विवाद के बीच चुनाव आयोग की बड़ी बैठक, फॉर्म 6, ECINet और कैबिनेट सचिव पत्र पर दी सफाई
विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) विवाद पर निर्वाचन आयोग ने बैठक कर विस्तृत स्पष्टीकरण दिया. आयोग ने सर्वसम्मति, फॉर्म 6, मतदाता सत्यापन और प्रशासनिक फैसलों पर स्थिति पूरी तरह साफ की.
विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) प्रक्रिया और आंतरिक कामकाज पर उठ रहे सवालों के बीच शनिवार दोपहर 3 बजे नई दिल्ली स्थित निर्वाचन आयोग मुख्यालय में एक उच्च स्तरीय बैठक आयोजित की गई. मुख्य निर्वाचन आयुक्त (CEC) ज्ञानेश कुमार और निर्वाचन आयुक्त एसएस संधू तथा विवेक जोशी की उपस्थिति में हुई इस बैठक के बाद आयोग ने एक विस्तृत प्रेस नोट जारी किया. इसमें एसआईआर (SIR) प्रक्रिया, डिजिटल पोर्टल ECINet, फॉर्म 6, मतदाताओं के दावों और आपत्तियों की समयसीमा और कैबिनेट सचिव को भेजे गए आंतरिक पत्र से जुड़े तमाम विवादों पर बिंदुवार स्पष्टीकरण दिया गया.
कैबिनेट सचिव को लिखे पत्र पर दी गई सफाई
आयोग ने कैबिनेट सचिव को भेजे गए पत्र को लेकर पैदा हुई आशंकाओं को खारिज करते हुए कहा कि यह मामला चुनाव आयोग या उसके आईटी (IT) प्रभाग के किसी नीतिगत निर्णय से संबंधित नहीं था. यह केवल प्रतिनियुक्ति (deputation) पर आए एक अधिकारी के कामकाज से जुड़ा विषय था. आयोग ने स्पष्ट किया कि दो आयुक्तों के निर्देशों के बाद संबंधित अधिकारी द्वारा जारी कार्य पुनर्वितरण आदेशों को लागू नहीं किया गया था. इसके साथ ही, उप चुनाव आयुक्त (DEC) द्वारा आईटी डिविजन की निगरानी का अधिकार कभी वापस नहीं लिया गया था.
एसआईआर (SIR) आदेशों पर आयोग की सर्वसम्मति
निर्वाचन आयोग ने इस बात को पुरजोर ढंग से रखा कि एसआईआर (SIR) प्रक्रिया को लेकर आयोग के भीतर कोई मतभेद नहीं था. आयोग के अनुसार, 24 जून 2025 को बिहार, पश्चिम बंगाल और अन्य 30 राज्यों तथा केंद्र शासित प्रदेशों के लिए जारी किया गया SIR आदेश आयोग की "सर्वसम्मत मंजूरी" से जारी किया गया था. इस आदेश को 27 मई 2026 को उच्चतम न्यायालय (Supreme Court) ने भी सही ठहराया था. इसके अलावा, अक्टूबर 2025 में 12 राज्यों और मई 2026 में 19 राज्यों के लिए जारी किए गए शेड्यूल भी तीनों आयुक्तों की पूर्ण सहमति से ही स्वीकृत किए गए थे.
अनमैप्ड मतदाताओं के लिए भौतिक सत्यापन नियम आसान
जिन मतदाताओं को "अनमैप्ड" होने या तार्किक विसंगतियों (logical discrepancies) के कारण नोटिस प्राप्त हुए हैं, उनके लिए आयोग ने सत्यापन प्रक्रिया को अत्यंत सरल बना दिया है. अब बूथ लेवल अधिकारी (BLO) खुद ऐसे मतदाताओं के घर जाकर आवश्यक दस्तावेज एकत्र करेंगे और उन्हें निर्णय हेतु निर्वाचक पंजीकरण अधिकारी (ERO) के लिए ECINet पर अपलोड करेंगे. प्रभावित मतदाताओं को ERO या AERO कार्यालय में व्यक्तिगत सुनवाई के लिए आने की आवश्यकता नहीं होगी. केवल असाधारण परिस्थितियों में ही वर्चुअल (ऑनलाइन) सुनवाई आयोजित की जाएगी, जिसमें मतदाता द्वारा अधिकृत परिवार का कोई वयस्क सदस्य भी शामिल हो सकता है. इसके अलावा बेघर, गरीब और रात के आश्रय स्थलों में रहने वाले लोगों के लिए विशेष शिविर लगाने के निर्देश दिए गए हैं.
फॉर्म 6 और मतदाता नामांकन पर स्थिति स्पष्ट
फॉर्म 6 पर स्थिति स्पष्ट करते हुए आयोग ने कहा कि SIR प्रक्रिया के लिए फॉर्म 6 के साथ संलग्न घोषणा पत्र को माननीय उच्चतम न्यायालय ने वैध माना है. जब एसआईआर की प्रक्रिया नहीं चल रही होती है, तब निर्वाचकों का पंजीकरण नियम 1960 के तहत निर्धारित मानक फॉर्म का उपयोग किया जाता है. बिहार और पश्चिम बंगाल सहित 20 राज्यों/केंद्र शासित प्रदेशों में SIR का काम पूरा हो चुका है. जिन पात्र लोगों के नाम छूट गए हैं या जो नए युवा मतदाता हैं, वे निरंतर अद्यतनीकरण (continuous updation) प्रक्रिया के तहत ERO के पास आवेदन कर सकते हैं.
ECINet समीक्षा के लिए स्वतंत्र विशेषज्ञ समिति का गठन
चुनाव आयोग के डिजिटल प्लेटफॉर्म 'ECINet' को लेकर आयोग ने स्पष्ट किया कि फील्ड अधिकारियों को उनके वैधानिक अधिकारों के आधार पर ही सिस्टम का एक्सेस दिया गया है. आयोग ने ECINet की कार्यप्रणाली की समीक्षा के लिए एक वरिष्ठ उप चुनाव आयुक्त की अध्यक्षता में समिति गठित की है, जिसमें IIT या IIIT के स्वतंत्र विशेषज्ञ शामिल होंगे. यह समिति जांचेगी कि पोर्टल सभी कानूनी प्रावधानों और नियमों का पूरी तरह पालन कर रहा है या नहीं. भविष्य में आईटी मॉड्यूल से जुड़ी सभी नई पहलों को आयोग की मंजूरी से पहले अधिकारियों की समिति द्वारा परखा जाएगा.
दिल्ली और महाराष्ट्र में SIR समयसीमा का विस्तार
जनहित और मुख्य निर्वाचन अधिकारियों (CEO) के अनुरोध को ध्यान में रखते हुए आयोग ने दिल्ली और महाराष्ट्र में दावों व आपत्तियों की अंतिम तिथि बढ़ा दी है. दिल्ली में अब 30 अक्टूबर तक दावे और आपत्तियां दर्ज की जा सकती हैं, जबकि इनका निस्तारण 30 नवंबर तक होगा. इसी तरह महाराष्ट्र में आवेदन की अंतिम तिथि बढ़ाकर 12 अक्टूबर और निस्तारण की तिथि 10 नवंबर कर दी गई है.
प्रशासनिक पारदर्शिता और राजनीतिक हलचल
आयोग ने आंतरिक प्रशासनिक पारदर्शिता बढ़ाने के लिए कई नए नियम तय किए हैं. अब आयोग की सभी बैठकों का एजेंडा पहले से प्रसारित किया जाएगा और मिनट्स (कार्यवृत्त) जारी किए जाएंगे. अधिकारियों की वार्षिक रिपोर्ट (APAR) हर साल 31 दिसंबर तक पूरी होगी तथा विदेश यात्राओं के लिए आयोग की पूर्व स्वीकृति अनिवार्य होगी. दूसरी तरफ, विपक्ष इस मामले में आक्रामक रुख अपनाए हुए हैं और मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग कर रहा है.