भारतीय पासपोर्ट धारकों को बड़ी राहत: जर्मनी ने ट्रांजिट वीजा से दी छूट

अब भारतीय नागरिक किसी तीसरे देश की यात्रा के दौरान जर्मनी के एयरपोर्ट से गुजरते समय अलग से ट्रांजिट वीजा नहीं लेना होगा.

@narendramodi
Sagar Bhardwaj

जर्मनी ने भारतीय पासपोर्ट धारकों को बड़ी सुविधा देते हुए ट्रांजिट वीजा से छूट देने का ऐलान किया है. इसका मतलब यह है कि अब भारतीय नागरिक किसी तीसरे देश की यात्रा के दौरान जर्मनी के एयरपोर्ट से गुजरते समय अलग से ट्रांजिट वीजा नहीं लेना होगा. इससे अंतरराष्ट्रीय यात्रा पहले के मुकाबले ज्यादा आसान, तेज और कम कागजी प्रक्रिया वाली हो जाएगी.

संयुक्त बयान में हुआ ऐलान

इस फैसले की जानकारी भारत-जर्मनी संयुक्त बयान में दी गई, जो जर्मनी के चांसलर फ्रेडरिक मर्ज की भारत यात्रा के बाद जारी हुआ. यह उनकी भारत की पहली और एशिया की भी पहली आधिकारिक यात्रा थी. दोनों देशों ने इसे आपसी संबंधों को मजबूत करने की दिशा में एक अहम कदम बताया.

प्रधानमंत्री मोदी ने जताया आभार

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने इस फैसले के लिए जर्मनी के चांसलर का धन्यवाद किया. संयुक्त बयान में कहा गया कि यह कदम न केवल भारतीय नागरिकों की यात्रा को आसान बनाएगा, बल्कि दोनों देशों के लोगों के बीच आपसी संपर्क और भरोसे को भी बढ़ाएगा.

लोगों से लोगों के रिश्तों पर जोर

भारत और जर्मनी दोनों ने माना कि मजबूत ‘पीपल-टू-पीपल’ संबंध उनकी रणनीतिक साझेदारी की नींव हैं. नेताओं ने छात्रों, शोधकर्ताओं, कुशल पेशेवरों, कलाकारों और पर्यटकों के बढ़ते आदान-प्रदान का स्वागत किया. साथ ही यह भी स्वीकार किया कि जर्मनी की अर्थव्यवस्था, तकनीक और सांस्कृतिक जीवन में भारतीय समुदाय का योगदान काफी अहम है.

शिक्षा और कौशल पर विशेष ध्यान

बैठक में शिक्षा और कौशल विकास को खास महत्व दिया गया. जर्मनी में पढ़ने वाले भारतीय छात्रों की संख्या लगातार बढ़ रही है. दोनों देशों ने संयुक्त और दोहरे डिग्री कार्यक्रमों के विस्तार, विश्वविद्यालयों के बीच सहयोग और तकनीकी शिक्षा पर साथ काम करने पर सहमति जताई.

नौकरी के अवसर और नई पहल

जर्मनी में पढ़ाई पूरी करने के बाद भारतीय छात्रों को वहां के जॉब मार्केट से जोड़ने के लिए नई पहलों का स्वागत किया गया. साथ ही भारतीय आईआईटी और जर्मनी की तकनीकी यूनिवर्सिटियों के बीच संस्थागत सहयोग बढ़ाने पर भी जोर दिया गया.

भारत में जर्मन विश्वविद्यालयों का न्योता

प्रधानमंत्री मोदी ने जर्मनी के प्रमुख विश्वविद्यालयों को भारत में अपने कैंपस खोलने का आमंत्रण दिया. इसके साथ ही दोनों देशों ने उच्च शिक्षा के लिए एक व्यापक भारत-जर्मनी रोडमैप तैयार करने पर भी सहमति जताई.