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जमकर वायरल होते हैं वीडियो, मुनावर फारूकी को नहीं दी थी जमानत, कौन हैं बीजेपी में शामिल होने वाले जज रोहित आर्य?

Rohit Arya: मध्य प्रदेश हाई कोर्ट के जज रोहित आर्य ने रविवार को बीजेपी की सदस्यता ग्रहण कर ली. रोहित आर्य अपने सख्त रवैये के लिए जाने जाते हैं. सोशल मीडिया पर कोर्ट की सुनवाई से जुड़े उनके कई वीडियो वायरल होते हैं. उन्होंने कई ऐसे मामलों पर फैसले सुनाए जो मीडिया की सुर्खियों में रहे.

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Rohit Arya: मध्य प्रदेश हाई कोर्ट के पूर्व जज रोहित आर्य बीजेपी में शामिल हो गए. वह लगभग 3 माह पहले ही रिटायर हुए थे. उन्होंने भोपाल में राज्य में पार्टी के प्रमुख राघवेंद्र शर्मा की मौजूदगी में बीजेपी की सदस्यता ग्रहण की है. 12 सितंबर 2013 को वह एमपी हाई कोर्ट के जज नियुक्त हुए थे. पूर्व जज की अध्यक्षता में कई ऐसे फैसले दिए गए जिन्होंने खूब सुर्खियां बटोरी. इनमें सबसे मशहूर मुनव्वर फारुकी को जमानत देने से इंकार करने वाला मामला भी शामिल था. 

रोहित आर्य सख्त रवैये के लिए जाना जाता है. 2021 में उन्होंने नए साल के दौरान धार्मिक भावनाएं भड़काने के आरोप में मुनव्वर फारुकी को जमानत देने से मना कर दिया था. उन्होंने अपने आदेश में सद्भाव और भाईचारे की भावना पर जोर देते हुए कहा कि राज्य को यह सुनिश्चित करना चाहिए जिससे हमारे लोक कल्याणकारी राज्य को नकारात्मक बातें या विचार ना दूषित कर सकें. हालांकि बाद में सुप्रीम कोर्ट ने हाई कोर्ट का आदेश रद्द करते हुए फारुकी को जमानत दे दी थी. 

क्या बोले रिटायर्ड जस्टिस? 

मध्य प्रदेश हाई कोर्ट के पूर्व न्यायाधीश रोहित आर्या ने बीजेपी में शामिल होने पर कहा कि उनकी सोच भाजपा के दर्शन से मेल खाती है. हालांकि, आर्य ने स्पष्ट किया कि उनका चुनाव लड़ने का कोई इरादा नहीं है और वह सिर्फ सार्वजनिक जीवन में रहना चाहते हैं. लाइव लॉ के एक इंटरव्यू में उन्होंने कहा कि राजनीति मेरे बस की बात नहीं है. मुझे चुनावी राजनीति में कोई दिलचस्पी नहीं है और मैं चुनाव लड़ने का इरादा नहीं रखता.  बस सार्वजनिक जीवन में रहना चाहता हूँ. बीजेपी  पार्टी के रूप में लोगों के लिए मेरे विचारों को वास्तविकता में बदलने में मेरी मदद करेगी.  मैं उन्हें कई सुझाव दूंगा.

चर्चित रहे फैसले 

साल 2020 में आर्य के एक फैसले ने काफी सुर्खियां बटोरी थीं. जिसमें छेड़छाड़ के एक मामले में एक आरोपी को इस शर्त पर जमानत दी गई थी कि वह रक्षा बंधन पर शिकायतकर्ता के सामने पेश होगा और अपनी कलाई पर राखी बंधवाएगा. हालांकि सुप्रीम कोर्ट ने बाद में इस फैसले को पलट दिया था.