EU-US ट्रेड डील के बाद भारत के लिए एक और खुशखबरी, सऊदी अरब समेत कई खाड़ी देश व्यापार समझौते पर बातचीत के लिए तैयार
भारत अपने व्यापार नीति को लेकर काफी सतर्क है. यूरोप और अमेरिका के साथ डील तय करने के बाद अब गल्फ देशों के साथ डील करने के लिए तैयार है.
नई दिल्ली: अमेरिकी टैरिफ झटके के बाद से भारत अपने व्यापार नीति को लेकर काफी सतर्क है. हाल में ही यूरोपीय संघ के22 देशों के साथ भारत ने फ्री ट्रेड एग्रीमेंट को फाइनल किया. अब केंद्रीय मंत्री पीयूष गोयल ने गुरुवार को कहा कि भारत और छह देशों वाले गल्फ को ऑपरेशन काउंसिल ने फ्री ट्रेड एग्रीमेंट के लिए बातचीत शुरू करने की शर्तों पर सहमति जताई है.
भारत अभी कुछ दिनों पहले अमेरिका के साथ भी अपने व्यापार डील को फाइनल कर लिया है. इसके बाद अब गल्फ देशों के साथ भी अपने डील करने के लिए तैयार है. UAE और सऊदी अरब के अलावा, कतर, कुवैत, बहरीन और ओमान GCC का हिस्सा हैं.
भारत और GCC के बीच समझौता
गोयल ने यह घोषणा तब की जब भारत और खाड़ी देशों के ब्लॉक ने टर्म्स ऑफ रेफरेंस पर साइन किया. गोयल ने कहा कि यह मजबूत ट्रेडिंग व्यवस्था सामान और सेवाओं के ज्यादा फ्री फ्लो को संभव बनाएगी. इस डील से ज्यादा निवेश को बढ़ावा मिलेगा. गोयल ने यह भी कहा कि GCC के साथ इस पैक्ट के फाइनल होने से भारत को एनर्जी सोर्स के डायवर्सिफिकेशन में मदद मिलेगा. इसके अलावा गल्फ देशों के साथ भारत के आर्थिक संबंध सुधरेंगे. भारत और GCC के बीच यह समझौता UAE के राष्ट्रपति शेख मोहम्मद बिन जायद अल नाहयान की भारत यात्रा के कुछ हफ्ते बाद ही हुआ है. इस यात्रा के दौरान UAE के राष्ट्रपति केवल तीन घंटे के लिए भारत में रुके थे. इतने कम देर में ही उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से मुलाकात की थी. भारत और GCC के बीच यह ट्रेड वार्ता 2006 और 2008 में शुरू हुई थी.
इन देशों का साथ पहले ही समझौता
भारत और UAE के 2022 से ही फ्री ट्रेड पैक्ट लागू है. वहीं ओमान ने 2025 में मस्कट में एक CEPA पर भी साइन किया है. सऊदी अरब के पाकिस्तान के साथ करीबी संबंधों को देखते हुए, भारत और GCC के बीच टर्म्स ऑफ़ रेफरेंस पर साइन करना एक बड़ा घटनाक्रम है. क्योंकि पाकिस्तान और सऊदीने 2025 में एक स्ट्रेटेजिक म्यूचुअल डिफेंस एग्रीमेंट पर साइन किया था, जिससे भारत के लिए संभावित प्रभावों और इसकी क्षेत्रीय सुरक्षा गतिशीलता पर असर पड़ने की चिंताएं पैदा हुईं थी. समझौते में कहा गया था कि किसी भी देश के खिलाफ कोई भी हमला दोनों देशों के खिलाफ हमला माना जाएगा.