T20 World Cup 2026

काशी में 22 जनवरी को मुफ्त में कर सकेंगे गंगा की लहरों पर सवारी, जानें क्या है 84 घाटों के नाविकों का फैसला

Free Boat Tour in Varanasi: राम लला के प्राण प्रतिष्ठा को लेकर देश के अलग अलग हिस्सों में भी तैयारियां चल रही है. इसी बीच 22 जनवरी को कुछ खास करने के लिए वाराणसी के नाविकों ने एक बड़ा ऐलान किया है.

Purushottam Kumar

Free Boat Tour in Varanasi: अयोध्या में 22 जनवरी को रामलाल का प्राण प्रतिष्ठा होना है. प्रभु श्रीराम के प्राण प्रतिष्ठा को लेकर अयोध्या में तैयारियां अब अंतिम चरण में है. राम लला के प्राण प्रतिष्ठा को लेकर देश के अलग अलग हिस्सों में भी तैयारियां चल रही है. इसी बीच 22 जनवरी को कुछ खास करने के लिए वाराणसी के नाविकों ने एक बड़ा ऐलान किया है. जानकारी के अनुसार 84 घाटों के नाविकों ने 22 जनवरी को रामलला की प्राण प्रतिष्ठा वाले मुफ्त नौकायन का फैसला लिया है.

प्राण प्रतिष्ठा को उल्लास से मनाएगा नाविक समाज

रामलला की प्राण प्रतिष्ठा के दिन नाविक समाज की ओर से शोभायात्रा निकालने का फैसला लिया गया है. इसके साथ साथ नाविकों ने इस दिन मुफ्त नौकायन कराने का भी फैसला लिया है. दशाश्वमेध घाट पर सभी 84 घाटों के नाविकों ने एक बैठक की और फिर इन फैसलों पर सभी ने अपनी सहमति जताई. मां गंगा निषाद राज सेवा न्यास के अध्यक्ष प्रमोद मांझी ने कहा कि 22 जनवरी को पूरे दिन निशुल्क नौका संचालन होगा. लोग अस्सी से राजघाट या फिर गंगा उस पार बिना कोई शुल्क दिए आ-जा सकते हैं.

84 के नाविकों की बैठक में ये भी तय हुआ कि निषाद समाज 22 जनवरी को ही दोपहर 12 बजे राजघाट से अस्सी घाट तक शोभायात्रा निकालेगा. इसमें 500 से अधिक नावे शामिल होंगी. सबसे पहले भगवान राम के बाल स्वरूप के चरण धोकर नाव में विराजमान कराया जाएगा. सिंधिया घाट, दशाश्वमेध, शिवाला, अस्सी होते हुए शोभायात्रा निषादराज घाट मंदिर पहुंचेगी. 

राम व निषाद सेवा के रूप में मनाएंगे प्राण प्रतिष्ठा दिवस

नाविक समाज के लोगों ने 22 जनवरी को भगवान राम व निषादराज सेवा दिवस के रूप में मनाने का ऐलान किया है. इस दिन नावों को आकर्षक ढंग से सजाया जाएगा. उस पर राम ध्वज लगाए जाएंगे. शंभु मांझी ने कहा कि भगवान राम निषादराज के आराध्य देव हैं. इस दिन भगवान राम और निषादराज का सुमिरन किया जाएगा. रामबाबू साहनी ने बताया कि शोभायात्रा में भगवान राम, लक्ष्मण, सीता के बाल स्वरूप और निषादराज के स्वरूप आकर्षण के केंद्र होंगे.