बंदूक का लाइसेंस लेने की व्यवस्था में हुआ बड़ा बदलाव, अब इस तरीके से करना होगा आवेदन
भारत सरकार ने गन लाइसेंस की प्रक्रिया में बड़ा बदलाव किया है. अब नया लाइसेंस, रिन्यूअल और ट्रांसफर केवल ऑनलाइन होंगे. इससे व्यवस्था अधिक पारदर्शी बनेगी और रिकॉर्ड डिजिटल रूप में सुरक्षित रहेगा.
भारत में हथियार लाइसेंस से जुड़ी प्रक्रिया को सरल और पारदर्शी बनाने के लिए केंद्र सरकार ने नई व्यवस्था लागू की है. गृह मंत्रालय ने गन लाइसेंस से संबंधित पूरी प्रक्रिया को ऑनलाइन कर दिया है. अब नए लाइसेंस के लिए आवेदन, पुराने लाइसेंस का नवीनीकरण और हथियार के ट्रांसफर जैसी सभी प्रक्रियाएं डिजिटल प्लेटफॉर्म पर पूरी होंगी. सरकार का कहना है कि इस बदलाव से रिकॉर्ड सुरक्षित रहेगा और आवेदन की जांच भी पहले से अधिक व्यवस्थित और तेज तरीके से हो सकेगी.
ऑनलाइन पोर्टल से करना होगा आवेदन
नई व्यवस्था के तहत अब गन लाइसेंस से जुड़ी सभी सेवाएं केवल ऑनलाइन माध्यम से उपलब्ध होंगी. इच्छुक आवेदक भारत सरकार के आधिकारिक पोर्टल पर अपनी आईडी बनाकर आवेदन कर सकते हैं. इसके अलावा एमपी ऑनलाइन जैसे सेवा केंद्रों के जरिए भी यह प्रक्रिया पूरी की जा सकती है. सरकार ने साफ किया है कि अब ऑफलाइन आवेदन स्वीकार नहीं किए जाएंगे. इसका उद्देश्य प्रक्रिया को आसान बनाना और हर आवेदन का डिजिटल रिकॉर्ड तैयार करना है.
शस्त्रों का रिकॉर्ड भी होगा डिजिटल
जिले में मौजूद हजारों शस्त्र लाइसेंस का रिकॉर्ड अभी तक कागजी रजिस्टरों में रखा जाता था. इससे कई बार जानकारी ढूंढना मुश्किल हो जाता था. नई व्यवस्था के तहत सभी लाइसेंस और हथियारों की जानकारी डिजिटल पोर्टल पर अपलोड की जा रही है. इससे यह पता लगाना आसान होगा कि किसी लाइसेंसधारी ने कब हथियार खरीदा, कितने कारतूस लिए और उसका पूरा विवरण क्या है.
जांच प्रक्रिया पहले से ज्यादा सख्त
नए लाइसेंस के लिए आवेदन करने के बाद पुलिस और प्रशासनिक अधिकारियों को इसकी जानकारी भेजी जाएगी. इसके बाद एक टीम आवेदक के घर पहुंचकर पते का सत्यापन करेगी. आसपास रहने वाले लोगों से भी जानकारी ली जाएगी. जांच पूरी होने के बाद पुलिस अपनी रिपोर्ट ऑनलाइन अपलोड करेगी, जिसके आधार पर अंतिम फैसला जिला कलेक्टर द्वारा लिया जाएगा.
पारदर्शिता बढ़ाने की कोशिश
सरकार का मानना है कि डिजिटल सिस्टम लागू होने से कई पुरानी समस्याएं खत्म हो जाएंगी. पहले फाइलें खो जाने, जानकारी अधूरी होने या प्रक्रिया में देरी जैसी परेशानियां सामने आती थीं. अब ऑनलाइन रिकॉर्ड बनने से पूरी व्यवस्था अधिक पारदर्शी और व्यवस्थित हो सकेगी. हालांकि अभी भी कई पुराने लाइसेंस और हथियारों की जानकारी पोर्टल पर अपलोड की जानी बाकी है, जिस पर काम जारी है.