क्यों नहीं बुझ रही है राजौरी के जंगलों की आग, फिर सुलगे कई इलाके, शिमला का क्या है हाल?

रविवार को जम्मू-कश्मीर के उधमपुर जिले के गंगेरा पहाड़ियों के जंगल में भीषण आग लग गई. इस आग ने जंगल के कई पेड़ों को अपनी जद में ले लिया.

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India Daily Live

Forest Fire: इंसानी करतूतों के कारण धरती के बढ़ते तापमान की वजह से लगातार जंगलों में आग लगने की घटनाएं सामने आ रही हैं. उत्तराखंड, हिमाचल के बाद अब खूबसूरत जम्मू-कश्मीर के जंगलों में भी आग अपना कहर बरपा रही है. रविवार को जम्मू-कश्मीर के उधमपुर जिले के गंगेरा पहाड़ियों के जंगल में भीषण आग लग गई. इस आग ने जंगल के कई पेड़ों को अपनी जद में ले लिया. आग को बुझाने और इसके प्रभाव को कम करने के लगातार प्रयास किये जा रहे हैं.

बढ़ते तापमान के कारण इस क्षेत्र में पिछले कुछ दिनों में आग लगने की कई घटनाएं देखने को मिली हैं. दो-तीन दिन पहले जम्मू कश्मीर के राजौरी सेक्टर के जंगल में आग लग गई थी.

अब तक 80 हजार से ज्यादा जगहों पर लगी आग
1 मई से 27 मई तक देश में कुल 80 हजार जगहों पर आग लगने की घटनाएं दर्ज हो चुकी हैं. सैटेलाइट इमेज से इन घटनाओं की पुष्टि हुई हैं. इनमें से ज्यादातर आग जंगलों में लगी.

हिमाचल में आग की घटनाओं में 1500 फीसदी की बढ़त
अपनी खूबसूरती और प्राकृतिक सुंदरता के लिए मशहूर हिमाचल और शिमला आग से जल रहे हैं. पिछले साल की तुलना में हिमाचल में इस बार आग की घटनाओं में 1500 फीसदी का इजाफा हुआ है, वहीं उत्तराखंड में आग की घटनाओं में 700 फीसदी का इजाफा हुआ है.

क्या बढ़ता तापमान ही आग लगने का कारण

आज तक की रिपोर्ट के मुताबिक, आईआईटी रुड़की के सेंटर ऑफ एक्सीलेंस इन डिजास्टर मिटिगेशन एंड मैनेजमेंट विभाग के प्रोफेसर पीयूष श्रीवास्तव ने बताया कि हिमालयी राज्यों में मिश्रित जंगल हैं. यहां के जंगलों में सूखी पत्तियां, चीड़-देवदार के निडिल का ईंधन है, जिसे ड्राई फ्यूल कंडीशन कहा जाता है.

उन्होंने कहा कि हर तरह के मौसम की तरह जंगलों में भी आग लगने का मौसम चल रहा है, जिसे वाइल्ड फायर सीजन  (wildfire season) कहते हैं. उन्होंने कहा कि भारत में यह मौसम आम तौर पर नवंबर से जून तक होता है लेकिन इस बार प्री-मॉनसून सीजन में पश्चिमी विक्षोभ की घटनाएं कम हुई हैं, बर्फबारी भी कम हुई है, बारिश भी नहीं हुई.

प्रो. पीयूष ने कहा कि आम तौर पर इस सीजन में विक्षोभ की 15-20 घटनाएं होती थीं लेकिन इस बार केवल 7-8 बार ही इस तरह की घटनाएं हुईं, जिसके कारण बारिश में कमी आई. बारिश न होने से सतह में नमी नहीं बची, जंगल सर्दियों में भी सूखे रहे जिससे फरवरी में भी आग लगने की घटनाएं हुईं.