के आरोप लगे हैं. डेरा प्रमुख को कैंसर था, जिसका इलाज 2022 से चल रहा था.
विरेंदर सिंह का दावा है कि गोरीवाला गांव के खुशपुर धाम डेरा का मुखिया चांद महात्मा उन्हें बदनाम करना चाहता है. वह वकील साहब से अदावत रखता था. अपोलो हॉस्पिटल के डॉ. संदीप गुलेरिया ने दावा किया है कि दिल्ली AIIMS और मैक्स अस्पताल के डॉक्टर भी उन्हें देख रहे थे. 2010 से ही उनका इलाज चल रहा था. साल 2022 में ज्यादा बीमार पड़ गए.
डॉक्टर गुलेरिया ने कहा है कि उन्हें यूरीन और गालब्लैडर का कैंसर था, जो बढ़ता गया. डॉक्टरों ने बचाने की कोशिश की लेकिन 1 अगस्त को मौत हो गई. उनका फेफड़ा भी डैमेज हो गया था.
कौन थे बहादुर चंद वकील?
बहादुर चंद वकील डेरा जगमालवाली में साल 1968 में आए थे. वे यहां के प्रमुख 9 अगस्त 1998 को बने. अमर गुट की मांग है कि उनके मौत की CBI जांच हो. अमर सिंह का कहना है कि विरेंदर, बालकौर सिंह, लहरी, नंद लाल गोवर और कुछ अन्य लोगों ने जल्दबाजी में उनके अंतिम संस्कार की तैयारी की. बेहद जल्दबाजी में यह हुआ है, यहीं साजिश की आशंका है. अमर का कहना है कि चंद वकील को सही इलाज नहीं मिला है. अब उन्होंने मांग की है कि प्रशासन को इसकी छानबीन करनी चाहिए.