'दोषियों को सजा मिलने तक पोस्टमार्टम नहीं होगा', मृतक किसान के परिवार ने ठुकराया 1 करोड़ का मुआवजा
Farmers Protest: पंजाब हरियाणा बॉर्डर पर कथित तौर पर पुलिस की गोली लगने से मारे गए शुभकरण सिंह के परिजनों ने सरकार की ओर से मिलने वाले नौकरी और मुआवजे को ठुकरा दिया है.
Farmers Protest: किसान आंदोलन के दौरान खनौरी बॉर्डर पर गोली लगने से मारे गए शुभकरण सिंह के परिजनों से पंजाब सरकार की ओर से मिलने वाले एक करोड़ रुपए के मुआवजे को ठुकरा दिया है. मृतक के परिजनों का कहना है कि हम अपने बच्चों के लिए न्याय की मांग कर रहे हैं जिसकी तुलना पैसे या नौकरी से नहीं की जा सकती है. मृतक के परिजनों ने आगे कहा कि हत्या में शामिल दोषियों को जब तक सजा नहीं मिल जाती तब तक शुभकरण का पोस्टमार्टम नहीं होगा.
पंजाब सरकार की ओर से खनौरी बॉर्डर पर मारे गए शुभकरण सिंह के परिवार के लिए मुआवजे का ऐलान किया गया था. पंजाब से मुख्यमंत्री भगवंत मान ने इस संबंध में अपने सोशल मीडिया प्लैटफॉर्म एक्स पर जानकारी साझा कर लिख था कि मृतक के परिवार को एक करोड़ रुपए का मुआवजा और शुभकरण की छोटी बहन को सरकारी नौकरी दिया जाएगा.
काला दिवस मना रहे हैं किसान
पंजाब हरियाणा बॉर्डर पर शुभकरण सिंह की मौत के विरोध में किसान आज काला दिवस मना रहे हैं. किसान की मौत के विरोध में बड़ी संख्या में किसान आज शंभु और खनौरी बॉर्डर पर सरकार के खिलाफ विरोध-प्रदर्शन कर रहे हैं. जानकारी के अनुसार आज शाम किसान नेता सरवन सिंह पंढेर आंदोलन को लेकर आगे की रणनीति तय करेंगे. आपको बताते चलें, बुधवार को हुई हिंसा के बाद किसानों ने दिल्ली चलो मार्च को दो दिन के लिए रोक दिया था.
Also Read
किसान आंदोलन को निहंग सिखों का समर्थन
दिल्ली कूच करने के लिए अड़े किसानों को अब निहंग सिख का भी समर्थन मिला है. रॉयटर्स की एक रिपोर्ट के अनुसार निहंगों में शामिल शेर सिंह ने अपने आध्यात्मिक नेता का जिक्र करते हुए कहा कि गुरु गोबिंद सिंह ने उपदेश दिया है कि अन्याय और उत्पीड़न के खिलाफ लड़ने के लिए सिखों को हमेशा तैयार रहना चाहिए. शेर सिंह ने कहा कि प्रदर्शनकारियों को अगर आधी रात में भी कोई परेशानी होती है तो हमें तैयार रहना होगा. आपको बताते चलें, साल 2020-21 में हुए किसान आंदोलन में भी निहंगों ने हिस्सा लिया था. वहीं, एक अन्य निहंग ने कहा कि सरकार किसानों पर अत्याचार कर रही है. सरकार किसानों को डराने के लिए नहीं सोचे हम किसानों के साथ खड़े हैं.