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बंगाल में बीजेपी की जीत पर पाक की नापाक हरकत, फेक हैंडल्स से भारत में भड़का रहा आग

पश्चिम बंगाल चुनाव के बाद सोशल मीडिया पर फेक न्यूज का जाल फैलाया गया. जांच में सामने आया कि कुछ संदिग्ध अकाउंट्स पाकिस्तान से संचालित होकर हिंसा और डर फैलाने की कोशिश कर रहे थे.

Social Media
Kanhaiya Kumar Jha

नई दिल्ली: पश्चिम बंगाल में बीजेपी की बड़ी जीत के बाद जहां राजनीतिक हलचल तेज हो गई है, वहीं सोशल मीडिया पर फर्जी खबरों की बाढ़ भी आ गई. ये खबरें सामान्य पोस्ट की तरह दिखती हैं, लेकिन इनके पीछे एक संगठित नेटवर्क काम करता नजर आ रहा है. जांच एजेंसियों और पुलिस की पड़ताल में खुलासा हुआ है कि कई संदिग्ध सोशल मीडिया अकाउंट्स, जो खुद को भारतीय बताते हैं, वास्तव में विदेश से ऑपरेट किए जा रहे हैं. इनका मकसद देश के भीतर भ्रम, डर और अस्थिरता पैदा करना है.

पश्चिम बंगाल चुनाव के बाद सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर भ्रामक सूचनाओं की संख्या अचानक बढ़ गई. इन पोस्ट्स में हिंसा, मौत और सरकारी कार्रवाई से जुड़े झूठे दावे किए गए. देखने में ये पोस्ट सामान्य लगती हैं, लेकिन इनका उद्देश्य लोगों को गुमराह करना और माहौल खराब करना है. पुलिस और जांच एजेंसियों का मानना है कि यह कोई सामान्य गतिविधि नहीं, बल्कि एक सुनियोजित नेटवर्क का हिस्सा है.

क्या है संदिग्ध अकाउंट की सच्चाई?

कोलकाता पुलिस ने ‘Anushi Tiwari proud Indian’ नाम के एक X अकाउंट की जांच की. यह अकाउंट खुद को भारतीय बताता था, लेकिन इसकी गतिविधियां संदिग्ध थीं. इस हैंडल से लगातार भड़काऊ और फर्जी पोस्ट साझा किए जा रहे थे. जांच में पता चला कि इसकी असली लोकेशन भारत में नहीं, बल्कि पाकिस्तान से जुड़ी हुई है. यह खुलासा बेहद चौंकाने वाला माना जा रहा है.

झूठे दावों से फैलाई गई दहशत

इस अकाउंट से एक पोस्ट में दावा किया गया कि चुनाव परिणामों के बाद 19 लोगों की मौत और 98 लोग घायल हुए. हालांकि इस दावे की कोई आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई. एक अन्य पोस्ट में कोलकाता में सेना तैनाती की बात कही गई, जो पूरी तरह गलत निकली. ऐसी खबरों ने सोशल मीडिया पर तेजी से फैलकर लोगों में डर और भ्रम पैदा किया.

नोएडा प्रोटेस्ट में भी यही पैटर्न

जांच में यह भी सामने आया कि यही अकाउंट पहले नोएडा में मजदूरों के प्रदर्शन के दौरान भी सक्रिय था. उस समय दावा किया गया था कि पुलिस फायरिंग में 14 लोगों की मौत हुई. यह खबर भी पूरी तरह झूठी थी, लेकिन इसके वायरल होने से इलाके में तनाव बढ़ गया. बाद में जांच में पुष्टि हुई कि यह अफवाह बाहरी स्रोतों से फैलाई गई थी.

नेटवर्क का तरीका और मकसद

नोएडा पुलिस की जांच में कई ऐसे अकाउंट्स सामने आए जो एक नेटवर्क की तरह काम कर रहे थे. ये सभी अकाउंट्स एक जैसी खबरें अलग-अलग प्लेटफॉर्म पर शेयर करते थे ताकि उन्हें सच जैसा दिखाया जा सके. VPN के जरिए अपनी पहचान छिपाकर ये लोग आसानी से अफवाह फैलाते हैं. इनका मकसद सिर्फ समाज में अस्थिरता और कानून-व्यवस्था को चुनौती देना है.

पुलिस ने लोगों से की सतर्क रहने की अपील

फिलहाल प्रशासन और पुलिस इन गतिविधियों पर नजर बनाए हुए हैं. लोगों से अपील की जा रही है कि सोशल मीडिया पर किसी भी जानकारी को बिना पुष्टि के साझा न करें. फेक न्यूज केवल भ्रम ही नहीं फैलाती, बल्कि कई बार हिंसा का कारण भी बन जाती है. ऐसे में जागरूक रहना और जिम्मेदारी से सोशल मीडिया का इस्तेमाल करना बेहद जरूरी है.