गगनयान के हीरो शुभांशु शुक्ला को अशोक चक्र, अंतरिक्ष की ऊंचाइयों के बाद अब वीरता का सर्वोच्च सम्मान मिला
गणतंत्र दिवस 2026 के अवसर पर भारतीय अंतरिक्ष यात्री विन्ग कमांडर शुभांशु शुक्ला को शांति काल के सर्वोच्च वीरता पुरस्कार अशोक चक्र से सम्मानित किया गया है.
नई दिल्लीः गणतंत्र दिवस 2026 के अवसर पर भारतीय अंतरिक्ष यात्री विन्ग कमांडर शुभांशु शुक्ला को शांति काल के सर्वोच्च वीरता पुरस्कार अशोक चक्र से सम्मानित किया गया है. यह पहली बार है जब किसी अंतरिक्ष यात्री को इस श्रेणी के सर्वोच्च वीरता पदक से सम्मानित किया गया है. शुभांशु शुक्ला का चयन उनके असाधारण साहस और पेशेवर निपुणता के लिए किया गया है. उन्होंने भारत के पहले मानव अंतरिक्ष मिशन गगनयान और अंतरराष्ट्रीय अंतरिक्ष स्टेशन (ISS) से जुड़े मिशनों के दौरान दिखाया.
तकनीकी चुनौतियों का सामना
रूस में कड़े प्रशिक्षण और नावी-एक्स (Axiom-4) मिशन के लिए चुने जाने के दौरान उन्होंने जटिल तकनीकी चुनौतियों का सामना किया. मिशन के दौरान उत्पन्न हुई कुछ विषम परिस्थितियों में शुभांशु ने अपनी सूझबूझ और जांबाजी से मिशन की सफलता सुनिश्चित की, जो एक वीरता के कार्य के समान है.
कौन हैं शुभांशु शुक्ला?
शुभांशु उत्तर प्रदेश के लखनऊ के रहने वाले हैं. वह भारतीय वायु सेना (IAF) में विन्ग कमांडर के पद पर तैनात शुभांशु एक अनुभवी टेस्ट पायलट हैं. भारत के उन चुनिंदा गगनयात्रियों में से एक हैं जिन्हें प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने व्यक्तिगत रूप से 'एस्ट्रोनॉट विंग्स' प्रदान किए थे.
एक नया इतिहास रचा
आमतौर पर अशोक चक्र सैन्य अभियानों या आतंकवाद विरोधी अभियानों में दिखाए गए साहस के लिए दिया जाता है. वहीं शुभांशु शुक्ला को यह सम्मान मिलना इस बात का संकेत है कि अंतरिक्ष अब भारत का नया मोर्चा है और वहां जोखिम उठाकर देश का नाम रोशन करना भी परम वीरता की श्रेणी में आता है.
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