चीनी की बढ़ती कीमतों पर सरकार सख्त, जमाखोरी रोकने के लिए बदले नियम

चीनी की बढ़ती कीमतों के बीच सरकार ने जमाखोरी रोकने के लिए कच्ची चीनी के आयात नियम सख्त कर दिए हैं. अब आयातित कच्ची चीनी को दो महीने के भीतर रिफाइंड कर घरेलू बाजार में बेचना होगा.

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Km Jaya

नई दिल्ली: भारत में चीनी की बढ़ती कीमतों के बीच सरकार ने जमाखोरी और कालाबाजारी रोकने के लिए कड़े कदम उठाए हैं. वाणिज्य एवं उद्योग मंत्रालय ने कच्ची चीनी के आयात से जुड़े नियमों में बदलाव किया है. नए नियमों के तहत आयात की गई कच्ची चीनी को दो महीने के भीतर रिफाइंड चीनी में बदलना होगा और रिफाइंड चीनी को भी इसी अवधि में घरेलू बाजार में बेचने की शर्त रखी गई है.

सरकार का उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि आयातित चीनी लंबे समय तक गोदामों में जमा न रहे और तेजी से घरेलू बाजार तक पहुंचे. इससे बाजार में चीनी की उपलब्धता बढ़ाने और कीमतों पर नियंत्रण रखने में मदद मिलने की उम्मीद है.

पहले क्या था नियम?

पहले आयातित कच्ची चीनी को उचित समय सीमा में प्रोसेस करने की शर्त थी और इसे 31 अक्टूबर तक घरेलू बाजार में बिक्री के लिए उपलब्ध कराने की व्यवस्था थी. अब सरकार ने इस प्रक्रिया के लिए स्पष्ट रूप से दो महीने की समय सीमा तय कर दी है.


सरकार ने इससे पहले 31 अक्टूबर तक 10 लाख टन चीनी आयात की अनुमति दी थी. इसके साथ व्यापारियों और सॉफ्ट ड्रिंक तथा आइसक्रीम जैसे उत्पाद बनाने वाले बड़े उपभोक्ताओं के लिए स्टॉक रखने की सीमा भी तय की गई थी. राज्यों को जमाखोरी और कालाबाजारी के खिलाफ कार्रवाई करने के निर्देश दिए गए हैं.

सरकार ने मई में घरेलू कीमतों को स्थिर करने के लिए कच्ची, सफेद और रिफाइंड चीनी के निर्यात पर भी 30 सितंबर तक रोक लगाई थी.

एक महीने में 29 फीसदी बढ़े दाम

सरकारी आंकड़ों के मुताबिक सोमवार को देश में चीनी की औसत खुदरा कीमत 63.05 रुपये प्रति किलो रही. एक महीने पहले यह कीमत 48.73 रुपये प्रति किलो थी. यानी एक महीने में चीनी के औसत खुदरा दाम करीब 29 फीसदी बढ़ गए हैं. चीनी की अधिकतम खुदरा कीमत 75 रुपये प्रति किलो और मॉडल कीमत 65 रुपये प्रति किलो बताई गई.

खाद्य सचिव संजीव चोपड़ा के अनुसार एक्स मिल चीनी की कीमत भी महज सात से दस दिनों में 47 से 48 रुपये प्रति किलो से बढ़कर 62 रुपये प्रति किलो हो गई. उन्होंने इस तेजी को अनुचित बताया.

सरकार का क्या है कहना?

इंडियन शुगर एंड बायो एनर्जी मैन्युफैक्चरर्स एसोसिएशन ने कहा कि देश में चीनी की कमी नहीं है और सरकार के कदमों के बाद खुदरा कीमतों में गिरावट आने की उम्मीद है. संगठन के अनुसार 2025-26 मार्केटिंग वर्ष में एथेनॉल के लिए चीनी के डायवर्जन के बाद शुद्ध उत्पादन करीब 279 लाख टन रहने का अनुमान है. शुरुआती स्टॉक करीब 50 लाख टन था, जबकि घरेलू मांग 280 से 285 लाख टन रहने का अनुमान है.

खाद्य सचिव ने बताया कि 2025-26 में चीनी उत्पादन का अनुमान अब 306 लाख टन किया गया है, जो पहले 343 लाख टन था. उत्पादन अनुमान में कमी का मुख्य कारण गन्ने की फसल पर कीटों का हमला और अधिक बारिश के कारण जलभराव बताया गया है.